Iran Protest: ईरान फांसी की सजा देकर विद्रोहियों को सख्त संदेश देने जा रहा है तो अमेरिका से ईरान के आंदोलनकारियों के नाम नया संदेश आ चुका है. ये संदेश अब से थोड़ी देर पहले ही आया है.  ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट के ज़रिए भी ईरान के प्रदर्शनकारियों को बड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा है कि आप विरोध करते रहे, मदद आ रही है. ट्रंप ने संस्थानों पर कब्जा करने की अपील प्रदर्शनकारियों से की है. उन्होंने ईरान के साथ सभी बैठक रद्द करने का भी एलान किया है. उन्होंने कहा कि जो लोग प्रदर्शनकारियों की हत्या कर रहे हैं, उन्हें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी. यानी ये पोस्ट भी ईरान पर हमले का बड़ा संकेत है. 

ट्रंप के अगले कदम पर पूरी दुनिया की नजर 

पिछले 15 दिनों से ट्रंप ईरान को धमकी दे रहे हैं. ईरान में प्रदर्शन की शुरुआत में ही ट्रंप ने कहा था कि अगर प्रदर्शनकारियों से सख्ती की गई तो वो जवाबी हमले के लिए तैयार हैं. ऐसे में ट्रंप के अगले कदम पर पूरी दुनिया की नजर है. इसका कारण ये है कि ईरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बहुत ज्यादा सख्ती कर रहा है. एक तरफ प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई जा रही है तो दूसरी तरफ उन्हें फांसी पर लटकाने की तैयारी हो रही है. ऐसे में ट्रंप के लिए अब ईरान को लेकर निर्णायक समय आ गया है. अमेरिका में आज की रात ईरान को लेकर फ़ैसले की रात है. ट्रंप ने ईरान पर अगले कदम के लिए अपने प्रशासन के बड़े अधिकारियों की बैठक बुलाई है. इसमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और अमेरिका के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी जनरल डैन केन शामिल होंगे. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस बैठक में ईरान के ख़िलाफ़ कार्रवाई के विकल्पों पर चर्चा होगी. ये बैठक इस बात का संकेत माना जा रहा है कि खामेनेई सरकार के द्वारा प्रदर्शनकारियों पर सख्ती के खिलाफ ट्रंप ठोस कदम उठाने जा रहे हैं, लेकिन इस बैठक से पहले भी कई ऐसे फैसले लिए गए हैं, कई संकेत दिए गए हैं जो ये बताते हैं कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर बड़ा हमला कर सकता है. आज हम बारी-बारी से उन फैसलों के बारे में बताएंगे जो ईरान पर अमेरिकी हमले का इशारा कर रहे हैं. 

ईरान पर हवाई हमला करेंगे ट्रंप? 

अमेरिका ने एक बार फिर हवाई हमले की बात कही है. ईरान पर अमेरिकी हमले का सबसे बड़ा संकेत कतर में अल उदैद एयर बेस से आया है. ये मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है. पिछले कुछ दिनों में अल उदैद एयर बेस पर अमेरिकी युद्धक विमानों की आवाजाही बढ़ गई है. ये एयर बेस ईरान की सीमा से केवल 200-300 किलोमीटर दूर है. यहां 10 हज़ार से ज़्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. यहां विमानों की हलचल में बढ़ोतरी सीधे-सीधे ईरान के लिए चेतावनी है. अमेरिका ने जहां मिडिल ईस्ट में अपने सबसे बड़े सैन्य अड्डे पर सैन्य हलचल बढ़ाई है, वहीं उसने ईरान में मौजूद अपने नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने को कहा है. अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से जारी तनाव की वजह से ईरान में अमेरिकी नागरिकों की संख्या 100 से भी कम बताई जाती है, लेकिन ऐसे नागरिक ईरान में हैं जिनके पास दोनों देशों की नागरिकता है. अमेरिका की एडवाइजरी में इन नागरिकों पर ख़तरा बताया गया है और उन्हें ईरान से लौटने को कहा गया है. अमेरिका के अलावा फ्रांस ने भी तेहरान में अपने दूतावास से बेहद जरूरी कर्मचारियों को छोड़कर बाकी को वापस बुला लिया है. ऑस्ट्रेलिया और स्वीडन ने भी अपने नागरिकों को वापस आने के लिए कहा है. अमेरिका के साथ-साथ इज़रायल ने भी तैयारी शुरू कर दी है. इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों के लिए आपातकालीन तैयारी की गाइडलाइन जारी की है. इसका उद्देश्य अस्पतालों को किसी भी स्थिति के लिए तैयार करना है. ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि अगर ईरान पर अमेरिका हमला करता है तो इसके जवाब में ईरान, इजरायल पर निशाना साधेगा. तैयारी मिडिल ईस्ट के देश भी कर रहे हैं. बहरीन ने नेशनल इमरजेंसी प्लान को एक्टिवेट कर दिया है. इसके तहत वॉर्निंग सायरन का टेस्ट किया जा रहा है.

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ईरान अमेरिका का युद्ध टलेगा? 

एक तरफ ट्रंप ईरान पर हमले का संकेत दे रहे हैं तो दूसरी तरफ ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध टालने या कहें ट्रंप का हमला टालने की कवायद भी चल रही है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से बात की है. कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत कराने में ओमान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, हालांकि इस बातचीत के बावजूद ईरान अपने रुख से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है. युद्ध को टालने के लिए बातचीत की शुरुआत हुई तो है लेकिन इस वार्ता से बहुत ज़्यादा उम्मीद नहीं रखनी चाहिए. वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को कैप्चर करने में मिली सफलता से ट्रंप के हौसले बढ़े हुए हैं. ऐसे में वो ईरान को लेकर अपनी शर्त पर अड़े रहेंगे. इस बातचीत की सफलता ट्रंप के आगे ईरान के झुकने पर निर्भर करती है. अब आपको ये भी जानना चाहिए कि ईरान के सामने ट्रंप की क्या-क्या शर्तें हैं.अमेरिका ईरान से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा तुरंत रोकने को कहा रहा है, अमेरिका सभी गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को रिहा करने के लिए भी कह रहा है. प्रदर्शन के दौरान 10 हजार से ज़्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है, ट्रंप ये भी चाहते हैं कि ईरान के पास मौजूद 408 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम अमेरिका या अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में सौंपा जाए, अमेरिका की पुरानी मांग है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करे, लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम बंद करे और हिजबुल्लाह, हूती और हमास को सभी समर्थन बंद करे. ये ऐसी शर्तें हैं जो ईरान की संप्रभुता के पूरी तरह खिलाफ हैं. अगर ईरान इन शर्तों को मान लेता है तो इस्लामिक सत्ता का आधार खत्म हो जाएगा.

ईरान का रुख क्या है? 

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा रोकने और उन्हें रिहा करने का मतलब होगा सरकार की कमजोरी दिखाना. यूरेनियम संवर्धन को लेकर ईरान का रुख रहा है कि ये उसका अधिकार है और पूरी तरह संवर्धन रोकना या सौंपना असंभव है. हिजबुल्लाह, हूती और हमास को समर्थन बंद करने से ईरान की क्षेत्रीय स्तर पर कमजोर होगा. अमेरिका का दावा है कि ईरान सार्वजनिक रूप से जो कह रहा है, वो निजी बातचीत से अलग है. यानी निजी बातचीत में ईरान झुकने के लिए तैयार हैं. लेकिन इसके बावजूद अमेरिका की शर्तों को देखते हुए बातचीत से ज़्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती है. बातचीत सिर्फ़ कार्रवाई को टालने का समय बढ़ा सकती है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि ट्रंप ईरान के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई कर सकते हैं. क्या पिछली बार की तरह अमेरिका के निशाने पर ईरान के परमाणु ठिकाने होंगे या इस बार खामेनेई और उनकी सत्ता से जुड़ी लोगों पर पिनप्वाइंट करके हमला होगा. इस सवाल के जवाब पर पूरी दुनिया की नजर है.