Pakistan Sindh News: पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के कारण साल 2025 में कम से कम 103 लोगों की मौत हुई थी, इसके बारे में लोकल मीडिया ने जानकारी देते हुए बड़ा खुलासा किया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये जानकारी कराची के तीन और हैदराबाद के एक बड़े अस्पताल से जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर दी गई है. इनमें से 23 लोगों की मौत सिर्फ कराची के ही एक अस्पताल में मलेरिया से हुई थी. लेकिन ये आंकड़े प्रांतीय स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक डेटा से काफी अलग हैं.
लोकल मीडिया की तरफ से जारी किए गए आंकड़े अलग-अलग अस्पतालों से जुटाए डेटा के आधार पर हैं. जिनमें इंडस हॉस्पिटल, आगा खान यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल, सिंध इनफेक्शियस डिजीज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर और लियाकत यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल, हैदराबाद(जामशोरो) शामिल हैं. लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार डेंगू और मलेरिया से सिर्फ 33 लोगों की मौत हुई थी.
लोकल मीडिया रिपोर्ट्स
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 2025 में इंडस हॉस्पिटल में डेंगू के 8883 मामले सामने आए, जिसमें 40 मरीजों की मौत हो गई थी, जिनमें से 18 मरीजों ने अस्पताल की इमरजेंसी में ही दम तोड़ दिया था. इसी अस्पताल में मलेरिया के 2719 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 23 लोगों की जान गई थी. इनमें से 6 लोगों की मौत इमरजेंसी में हुई थी.
कहां कितने मामले ?
सिंध इनफेक्शियस डिजीज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर अस्पताल में मच्छरों से जुड़ी बीमारियों के 941 मामले सामने आए थे, इनमें 651 डेंगू और 290 मलेरिया के थे. यहां पर डेंगू के कारण 14 मौतें हुईं, जबकि मलेरिया से किसी मौत के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी. आगा खान यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल से पूरा डाटा नहीं मिल सका, लेकिन सूत्रों के अनुसार यहां पर जनवरी से अक्टूबर के बीच डेंगू से कम से कम 6 मरीजों की मौत हुई थी.
सिर्फ 33 मौत
इसके अलावा लियाकत यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के सूत्रों ने बताया कि 2025 में यहां डेंगू से 25 लोगों की मौत हुई. लेकिन सरकारी आंकड़े इसके बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं. जिनमें सिंध में डेंगू के 20502 मामले सामने आने की बात कही गई और सिर्फ 33 मौतें दर्ज होने की बात कही गई. वहीं सरकार ने दावा किया कि मलेरिया के 283140 मामले सामने आए, लेकिन एक भी मौत नहीं हुई थी.
यह भी पढ़ें: पाकिस्तानी रेलवे का हाल-बेहाल, 20 साल से पुराने इंजनों के सहारे पटरी पर दौड़ रही ट्रेन
ठोस व्यवस्था नहीं
अस्पतालों के सूत्रों के अनुसार सरकार के पास मरीजों और मौतों का सही और पारदर्शी डेटा जुटाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. क्योंकि कई मरीज छोटे क्लीनिकों में इलाज कराते रहे और कुछ की मौत घर पर ही हो गई, जिसकी वजह से उनकी संख्या सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुई. सूत्रों के मुताबिक, इससे साफ होता है कि 2025 में सिंध में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का संकट सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा गंभीर था.
इनपुट- आईएनएस
