Women Representation in Bangladesh Election 2026 News: शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में अगले महीने चुनाव होने जा रह हैं. इसे लेकर वहां पर हिंसात्मक प्रचार जोरों पर चल रहा है. वहां की राजनीति को ध्यान से देखें तो वह अब भी पुरुष-प्रधान बनी हुई है. पितृसत्तात्मक सामाजिक ढांचे के कारण महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बेहद कम है. जिसकी वजह से वहां पर राजनीतिक दलों में भी उनकी उपस्थिति बहुत कम दिखाई देती है. 

2568 उम्मीदवारों में से महज 109 महिला कैंडिडेट

बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक अखाबर प्रथम आलो ने इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है. अखाबर के लिए यह लेख में लिखते हुए संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के पूर्व निदेशक सलीम जहान ने लिखा है. उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया कि 12 फरवरी को होने वाले चुनावों के लिए कुल 2,568 नामांकन पत्र दाखिल किए गए हैं. इनमे से महज 109 महिला उम्मीदवार हैं. यह कुल उम्मीदवारों का महज 4.2 प्रतिशत है.

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उन्होंने बताया कि इन महिला उम्मीदवारों में से 72 को राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त है. जबकि 37 महिलाएं निर्दलीय उम्मीदवार हैं. इसका अर्थ यह है कि हर तीन में से एक महिला उम्मीदवार को किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं मिला है.

बांग्लादेश में पार्टियों ने महिलाओं को नहीं दिए टिकट

रिपोर्ट के अनुसार, अगले महीने होने जा रहे चुनावों में बांग्लादेश की कुल 50 राजनीतिक पार्टियां हिस्सा ले रही हैं.  जिनमें से 30 पार्टियों ने एक भी महिला उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा है. यानी देश की तीन-पांचवीं राजनीतिक पार्टियों ने किसी भी योग्य महिला को टिकट नहीं दिया. जबकि बांग्लादेश की कुल आबादी का आधे से अधिक हिस्सा महिलाएं हैं. रिपोर्ट ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है.

जिन पार्टियों ने महिला उम्मीदवार उतारे हैं, उनमें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और मार्क्सवादी बांग्लादेश सोशलिस्ट पार्टी (बीएसपी) सबसे ऊपर हैं. हालांकि दोनों ने ही केवल 10-10 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है. जमीनी स्तर पर मजबूत मानी जा रही बीएनपी ने भी अपने 328 उम्मीदवारों में से सिर्फ 10 महिलाओं (करीब 3 प्रतिशत) को ही शामिल किया है. जो कि बेहद निराशाजनक है.

बहुत कम महिलाएं सक्रिय राजनीति में शामिल

इसके अलावा कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने आगामी चुनावों के लिए अपने 279 उम्मीदवारों में से एक भी महिला को टिकट नहीं दिया है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राजनीतिक दलों के बीच चुनावों में कम से कम पांच प्रतिशत महिला उम्मीदवार उतारने पर सहमति बनी थी. लेकिन अधिकांश दल इस प्रतिबद्धता को पूरा करने में विफल रहे हैं.

रिपोर्ट में महिलाओं के राजनीति में पिछड़ने की वजहें भी बताई गई हैं. इसके मुताबिक, बांग्लादेश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अब भी बेहद सीमित है. बहुत कम महिलाएं सक्रिय रूप से राजनीति में शामिल होती हैं. इसके चलते चुनावों में महिला उम्मीदवारों की संख्या कम रहती है. वे रैलियों और प्रचार अभियानों में भी कम दिखाई देती हैं. समाज महिलाओं को इन भूमिकाओं में देखने का आदी नहीं है. साथ ही चुनावों में पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होने वाली ‘मसल पावर’ की राजनीति भी महिलाओं को उम्मीदवार बनने से हतोत्साहित करती है.

(एजेंसी आईएएनएस)