
Iran-America Conflict: ईरान जहां पाकिस्तान को सबक सिखाने की तैयारी कर रहा है, वहीं मुनीर के बॉस अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ईरान पर किसी भी वक़्त हमला कर सकते हैं. हमले से पहले अमेरिका की तैयारियां आखिरी दौर में हैं. ट्रंप ने अपने मंत्रियों और अधिकारियों से बैठक में ईरान पर हमले को लेकर बड़ा फैसला किया है. ट्रंप ने ईरान को लेकर बैठक के दौरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से 2 महत्वपूर्ण बातें कही हैं. ट्रंप के मुताबिक ईरान पर हमला त्वरित और निर्णायक होना चाहिए. यानी ऐसी कार्रवाई जो खामेनेई के शासन को मजबूत झटका दे और दूसरी महत्वपूर्ण बात ट्रंप ने ये कही कि ईरान में लंबे युद्ध से बचना चाहिए. यानी हफ्तों या महीने तक चलने वाले लंबे युद्ध की शुरुआत नहीं होनी चाहिए.
ट्रंप की डिमांड
इस बयान के जरिए ट्रंप कहना चाहते हैं कि कोई भी सैन्य कार्रवाई सीमित, तेज गति वाली और टारगेटेड होनी चाहिए. यानी सर्जिकल स्ट्राइक या मिसाइल हमले जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम या बैलिस्टिक मिसाइल की साइट को निशाना बनाए. वहीं जमीन पर बड़े पैमाने पर सैनिकों की तैनाती से ट्रंप परहेज करना चाहते हैं. ट्रंप का जोर इस बात पर है कि कार्रवाई निर्णायक हो. यानी ऐसा हमला जिससे खामेनेई की सत्ता कमजोर हो जाए. ट्रंप जिस त्वरित कार्रवाई की बात कर रहे हैं, वो पिछले साल जून की तरह हो सकती है. उस समय अमेरिका ने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के दौरान ईरान के 3 परमाणु ठिकानों पर हमला किया था. लेकिन तब और अब में अंतर ये है कि उस वक्त ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन नहीं हो रहे थे. जबकि इस बार ईरान की अवाम इस्लामिक हुकूमत को उखाड़ फेंकने के लिए तैयार है. खामेनेई अगर अमेरिका के खिलाफ युद्ध में उलझे तो देश में चल रहे प्रदर्शन को नियंत्रण में रखना मुश्किल होगा. यानी खामेनेई का तख़्तापलट आसान हो सकता है. ट्रंप ने ये भी कहा कि लंबे युद्ध से बचना चाहिए. यानी ट्रंप इराक या अफग़ानिस्तान जैसा लंबा और खर्चीला युद्ध नहीं चाहते हैं. उन युद्धों में अमेरिका दशकों तक फंसा रहा. यानी अमेरिका खामेनेई का तख्तापलट करके ईरान से बाहर निकलना चाहता है, युद्ध में खुद को फंसाना नहीं चाहता.
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क्या है USS अब्राहम लिंकन ग्रुप?
ईरान के खिलाफ युद्ध की रणनीति के बीच अमेरिका ने अपने कैरियर स्ट्राइक ग्रुप USS अब्राहम लिंकन को मिडिल ईस्ट की ओर मोड़ दिया है. अमेरिकी नौसेना के सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में से एक USS अब्राहम लिंकन अभी तक साउथ चाइना सी में रूटीन ऑपरेशन कर रहा था. ईरान पर हमले की तैयारियों के बीच इसे मिडिल ईस्ट भेजना महत्वपूर्ण है. ईरान पर अमेरिकी हमले की स्थिति में USS अब्राहम लिंकन की क्या भूमिका होगी, ये जानने से पहले आपको इसकी ताकत के बारे में जानना चाहिए. इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में एक एयरक्राफ्ट कैरियर है जो परमाणु शक्ति से संपन्न है. ये दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोतों में से एक हैं. इसमें 3-4 गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर हैं जो एयर डिफेंस, एंटी-सबमरीन और जमीनी हमले के लिए हैं. इसमें 1-2 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन है जो दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों को ट्रैक करती हैं. साथ ही टॉमाहॉक मिसाइलें दाग सकती हैं. पूरे ग्रुप में 7,000-8,000 के बीच सैनिक हैं. ग्रुप में 65-70 एयरक्राफ्ट हैं जो दिन-रात उड़ान भर सकते हैं. इस तरह ये कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अकेले पूरी सेना के बराबर तबाही मचा सकता है. ये फ्लोटिंग एयरबेस की तरह काम करता है, जो हजारों किलोमीटर दूर से भी हवाई हमले, निगरानी और सैनिकों को सपोर्ट मुहैया करा सकता है. इस युद्धपोत से ईरान के एयरबेस, मिसाइल साइट्स, नेवल बेस, ऑयल फैसिलिटी और कमांड सेंटर पर सटीक हमले हो सकते हैं. यानी ईरान को सैन्य और आर्थिक रूप से तबाह किया जा सकता है. इसे मिडिल ईस्ट की तरफ भेजकर ट्रंप ने युद्ध का एक बड़ा औऱ निर्णायक संकेत दिया है.
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हूती की क्या है भूमिका?
एक आशंका जताई जा रही है कि ईरान पर हमले के जवाब में हूती जैसे उसके प्रॉक्सी संगठन लाल सागर में वैश्विक व्यापार को ठप कर सकते हैं. USS अब्राहम लिंकन की तैनाती से हूती को भी अमेरिका जवाब दे सकता है. समुद्र के अलावा अमेरिका ने हमले के लिए हवाई तैयारी भी बढ़ा दी है. अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने कतर के अल उदैद एयरबेस पर एक नया एयर डिफेंस ऑपरेशन सेल शुरू किया है. अल उदैद एयर बेस पर पिछले साल ईरान ने जवाबी मिसाइल हमला किया था. अमेरिका की नई तैयारी उसी तरह के हमलों से निपटने की है. इससे एयर और मिसाइल डिफेंस को मजबूत किया जा सकेगा. रीयल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग हो सकेगी. ज्वाइंट एक्सरसाइज, प्लानिंग और जवाबी कार्रवाई की जा सकेगी. मिसाइल और ड्रोन खतरों के खिलाफ बेहतर तालमेल हो सकेगा.
अल उदैद एयर बेस से 6 KC-135 स्ट्रैटोटैंकर ने भी उड़ान भरी है. KC-135 एक एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर है. ये फाइटर जेट्स और बॉम्बर्स को हवा में ईंधन मुहैया कराता है. इससे विमान बिना लैंडिंग के लंबी दूरी तक उड़ान भर सकते हैं. लंबी दूरी के हमलों के लिए ये जरूरी है. ईरान पर पिछले साल के हमले के दौरान भी स्ट्रैटोटैंकर की मूवमेंट दिखी थी. अब फिर दिख रहा है.
ईरान के बॉर्डर पर दिखा फाइटर जेट
अल उदैद एयर बेस पर अमेरिका की हवाई तैयारी के बीच ईरान के बॉर्डर पर एक फाइटर जेट भी दिखा. इराक के बसरा प्रांत में घंटों तक इसकी उड़ान जारी रही. इस विमान को लेकर तरह-तरह की अटकलें लग रही हैं. कुछ रिपोर्ट में इसे अमेरिकी विमान तो कुछ में इजरायल का बताया गया है. इस फाइटर जेट को भी अमेरिका की तैयारी से जोड़ा जा रहा है. अमेरिका की इन तैयारियों के बीच ईरान ने भी अचानक अपना एयरस्पेस कुछ घंटों के लिए बंद किया. ईरान सरकार ने इसका कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया लेकिन ये अमेरिकी हमले की आशंका में उठाया गया क़दम हो सकता है. ये तमाम घटनाक्रम युद्ध जल्द शुरू होने का संकेत दे रहे हैं कि ईरान की जमीन जल्द ही बारूदी युद्ध का मैदान बन सकती है
