
Elections in Other Nations: केवल भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों में इस साल चुनाव होने जा रहे हैं. चुनावी मौसम की शुरुआत युगांडा से होने जा रही है. वहीं, न्यूजीलैंड में नवंबर 2026 में चुनावी आएगा. इसकी तैयारी अभी से होने लगी है. प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने बुधवार को बताया कि देश में आम चुनाव 7 नवंबर को होगा. समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, प्रधानमंत्री लक्सन ने कहा कि तारीख तय करने से पहले देश के लोगों को पक्का भरोसा मिला है.
उन्होंने कहा कि देश के लोगों को भरोसा हुआ है कि उनके देश की सरकार वोट से पहले बुनियादी चीजों को ठीक करने और भविष्य बनाने पर ध्यान देना जारी रखेगी. इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने गवर्नर-जनरल को चुनाव की तारीख के बारे में बता दिया है. एख आधिकारिक बयान में पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि जब हमने ऑफिस संभाला तो देश गलत दिशा में जा रहा था, और पिछले दो सालों में चीजों को बदलने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी है. महंगाई 7 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत हो गई.
पिछले चुनाव में ये थे मुद्दे
वहीं, अपने बयान में उन्होंने कहा कि आधारभूत चीजों को ठीक करने और भविष्य बनाने के अपने प्लान पर काम करते रहना है, ताकि देशभर के कीवी लोगों को ऐसे और नतीजे मिलें. यह इस साल के आखिर में होने वाले चुनाव से पहले हमारा फोकस रहेगा. इससे पहले देश में हुए आम चुनाव में लक्सन का मुद्दा देश की कानून व्यवस्था और महंगाई था. ध्यान दिया जाना चाहिए कि 2023 में हुए चुनाव में वह कानून व्यवस्था और रहने-सहने के खर्च के मुद्दों पर फोकस करके चुनावी मैदान में उतरे और लड़े थे.
न्यूजीलैंड की आर्थिक स्थिति बेहद खराब
हालांकि, इस बात पर गौर किया जाना चाहिए कि न्यूजीलैंड की आर्थिक स्थिति सुस्त होती नजर आ रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, सितंबर में खत्म हुए पिछले छह क्वार्टर में से तीन में न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था और खराब हो गई. नवंबर 2025 में यहां बेरोजगारी दर बढ़कर 5.3 प्रतिशत हो गई, जो लगभग दो दशकों में सबसे ज्यादा है.
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क्या कहते हैं ओपिनियन पोल
गौरतलब है कि हाल में ही आए एक ओपिनियन पोल में बताया गया कि लक्सन की नेशनल पार्टी क्रिस हिपकिंस के नेतृत्व वाली लेबर पार्टी से पिछड़ रही है. हालांकि, लोगों ने अनुमान लगाए हैं कि न्यूजीलैंड नेशनल पार्टी अपने गठबंधन पार्टनर की मदद से सत्ता में बनी रहेगी. जानकारी दें कि न्यूजीलैंड में हर तीन साल में चुनाव होता है और यहां पर संसदीय प्रणाली व्यवस्था है. चुनाव की तारीख तय करना सरकार पर निर्भर करता है.
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