
Iran Protest: खलीफा के खिलाफ अप्रत्यक्ष युद्ध के लिए ट्रंप मुनीर का इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं प्रत्यक्ष युद्ध के लिए उनके पास ईरान के आंदोलनकारी हैं और अमेरिका-इजरायल की फौज. पिछले 24 घंटे से जिस तरह ट्रंप ईरान की हुकूमत के खिलाफ आक्रामक हैं, वो इस तैयारी का संकेत देता है. आज हम ईरान पर ट्रंप के एक्शन की तैयारी का विश्लेषण करेंगे. ईरान के खिलाफ ट्रंप किस तरह की कार्रवाई करेंगे. उनका ऑपरेशन किस तरह का होगा. अमेरिका के सामने क्या-क्या विकल्प हैं, ये समझना जरूरी है. पिछले 2-3 दिनों से ट्रंप लगातार ईरान के हालात पर नजर रखे हुए हैं. ट्रंप ने बीती रात एक बार फिर ईरान के हालात पर चर्चा के लिए अहम बैठक बुलाई. ट्रंप की इस मीटिंग में उपराष्ट्रपति जे डी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के प्रमुख जनरल डैन केन, CIA के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ और नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड शामिल थीं. यानी वो सभी बड़े चेहरे थे जो अमेरिका की रक्षा और खुफिया रणनीति बनाते हैं.
ईरान पर हमला करेगा अमेरिका?
माना जाता है कि इस बैठक में ईरान के खिलाफ अलग-अलग कार्रवाई के विकल्पों पर चर्चा की गई. इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल की साइट और दूसरे टारगेट पर हमले शामिल हैं. इसके अलावा ईरान के सुरक्षा तंत्र पर साइबर अटैक की भी चर्चा की गई. सीधे हमले के अलावा प्रदर्शनकारियों को समर्थन, स्टारलिंक के ज़रिए इंटरनेट की मदद पर भी बातचीत हुई. इस बैठक के बाद ट्रंप ने अपने अंदाज में ईरान को धमकी दी. ट्रंप के अगले एक्शन को ईरान के एक क़दम से जोड़ा जा रहा है. ईरान में विरोध प्रदर्शन के बीच आज 26 साल के इरफान सुल्तानी को फांसी दी जा सकती है. इरफान पर हिंसा भड़काने और खुदा के खिलाफ जंग छेड़ने जैसे आरोप लगाए गए हैं. इस मामले में आगे कोई ट्रायल नहीं होगा. इरफान को फांसी दी गई है या नहीं इसको लेकर अभी तक हमारे पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं है. इंटरनेट पर बैन की वजह से ईरान से अभी ख़बरें आने में काफी समय लग जाता है. अगर ट्रंप की चेतावनी के बावजूद इरफान को फांसी दी जाती है तो ये ट्रंप के लिए ईरान के खिलाफ एक्शन लेने का सबसे बड़ा कारण बन सकता है. इरफान की फांसी से ट्रंप पर भी दबाव बनेगा. ट्रंप शुरू से प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने का भरोसा देते रहे हैं. उनके साथ खड़े होने का वादा करते रहे हैं. इसके बावजूद ईरान में 2 हज़ार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की हत्या हो चुकी है. अगर इरफान की फांसी के बाद भी ट्रंप ने एक्शन नहीं लिया तो इससे प्रदर्शनकारियों का हौसला टूट सकता है. ऐसे में ट्रंप पर एक नैतिक दबाव है. ट्रंप जहां ईरान के आम लोगों को सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के लिए उकसा रहे हैं. वहीं अमेरिका में मौजूद ईरान के क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी ने ईरान के सैनिकों से विद्रोह की अपील की है. पहलवी ने सैनिकों से अपने संदेश में कहा है- आप ईरान की राष्ट्रीय सेना हैं, इस्लामिक गणराज्य की सेना नहीं. देशवासियों की जान की रक्षा करना आपका कर्तव्य है. आपके पास ज्यादा समय नहीं है. जल्दी से जल्दी आप उनके साथ जुड़ जाएं. इस तरह खामेनेई के खिलाफ ईरान के लोगों और सेना से विद्रोह की अपील एक साथ की जा रही है.
रजा पहलवी ने की बैठक
रजा पहलवी ने ट्रंप प्रशासन के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ एक गोपनीय बैठक भी की है. ट्रंप की धमकी के बीच इस मुलाकात को अहम बताया जा रहा है. एक दिन पहले तक लग रहा था कि खामेनेई के सख्त रवैये के बाद प्रदर्शनकारी पीछे हट गए हैं. लेकिन ट्रंप ने जैसे ही खामेनेई को धमकी दी, वैसे ही ईरान में एक बार फिर आंदोलनकारियों का सैलाब आ गया. राजधानी तेहरान में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए. एक अनुमान के मुताबिक लगभग 10 लाख लोगों ने ईरान की इस्लामिक सत्ता के विरोध में प्रदर्शन किया. आप समझ सकते हैं कि लोगों का इतनी बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरना खामेनेई के लिए कितनी बड़ी चुनौती है. खामेनेई फोर्स की ओर से हो रही फायरिंग के बीच 10 लाख लोगों का जुटना, अपने आप में बड़ी बात है, हालांकि ईरान का प्रशासन किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं दिखता है. ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप को सैन्य कार्रवाई न करने की चेतावनी दी है. ट्रंप की धमकी वाले पोस्ट का जवाब ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने दिया. उन्होंने लिखा,’ हम ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारों के नाम बताते हैं. पहला ट्रंप और दूसरा इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू.’ खबर ये भी है कि ट्रंप की चेतावनी के बावजूद ईरान की न्यायपालिका ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जल्दी सुनवाई और फांसी के संकेत दिए हैं. ये ईरान की तरफ से ट्रंप को सीधी चुनौती है. ईरान का ये रवैया बताता है कि वो पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है. ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डों को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी है. इसके बाद अमेरिका ने कतर के अल-उदैद मिलिट्री बेस से सैनिकों को वापस बुलाया है. ईरान न सिर्फ खुद अमेरिका को जवाब दे रहा है बल्कि ईरान से जुड़े इराकी मिलिशिया भी अमेरिका को जवाब दे रहे हैं. इन मिलिशिया में सबसे शक्तिशाली कताइब हिज़्बुल्लाह ने ईरान पर हमले को लेकर अमेरिका को चेतावनी दी है. कताइब हिज़्बुल्लाह ने कहा है कि ईरान के खिलाफ युद्ध पिकनिक नहीं बल्कि आग है जो जलने पर बुझाई नहीं जा सकेगी. इराकी मिलिशिया की धमकी का ये मतलब है कि अमेरिकी हमले की स्थिति में एक मोर्चा इराक में भी खुलेगा. युद्ध छिड़ने पर कताइब हिज़्बुल्लाह इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करेगा. यानी किसी भी हमले से पहले अमेरिकी को ईरान के प्रॉक्सी संगठनों के जवाब का भी ध्यान रखना होगा. ये संगठन लेबनान से लेकर सीरिया तक फैले हुए हैं.
मिडिल ईस्ट क्यों हुआ परेशान
ईरान के खिलाफ अमेरिका की तैयारी से मिडिल ईस्ट में उसके सहयोगी परेशान हैं. जिस समय ट्रंप युद्ध की तैयारियों में जुटे हैं, अमेरिका के ये सहयोगी उन्हें मनाने में जुटे हैं. सऊदी अरब, ओमान और कतर जैसे देशों ने ट्रंप से ईरान पर हमला नहीं करने की अपील की है। ये देश चाहते हैं, ट्रंप ईरान में तख्तापलट की अपनी योजना को छोड़ दें. कतर और ओमान तो उन देशों में हैं, जो अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश कर रहे हैं. ये अलग बात है कि ट्रंप ने अब तक खामेनेई के ईरान से किसी भी तरह की बातचीत से इनकार किया है. ट्रंप प्रशासन ने सऊदी और दूसरी खाड़ी देशों को ईरान पर हमले के बारे में पहले से चेतावनी दी है. लेकिन ईरान पर किसी भी तरह का हमला खाड़ी देशों की सत्ता के लिए धर्मसंकट की स्थिति होगी. इसका राजनीतिक और आर्थिक असर हो सकता है. खाड़ी देशों को डर है कि युद्ध की स्थिति में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल का व्यापार ठप हो जाएगा. ऐसा होने पर इन देशों की तेल की बिक्री कम हो जाएगी. साथ ही उन्हें इस बात का भी डर है कि ईरान पर हमले से खाड़ी देशों में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है. ईरान पर हमले के दौरान अमेरिका इन देशों में मौजूद अपने सैन्य अड्डे का भी सहारा लेगा. मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा कतर में है. ऐसे में वहां के लोग इस्लामिक एकजुटता के नाम पर अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े हो सकते हैं. इसी अस्थिरता से बचने के लिए खाड़ी देश युद्ध की जगह बातचीत की सलाह ट्रंप को दे रहे हैं.
