
US Politics: अमेरिका के कई राज्यों में ईरान जैसी बगावत की चिंगारी देखने को मिल रही है. खासकर इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) एजेंट्स की तैनाती को लेकर आम अमेरिकी लोगों का आक्रोश इतना बढ़ गया कि ट्रंप सेना उतारने की धमकी दे डाली है. ट्रंप के खिलाफ ये विद्रोह मुख्य रूप से अमेरिका के मिनेसोटा प्रांत में हो रहा है. ट्रंप भले ही खामेनेई पर तानाशाही का आरोप लगाते हों लेकिन मिनेसोटा के लोग ट्रंप को तानाशाह बताकर प्रदर्शन कर रहे हैं. स्थिति ऐसी हो गई है कि ख़ुद को दुनिया का सरपंच बताने वाले ट्रंप अपने ही लोगों के विरोध से निपट नहीं पा रहे हैं. अब वो प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए सेना उतारने की धमकी दे रहे हैं. ट्रंप की सेना उतारने वाली धमकी के बारे में जानने से पहले आपको अमेरिका की इस बग़ावत के कारणों का पता होना चाहिए.
मेयर बनाम ट्रंप
मिनेसोटा के मिनियापोलिस में पिछले 10 दिनों में 2 ऐसी घटनाएं हुई हैं जिसने लोगों को ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर ला दिया है. पहली घटना 7 जनवरी को हुई जब ICE एजेंट की रेड के दौरान 37 साल की रेनी गुड की हत्या कर दी. सोचिए, जिन एजेंट्स का काम अवैध अप्रवासियों को पकड़ना था, उन्होंने एक अमेरिकी नागरिक को ही गोली मार दी. जब इस फायरिंग को लेकर लोगों ने विरोध किया तो ट्रंप ने संवेदनहीनता की सीमाएं तोड़ दी. ट्रंप ने रेनी पर ही दोष मढ़कर दावा किया कि एजेंट ने अपनी जान बचाने के लिए गोली चलाई, वरना रेनी उसे कुचल देतीं. जबकि मिनियापोलिस के लोगों और मेयर ने रेनी को निर्दोष बताया. उनके मुताबिक एजेंट ने अपनी पावर का गलत इस्तेमाल किया.
इस घटना के बाद मिनियापोलिस, पोर्टलैंड, न्यूयॉर्क और लॉस एंजलिस समेत अमेरिका के कई शहरों में प्रदर्शनों की शुरुआत हुई. जस्टिस फॉर रेनी के नारे गूंजने लगे. ICE एजेंट्स के बर्ताव से पहले से नाराज लोगों के लिए इस घटना ने आग में घी का काम किया. रेनी गुड की मौत के एक हफ्ते बाद 14 जनवरी को मिनियापोलिस में ही एक और घटना हुई. ICE एजेंट्स की रेड के दौरान वेनेज़ुएला के एक नागरिक को गोली मार दी. पैर में गोली लगी तो मिनियापोलिस में लोगों का आंदोलन और तेज हो गया है.
प्रदर्शन जारी रहेगा
प्रदर्शनकारी ICE एजेंट्स को हत्यारा कहकर चिल्लाते हैं. वो एजेंट्स के होटल या ऑफिस के बाहर इकट्ठा होते हैं. व्हिसल बजाते हैं, ड्रम बजाते हैं और जमीन पर लेटकर मरने का नाटक करते हैं. आपको भी ये अनूठा विरोध प्रदर्शन देखना चाहिए.
अमेरिका के लोग पहले से ही ICE एजेंट की हरकतों से नाराज़ हैं. इसका कारण ये है कि वो पूछताछ के नाम पर राइफल तान देते हैं, आंसू गौस के गोले छोड़ते हैं और बिना वारंट गिरफ़्तार कर लेते हैं. रेनी गुड की मौत के बाद अब मिनियापोलिस के लोग ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति के ख़िलाफ़ आर या पार की लड़ाई के मूड में हैं. उन्होंने साफ कर दिया है कि मिनेसोटा में तैनात 3,000 ICE एजेंट्स को जब तक हटाया नहीं जाएगा, प्रदर्शन जारी रहेगा.
इस तरह के तीखे विरोध प्रदर्शन से ट्रंप बेहद नाराज़ हैं. ट्रंप ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को विद्रोही और प्रोफेशनल प्रदर्शनकारी बताया है. उन्होंने मिनेसोटा के गवर्नर पर भी निशाना साधा है. इसके साथ-साथ ट्रंप ने विद्रोह को कुचलने के लिए मिनेसोटा में Insurrection Act लागू करने की धमकी भी दी है.
Insurrection Act अमेरिका का 219 साल पुराना कानून है. जो विद्रोह को दबाने के लिए बनाया गया था. इसके तहत राष्ट्रपति किसी प्रांत में सेना को तैनात कर सकते हैं. आखिरी बार इसका इस्तेमाल 1992 के लॉस एंजिलिस दंगों में किया गया था
सोचिए, 34 साल बाद सेना को उतारने की धमकी दी गई है. वो भी किसी दंगे के लिए नहीं बल्कि ICE एजेंट्स के ख़िलाफ़ लोगों के लोकतांत्रिक प्रदर्शन की वजह से. प्रांत की सरकार को दरकिनार कर ट्रंप वहां का प्रशासन अपने हाथों में ले लेंगे. कहां तो ट्रंप ईरान में सैन्य दखल की धमकी दे रहे थे, कहां वो ख़ुद अपने देश के लोगों को सेना की धमकी दे रहे हैं. DNA मित्रो, अब आपको ICE एजेंट्स के बारे में भी जानना चाहिए.
-इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट अमेरिका की एक फेडरल एजेंसी है जो डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्युरिटी के तहत काम करती है.
– 2003 में स्थापित ICE का मुख्य काम अवैध इमिग्रेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ख़तरों से बचाना है.
– ICE में 20,000 से ज़्यादा कर्मचारी काम करते हैं.
– ICE के एजेंट अमेरिका में अवैध रूप से रहने वाले लोगों को गिरफ़्तार करते हैं और फिर उन्हें डिपोर्ट करते हैं.
ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में अवैध ढंग से अमेरिका में रह रहे लोगों के ख़िलाफ़ अभियान चलाया है. इसकी वजह से ICE एजेंट्स की भूमिका बहुत बढ़ गई है. ऑपरेशन मेट्रो सर्ज के तहत अमेरिका के शहरों में हज़ारों एजेंट्स तैनात किए गए हैं. लेकिन मिनेसोटा में प्रदर्शन की वजह से ट्रंप की योजना पर सवाल उठ गए हैं.
मिनेसोटा में सेना उतारने की धमकी देने वाले ट्रंप इससे पहले अमेरिका के कई प्रांतों में नेशनल गार्ड उतार चुके हैं. बढ़ते क्राइम ग्राफ का हवाला देकर ट्रंप ने वॉशिंगटन से लेकर कैलिफोर्निया तक नेशनल गार्ड की तैनाती की. उस वक़्त लोगों ने ट्रंप के इस फ़ैसले का ज़ोरदार विरोध किया था. शिकागो के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के फैसले को खारिज कर दिया. इसके बाद ट्रंप को नेशनल गार्ड को वापस बुलाना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सबक लेकर ही ट्रंप ने इस बार एक्ट का इस्तेमाल करके सेना तैनात करने की धमकी दी है, ताकि फैसला वापस न लेना पड़े.
