
DNA: डॉनल्ड ट्रंप और आसिम मुनीर की सीक्रेट डील पर बड़ा खुलासा हुआ है. मुनीर ने हाफिज सईद के आतंकियों को 2 नए टारगेट दिये हैं. पहला टारगेट- ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की गर्दन और दूसरा टारगेट- हिंदुओं की गर्दन. मुनीर के दूसरे टारगेट के बारे में हम आपको बताएंगे, लेकिन सबसे पहले पहले बात खलीफा के खिलाफ पाकिस्तान की बड़ी साजिश की.
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ईरान के पूर्वी बॉर्डर के कुछ इलाकों के हैं . इन तस्वीरों में आपको नजर आएगा किस तरह ईरान की इलीट मिलिट्री यूनिट यानी IRGC के कमांडो सादे कपड़ों में एक ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं. IRGC का दावा है कि जिन लोगों को पकड़ा गया है वो सुपारी लेकर हत्या करने वाले हमलावर थे. वीडियो आगे बढ़ता है तो इन कथित हमलावरों से बरामद किया गया सामान भी नजर आता है . IRGC के मुताबिक गिरफ्तार किए गए लोगों से बम बनाने की सामग्री और कुछ जहर से भरे मेडिकल पाउच बरामद हुए हैं.
#DNAमित्रों | मुनीर के आतंकी..काम पर! ईरान में पाकिस्तान के आतंकी पकड़े गए
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— Zee News (@ZeeNews) January 14, 2026
ईरान को कब मिली संदिग्धों से जुड़ी पहली खबर?
ईरान की सुरक्षा एजेंसियों ने इन गिरफ्तारियों को लेकर जो जानकारी मीडिया के सामने रखी है उसके मुताबिक, हमलावरों की ऐसी कई सेल पूर्वी बॉर्डर पर सक्रिय थीं . ईरानी इंटेलिजेंस को इन संदिग्धों से जुड़ी पहली खबर 3 जनवरी को मिली थी. ये वही वक्त है जब ईरान में खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन तेज होने शुरु हुए थे . पूर्वी बॉर्डर पर किए गए ऑपरेशन में अब तक 200 संदिग्ध पकड़े जा चुके हैं और इनके 273 ऑटोमैटिक हथियार बरामद हुए हैं . ईरान का दावा है कि बरामद किए गए हथियार अमेरिका और इजरायल में बने हैं .
ईरान की सुरक्षा एजेंसियों के इस ऑपरेशन से दो बड़ी जानकारी सामने आई हैं . पहली जानकारी है कि बरामद किए गए हथियार अमेरिकी और इजरायली हैं . ये तथ्य चौंकाने वाला नहीं है क्योंकि इजरायल और अमेरिका दोनों ही खामेनेई के विरोधी हैं . लेकिन दूसरा तथ्य यानी ईरान का पूर्वी बॉर्डरवो गौर करने लायक है . ईरान अपना पूर्वी बॉर्डर पाकिस्तान के साथ साझा करता है. ईरान और पाकिस्तान का ये बॉर्डर तकरीबन 909 किलोमीटर लंबा है.
हथियार लदे हथियार पहुंचे थे पाकिस्तान
12 जनवरी को एक अमेरिकी जहाज पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर आया था. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस जहाज में ऑटोमैटिक हथियार लदे हुए थे . 13 जनवरी को मुनीर ने ईरान से लगते बॉर्डर पर अतिरिक्त तैनाती के लिए 30 हजार फौजियों को भेजने का हुक्म दिया था और आज यानी 14 जनवरी को ईरान-पाकिस्तान बॉर्डर से ही हथियारबंद संदिग्धों की गिरफ्तारी होती है .
ये सभी तथ्य साफ-साफ बताते हैं ईरान में हो रही बगावत का पाकिस्तान फायदा उठा रहा है . इन प्रदर्शनों की आड़ में अमेरिका को खुश करने के लिए आसिम मुनीर ईरान के बड़े राजनीतिक किरदारों को निशाना बनाने की फिराक में है. बहुत मुमकिन कि जिस साजिश का ईरान ने पर्दाफाश किया उसका निशाना ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई भी हों. पाकिस्तान से हो रही साजिश सिर्फ हमारा आंकलन नहीं है . ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खुमेनेई के पोते हसन खुमेनेई भी कह रहे हैं कि ईरान के खिलाफ पड़ोसी देश ही साजिश रच रहे हैं .
#DNAमित्रों | ‘मुनीर सेना’ के पास इजरायली हथियार कैसे आए? ट्रंप से मुनीर ने डॉलर वाली ‘सुपारी’ ले ली ? #DNA #DNAWithRahulSinha #Pakistan #AsimMunir #Israel #UnitedStates #DonaldTrump @RahulSinhaTV pic.twitter.com/VSTqWgtyOx
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पाकिस्तान दे रहा दोस्त को दगा?
अमेरिका और इजरायल को ईरान का दुश्मन माना जाता है लेकिन हसन खुमेनेई ने कभी उनका नाम नहीं लिया . हसन ने सीधे-सीधे ईरान के पड़ोसियों को इन हालात का जिम्मेदार ठहराया है जिनमें से एक पाकिस्तान भी है . अपने दोस्तों को दगा देना पाकिस्तानी सिस्टम की पुरानी फितरत है लेकिन फील्ड मार्शल आसिम मुनीर एक कदम आगे निकल गया है . अमेरिकी डॉलर को हासिल करने के लिए मुनीर ने दीन और ईमान को गिरवी रख दिया है. डॉलर के लिए पाकिस्तान इस्लामिक ब्रदर कहे जाने वाले ईरान को भी धोखा देने के लिए राजी हो गया है .
जब मुनीर ने ट्रंप को भेजा था ईमेल
पाकिस्तान का दूसरा नाम धोखा ही है . पाकिस्तानी फौज आपसे ऐसे वादे करेगी जिनपर आप खुद भरोसा नहीं कर पाएंगे . हर कदम पर हर किसी को धोखा देना, यही पाकिस्तानी फौज की फितरत है. पाकिस्तानी फौज और आसिम मुनीर की यही फरेब से भरी फितरत एक बार फिर ईरान के मामले में एक्सपोज हो गई है . मुनीर ने ये प्लान अचानक नहीं बनाया है बल्कि इसकी तैयारी उसी वक्त कर ली गई थी जब वॉशिंगटन में ट्रंप और मुनीर की मुलाकात हुई थी . 18 जून 2025 को हुई उस मुलाकात के बाद मुनीर ने ट्रंप के दफ्तर को एक ई-मेल भेजा था . ईरान में जारी तनाव के बीच एक अमेरिकी संस्था ने ये ई-मेल सार्वजनिक किया है .
ट्रंप के लिए किस हद तक जा सकते हैं मुनीर?
इस मेल में मुनीर की तरफ से एक चैप्टर जोड़ा गया था जिसका टाइटल था GEO POLITICAL AND SECURITY COOPERATION . इस चैप्टर में मुनीर ने लिखा था कि अमेरिका और पाकिस्तान के भावी संबंधों को लेकर ट्रंप प्रशासन को दूसरे देशों की फिक्र या ऐतराज के बारे में नहीं सोचना चाहिए . इस ई-मेल के जरिए मुनीर ने ट्रंप को बता दिया था कि अमेरिका से रिश्तों के लिए अगर पाकिस्तान को चीन या ईरान जैसे दोस्तों की कुर्बानी देनी होगी, तो मुनीर उसके लिए भी तैयार है . सहयोगी देशों को धोखा देने का जो वादा मुनीर ने ट्रंप के साथ किया था . आज वो हकीकत की शक्ल लेता नजर आ रहा है . ईरान को लेकर मुनीर के इरादों को सिर्फ भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ही एक्सपोज नहीं कर रहे हैं बल्कि पाकिस्तानी फौज से जुड़े रहे किरदार भी साफ-साफ कह रहे हैं कि ट्रंप के लिए मुनीर खलीफा यानी खामेनेई के साथ कुछ भी कर गुजरेगा .
ट्रंप ने ईरान में तख्तापलट के लिए मुनीर को क्यों चुना?
हो सकता है कि आपके अंदर ये सवाल उठ रहा हो कि जब अमेरिका के राष्ट्रपति के पास इतनी फायर पावर होती है कि वो खुद हमला करके ईरान को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं, तो खामेनेई का तख्तापलट करने के लिए ट्रंप ने मुनीर को ही क्यों चुना. मुनीर पर दांव खेलने की सबसे बड़ी वजह है ईरान में मौजूद पाकिस्तानी शरणार्थी . ईरान में तकरीबन 35 से 60 हजार पाकिस्तानी शरणार्थी हैं. इनमें से सैकड़ों पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के लिए काम करते हैं.
मुनीर को तख्तापलट की जिम्मेदारी देने की दूसरी बड़ी वजह है पाकिस्तान ईरान का वो बॉर्डर जहां से तस्करी या आवाजाही बहुत आसान है . इन रास्तों के जरिए खामेनेई के बागियों को हथियार पहुंचाए जा सकते हैं. ट्रंप के पास तीसरी बड़ी वजह है मुनीर की प्रोफाइल. मुनीर एकमात्र ऐसा पाकिस्तानी आर्मी चीफ रहा है जिसने ISI और मिलिट्री इंटेलिजेंस दोनों की कमान संभाली है. इन पदों की वजह से मुनीर को ईरान के सभी समीकरणों की पूरी जानकारी है.
कई देशों में तख्तापलट कराता आ रहा है अमेरिका
मुनीर को खामेनेई की सुपारी देने की चौथी बड़ी वजह है पाकिस्तान के हवाई अड्डे. अगर अंदरूनी बगावत और हमलावरों के जरिए ईरान की टॉप लीडरशिप को खत्म करने का प्लान फेल हो जाता है. तो ऐसी सूरत में अमेरिका पाकिस्तान के हवाई अड्डों से ईरान पर सीधी और सटीक स्ट्राइक कर सकता है . ईरान सिर्फ एक चैप्टर है . सालों से अमेरिका दूसरे देशों में सरकारों को अपनी मर्जी के मुताबिक बदलता रहा है, तख्तापलट कराता रहा है. अमेरिका की इसी नीति को लेकर बुद्धीजीवी नोआम चोमस्की ने कहा था. अमेरिका ने जितने तख्तापलट कराए हैं, अगर उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तराजू पर तोला जाए तो अमेरिका के हर राष्ट्रपति को फांसी हो जाए. तख्तापलट की नई अमेरिकी साजिश को डॉनल्ड ट्रंप ने रचा है और उनका हथियार बना है पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर . यहां आपको ये भी जानना चाहिए कि तख्तापलट कराने की इस नीति में पाकिस्तान और अमेरिका बहुत पुराने पार्टनर रहे हैं .
इस पार्टनरशिप में तख्तापलट की पहली डील वर्ष 1979 में की गई थी . पाकिस्तान के तानाशाह जिया-उल-हक ने अमेरिका के कहने पर अफगानिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार का तख्तापलट करा दिया था . वर्ष 1990 में जब अमेरिका ने इराक पर हमला किया था तो इराकी फौज के पलायन को रोकने के लिए पाकिस्तान ने सऊदी अरब में 13 हजार सैनिकों को तैनात कर दिया था. मकसद था सद्दाम हुसैन का तख्तापलट करना . वर्ष 2001 में पाकिस्तान ने तालिबान के खिलाफ हमलों के लिए अपने हवाई अड्डे अमेरिका को दिए थे. अमेरिकी हमलों की वजह से अफगानिस्तान में तालिबान की पहली अमीरात यानी सरकार गिरा दी गई थी .
जब तालिबान को पाकिस्तान ने बेच दिया
जिस तालिबान को पाकिस्तान ने खड़ा किया . जिस तालिबान के लड़ाके पाकिस्तानी मदरसों से निकले, उसी तालिबान को, डॉलर के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका को बेच दिया . खामेनेई से तो पाकिस्तान के इतने करीबी रिश्ते भी नहीं हैं . यानी ईरान को निशाना बनाने में मुनीर को कोई अपराध बोध नहीं होगा और रही बात अमेरिका की तो, उसे अपराध बोध कभी होता ही नहीं. इतिहास बताता है कि जब अमेरिका का किसी दूसरे देश में कोई दांव नहीं चलता तो वहां विरोधी नेता की सीधे हत्या करा दी जाती है .
हमलावरों के जरिए स्टेट हेड्स के खात्मे का ये सिलसिला साल 1961 में शुरु हुआ था . अमेरिका ने डॉमिनिकन रिपब्लिक के राष्ट्रपति राफेल ट्रुजिलो की की हत्या के लिए बागियों को हथियार दिए थे . साल 1963 में अमेरिका ने वियतनाम के सैन्य अधिकारियों की मदद की थी . इस मदद के बदले में वियतनाम में तख्तापलट किया गया और राष्ट्रपति डिन डीम की हत्या कर दी गई थी . साल 2011 में लीबिया के तानाशाह गद्दाफी के काफिले की जानकारी भी अमेरिका ने ही बागियों को दी थी . इसी जानकारी के आधार पर बागियों ने सड़क पर गद्दाफी को बेरहमी से कत्ल कर दिया था .
अमेरिका ने कई बार की है अंतरराष्ट्रीय कानूनों की हत्या
अंतराष्ट्रीय कानूनों और इंसाफ की अमेरिका ने कई बार हत्या की है . इस बार निशाना खामेनेई हैं और प्यादा है मुनीर . आज से सिर्फ 7 महीने पहले मुनीर ने खामेनेई को मुस्लिम जगत का सबसे सम्मानजनक नेता कहा था और आज मुनीर ने अमेरिकी डॉलर के लालच में खुद खामेनेई की सुपारी ले ली है .
अमेरिकी डॉलर के लालच के चलते मुनीर आज पूरी तरह डॉनल्ड ट्रंप के सामने नतमस्तक हो गया है . वो बिना सोचे ट्रंप के लिए खामेनेई के खिलाफ साजिशें रच रहा है लेकिन मुनीर को ये नहीं पता कि खामेनेई को निशाना बनाने की कोशिश करके, वो पाकिस्तान के लिए टाइम बम बना रहा है . अब हम आपके सामने पाकिस्तान के इसी टाइम बम का विश्लेषण करने जा रहे हैं .
क्या पाकिस्तान में खड़े हो सकते हैं बगावत के सुर?
पाकिस्तान में तकरीबन 15 प्रतिशत आबादी यानी तकरीबन 3 करोड़ 60 लाख नागरिक शिया हैं. पाकिस्तान में इन शियाओं के अंदर हमेशा ईरान और उसके इस्लामिक शासन के लिए हमदर्दी रही है . इतना ही नहीं पाकिस्तान में शिया मुसलमानों के हथियारबंद गुट भी हैं. शियाओं के हथियारबंद गुटों में सबसे बड़ा है सिपाह-ए-मोहम्मद .
दूसरे बड़े गुट का नाम है जेनेबियुन ब्रिगेड और तीसरा है तहरीक-ए-जफरिया . इन गुटों के पास तकरीबन 35-40 हजार हथियारबंद लड़ाके हैं . पारंपरिक तौर पर ये गुट पाकिस्तानी सिस्टम के खिलाफ रहे हैं . ऐसे में अगर ईरान में पाकिस्तान ने किसी बड़े एक्शन को अंजाम दिया तो ये हथियारबंद गुट.. अलगाववाद से जूझते पाकिस्तान में एक और बगावत खड़ी कर देंगे. कहते हैं कि जो कर्म इस धरती पर किए गए उनकी कीमत भी यही चुकानी पड़ती है . अगर ट्रंप के लिए मुनीर ने खामेनेई का तख्तापलट किया या राजनीतिक हत्याएं कीं, तो उसकी कीमत पाकिस्तान में खून-खराबे से चुकानी पड़ेगी .
