आज के दौर में इंजरी कंसर्न हर टीम में देखने को मिलता है. हर छोटी इंजरी पर खिलाड़ी बीच मैच से बाहर चले जाते हैं. लेकिन हम आपको ऐसे मुकाबले की कहानी बताने जा रहे हैं जो इतिहास के पन्नों में एक चोट के चलते दर्ज हो गया. साथ ही इस मुकाबले के आंकड़े भी अविश्वसनीय हैं. ये वही मुकाबला है जिसमें टीम इंडिया के 11 खिलाड़ी गेंदबाजी करने उतर गए थे. एक दिग्गज ऐसा भी था जिसने टूटे जबड़े से मुकाबला खेला और हमेशा के लिए इस मैच को यादगार बना दिया. ये कोई और नहीं बल्कि भारत के दिग्गज अनिल कुंबले थे जिन्होंने उस मैच को याद करते हुए भावुक पोस्ट लिखा.
टूटे जबड़ से खेला था मैच
कुंबले ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘इस महीने की शुरुआत में केन्या में, मसाई मारा रिजर्व में, मैं पिछले महीने एक कॉर्पोरेट सेशन के एक खास पल के बारे में सोच रहा था जिसे मैं लीड कर रहा था. मुझसे क्रिकेट में एक ऐसे वाकये के बारे में सवाल पूछा गया था जिसने मुझ पर गहरी छाप छोड़ी थी. कई पल याद आए, लेकिन कुछ बातें आपके साथ रह जाती हैं नतीजों या उपलब्धियों की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि वे आपको अपने बारे में क्या सिखाती हैं. ऐसा ही एक पल 2002 में हुआ था, यह एंटीगुआ में वेस्ट इंडीज के खिलाफ चौथा टेस्ट मैच था.’
बैटिंग ऑर्डर में हुआ था प्रमोशन
कुंबले ने आगे लिखा, ‘मुझे याद है कि उस मैच में मुझे बैटिंग ऑर्डर में ऊपर भेजा गया था और उसके तुरंत बाद, मर्विन डिलन की एक गेंद मुझे जोर से लगी. दर्द तुरंत हुआ और जांच में पता चला कि मेरा जबड़ा टूट गया है. मेडिकल सलाह साफ और एक जैसी थी मुझसे कहा गया कि मैं खेल में आगे हिस्सा न लूं. कप्तान, कोचिंग स्टाफ, डॉक्टर, टीम के साथी और यहां तक कि मेरे परिवार को भी ऐसा ही लगा। यह सही सलाह थी और यह चिंता की भावना से दी गई थी.’
कुंबले ने नहीं छोड़ा मैदान
कुंबले ने आगे बताया, ‘फिर भी, उसी पल मेरे मन में एक और ख्याल आया. मैं मैदान छोड़कर नहीं जाना चाहता था क्योंकि मेरी टीम दबाव में थी और मैं उनका साथ देने के लिए वहां नहीं था. कोशिश करने के बाद आराम से चले जाना आसान लग रहा था, लेकिन जब मेरी ज़रूरत थी तब पीछे हटने का ख्याल कहीं ज़्यादा भारी लग रहा था. “क्या तुम पागल हो?” यह सवाल मैंने एक से ज़्यादा बार सुना. लेकिन मैदान पर न होने का विचार चोट से ज़्यादा मुझ पर हावी था. मैं वापस मैदान पर गया और बॉलिंग की, सिर्फ़ टीम के लिए अपना काम करने पर ध्यान दिया. उन्हीं में से एक स्पेल में ब्रायन लारा का विकेट मिला. मैच आखिरकार ड्रॉ पर खत्म हुआ, लेकिन नतीजा वह नहीं था जो मेरे साथ रह गया.’
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टेस्ट मैच से मिली सीख
उन्होंने लिखा, ‘उस दिन टेस्ट क्रिकेट के बारे में एक ज़रूरी बात पक्की हो गई. यह सिर्फ़ आपके स्किल और फिटनेस से ज़्यादा मांगता है. इसने मेरी मानसिक शक्ति, चरित्र और मुश्किल समय में आगे बढ़ने की मेरी इच्छा को चुनौती दी. इसीलिए इस फॉर्मेट का इतना सम्मान है। यह मुश्किल, ईमानदार है और मेरे लिए बहुत विनम्र बनाने वाला है. हम अक्सर खेल में बहादुरी की बात करते हैं, लेकिन सच्ची हिम्मत दर्द को नज़रअंदाज़ करने के बारे में नहीं है। यह स्थिति को समझने, नतीजों को स्वीकार करने और फिर भी टीम को पहले चुनने के बारे में है। उस अनुभव ने मुझे याद दिलाया कि ताकत उतनी ही दिमाग में होती है जितनी शरीर में.’
