Reza Pahlavi Appeals to Public to Capture Cities: ईरान में बीते दो हफ्तों से जारी जनविद्रोह अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. महंगाई और बदहाल अर्थव्यवस्था से शुरू हुआ गुस्सा अब सीधे इस्लामिक शासन को हटाने की मांग में बदल गया है. इसी बीच ईरान के अपदस्थ शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के बेटे रजा पहलवी भी मौका देखकर खुलकर सामने आ गए हैं. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि अब केवल विरोध नहीं करना है बल्कि शहरों के केंद्रों पर कब्जा करने की तैयारी करनी होगी.
रविवार को संगठित तरीके से करें प्रदर्शन- रजा पहलवी
अमेरिका में रह रहे रजा पहलवी ने शुक्रवार को ईरान में हुए विशाल प्रदर्शनों की सराहना की. उन्होंने कहा कि यह शानदार जनसमर्थन ईरान के भविष्य का संकेत है. उन्होंने लोगों से रविवार को और ज्यादा संगठित तरीके से रणनीतिक प्रदर्शन करने की अपील की. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को साफ संदेश दिया कि अब महज नाराजगी जताने से काम नहीं चलेगा बल्कि सीधे सत्ता को चुनौती देनी होगी.
ईरानी सत्ता में घबराहट का माहौल
उधर ईरान में जैसे-जैसे प्रदर्शनकारी हावी हो रहे हैं, ईरानी नेता घबराए हुए हैं. खामेनेई के नियंत्रण वाली ईरानी सेना ने ऐलान किया है कि वह रणनीतिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करेगी. इसके साथ ही सेना ने लोगों से दुश्मन की साजिशों को नाकाम करने की अपील की है. राजनीतिक एक्सपर्टों का कहना है कि इस बार हालात गंभीर हैं. ईरान का सत्ता प्रतिष्ठान अब विरोध को सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि बगावत मान रहा है. ऐसे में वह इसे कुचलने में पूरी शक्ति लगा सकता है.
ट्रंप ने फिर ईरान को धमकाया
उधर ईरान पर अमेरिका का प्रेशर भी लगातार बना हुआ है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिरस कहा है कि अगर तेहरान सरकार प्रदर्शनकारियों की हत्या करती है तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा. उन्होंने इशारों में कहा कि अमेरिका जवाब देगा. फिर भले ही सेना भेजे या कोई और एक्शन ले. ट्रंप ने यह भी साफ किया कि फिलहाल वह रज़ा पहलवी से मिलने के इच्छुक नहीं हैं. यानी वॉशिंगटन हालात का इंतजार कर रहा है.
इस्लामिक गणराज्य झुकेगा नहीं – खामेनेई
दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई ने विद्रोहियों को उपद्रवी बताते हुए कहा कि इस्लामिक गणराज्य झुकेगा नहीं. उन्होंने आरोप लगाया कि लोग अमेरिका को खुश करने के लिए अपने ही शहरों को जला रहे हैं. लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है और यह आंदोलन 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद शासन के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है.
‘बड़े नरसंहार की तैयारी कर रही सरकार’
कई शहरों में सरकारी इमारतों को आग लगाए जाने और सुरक्षा बलों के अंतिम संस्कारों की तस्वीरें भी सामने आ रही हैं. इस बीच नोबेल शांति पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी ने चेतावनी दी है कि सरकार संचार व्यवस्था बंद कर किसी बड़े नरसंहार की तैयारी कर सकती है. कुल मिलाकर ईरान आज उस मोड़ पर खड़ा है जहां या तो शासन खुद को बचा लेगा. ऐसा नहीं हो पाया तो फिर देश एक नए राजनीतिक युग में प्रवेश करेगा.
