Expansion of Gaza Board: बीते कुछ महीनों से ट्रंप की अजीबोगरीब योजनाएं, गाजा पीस डील हो या अफगानिस्तान में तालिबान सरकार से बगराम एयरपोर्ट मांगना या ईरान में बगावत की चिंगारियों को भड़काकर ज्वाला बनाने वाले बयान देने तक उनका हर एक एक्शन एक राष्ट्रपति का फैसला नहीं, बल्कि वैश्विक भूमाफिया की हरकत बता रहा है. अब उनके आइडिये पर बने गाजा पीस बोर्ड का दायरा बढ़ाए जाने की खबरें आ रही हैं. जानकारी के मुताबिक गाजा रिडेवलपमेंट की निगरानी के लिए बने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का दायरा मिडिल ईस्ट से आगे निकलकर दुनिया के बाकी संघर्ष क्षेत्रों तक बढ़ाया जा सकता है, जिनमें यूक्रेन भी शामिल है.

बोर्ड ऑफ पीस का पुनर्गठन

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप डॉयरेक्टेड बोर्ड में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, ट्रंप के मिडिल ईस्ट के दूत स्टीव विटकॉफ और खुद ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर शामिल हैं. ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से जुड़ी घोषणा के बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा- ‘मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि यह अब तक किसी भी समय, किसी भी जगह गठित सबसे महान और सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड है.’

एफटी के मुताबिक, अमेरिका गाजा में बोर्ड के अब तक के प्रदर्शन के आधार पर उसका दायरा अब रूस-यूक्रेन युद्ध और अजरबैजान-आर्मेनिया तक बढ़ाने पर मंथन चल रहा है. इस मुद्दे पर मीडिया हाउस से बात करते हुए यूक्रेन के एक अधिकारी ने कहा, ‘फिलहाल यह सुझाव दिया गया है कि यह विशेष बोर्ड खास तौर पर यूक्रेन-रूस मामले के लिए स्थापित किया जाएगा.’ 

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सूत्रों के मुताबिक बोर्ड का दायरा वेनेजुएला तक बढ़ सकता है, जहां अमेरिकी फौज की कार्रवाई में निर्वासित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और फर्स्ट लेडी के अमेरिकी जेल में पहुंचने के बाद मची उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है.

इस मुद्दे पर व्हाइट हाउस ने एफटी से कहा, ‘पूरी दुनिया मिडिल-ईस्ट में शांति लाने की ट्रंप की ऐतिहासिक कोशिशों का हिस्सा बनना चाहती है. इसलिए बोर्ड ऑफ पीस की सदस्यता से जुड़ी किसी भी घोषणा की जानकारी सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी.’

पुतिन पर दबाव डालेंगे ट्रंप?

अजरबैजान-आर्मेनिया अमेरिका की ताकत अमेरिका के किसी छोटे से शहर से भी कम है, ऐसे में यूक्रेन तक बात को खींच कर ले जाने का मतलब क्या बनता है, क्या यूक्रेन में अबतक बैकडोर से युद्ध रुकवाने की कोशिश कर रहे ट्रंप ने अपने रूसी समकक्ष पुतिन को सामने से सीधी टक्कर देने का मन बनाया है, अगर इसका जवाब हां है तो ये वाकई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम होगा क्योंकि अमेरिका और रूस के सीधे टकराव से धरती के विनाश का खतरा बढ़ जाएगा.

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