operation hawkeye strike in syria: अमेरिका ने सीरिया में आतंकी संगठन आईएसआईएस के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक नाम दिया है. इस अभियान के तहत अमेरिका और उसके सहयोगी बलों ने सीरिया के कई इलाकों में आईएसआईएस के ठिकानों पर एक साथ हवाई हमले किए हैं. सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ये हमले अमेरिकी समय के अनुसार दोपहर करीब 12:30 बजे किए गए थे. इस कार्रवाई का मकसद आईएसआईएस को पूरी तरह कमजोर करना और भविष्य में होने वाले हमलों को रोकना बताया गया है.
ठिकानों को बनाया निशाना
CENTCOM ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह अभियान आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका की लगातार जारी लड़ाई का हिस्सा है. अमेरिकी सेना का कहना है कि आईएसआईएस अब भी क्षेत्र में खतरा बना हुआ है और वह अमेरिकी व सहयोगी बलों पर हमले की कोशिश करता रहता है. इसी वजह से सीरिया में मौजूद आईएसआईएस के ठिकानों को निशाना बनाया गया है. अमेरिका ने साफ किया है कि वह अपने सैनिकों और साझेदार देशों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा.
यह ऑपरेशन दिसंबर 2025 में शुरू किया गया था. इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर लॉन्च किया गया है. इसकी वजह 13 दिसंबर 2025 को सीरिया के पालमायरा में हुआ आईएसआईएस हमला था. इस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों और एक अमेरिकी नागरिक की मौत हो गई थी. CENTCOM के मुताबिक, यह हमला आईएसआईएस के एक आतंकी ने किया था. उसी घटना के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई का फैसला लिया है.
दुनिया के किसी भी कोने में जाकर आतंकियों को मारेंगे
अमेरिकी सेना ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर कोई संगठन या आतंकी अमेरिकी सैनिकों को नुकसान पहुंचाएगा, तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा. CENTCOM ने कहा कि अमेरिका दुनिया के किसी भी कोने में जाकर आतंकियों को ढूंढ सकता है और उन्हें जवाब दे सकता है. इस बयान को आईएसआईएस और अन्य आतंकी संगठनों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ताजा सैन्य कार्रवाई में अमेरिका ने 90 से ज्यादा सटीक हथियारों का इस्तेमाल किया है. करीब 35 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है. इस ऑपरेशन में दो दर्जन से ज्यादा लड़ाकू विमान शामिल थे. मारे गए अमेरिकी सैनिकों की पहचान आयोवा नेशनल गार्ड के जवानों के रूप में हुई थी. अमेरिका ने दोहराया है कि आईएसआईएस को खत्म करने का अभियान आगे भी जारी रहेगा और क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे.
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