EU Designates IRGC Terrorist: ब्रसेल्स में हुई बैठक में यूरोपीय यूनियन के विदेश मंत्रियों ने मिलकर फैसला लिया कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को आतंकी संगठन माना जाएगा. अब IRGC का नाम इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा जैसे संगठनों के साथ उसी लिस्ट में आ गया है. यह फैसला कानूनी तौर पर भी काफी अहम माना जा रहा है. बता दें, EU का कहना है कि ईरान में आम लोगों पर हो रही हिंसा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. IRGC को आतंकी सूची में डालने से यूरोपीय देशों को इसके खिलाफ कानूनी और आर्थिक कार्रवाई करने में आसानी होगी. वहीं ईरान ने इस फैसले को गलत बताते हुए इसे तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया है. बता दें,15 अप्रैल 2019 को अमेरिका ने ईरान की सरकारी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था. उनके लिए यह एक बहुत बड़ा कदम था क्योंकि इससे पहले अमेरिका ने कभी भी किसी दूसरे देश की सरकारी संस्था या सेना को इस तरह आतंकवादी नहीं माना था.
IRGC क्या है?
IRGC की स्थापना 1979 की ईरानी क्रांति के बाद हुई थी. इसका मकसद ईरान की धार्मिक व्यवस्था की रक्षा करना था. आज यह संस्था ईरान की सेना, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा ढांचे में बहुत मजबूत पकड़ रखती है. देश के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम भी इसी के नियंत्रण में आते हैं.
EU का कड़ा संदेश
EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने सोशल मीडिया पर लिखा कि लोगों पर की गई हिंसा का जवाब देना जरूरी है. उन्होंने कहा कि जो सरकार अपने ही लोगों की जान लेती है वह खुद अपने अंत की ओर बढ़ती है. EU का मानना है कि हाल के प्रदर्शनों में जिस तरह की कार्रवाई हुई है वह किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जा सकती है.
विरोध प्रदर्शनों के बाद बढ़ा दबाव
कुछ दिनों पहले ईरान में सरकार के खिलाफ बड़े लेवल पर प्रदर्शन हुए थे. इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए की गई कार्रवाई में हजारों लोग मारे गए थे. इसी के बाद कई EU देशों में IRGC को आतंकी घोषित करने की मांग तेज हो गई थी. पहले कुछ देश बातचीत बिगड़ने के डर से हिचक रहे थे लेकिन हालात ने उन्हें फैसला बदलने पर मजबूर कर दिया है.
फ्रांस और इटली भी हुए साथ
पहले फ्रांस और इटली जैसे देश इस फैसले को लेकर सतर्क थे. उन्हें डर था कि इससे ईरान के साथ बातचीत पर असर पड़ेगा. यूरोपीय नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. हालांकि इस हफ्ते दोनों देशों ने इस कदम का समर्थन कर दिया है.
इजरायल ने क्या कहा
इजरायल ने EU के फैसले का स्वागत किया है. इजरायल के विदेश मंत्री गिडियन सआर ने इसे ऐतिहासिक बताया है. उन्होंने कहा कि IRGC इलाके में आतंक और अस्थिरता फैलाने की सबसे बड़ी ताकत है. इजरायल का मानना है कि इस फैसले से यूरोप में IRGC से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई आसान हो जाएगी.
कानूनी असर क्या होगा
इजरायल के एक अधिकारी के मुताबिक अब यूरोपीय एजेंसियों को किसी व्यक्ति के खिलाफ यह साबित करने की जरूरत नहीं होगी कि वह किसी खास आतंकी हमले में शामिल था. सिर्फ यह दिखाना काफी होगा कि उसका IRGC से संबंध है. इससे संपत्ति जब्त करना और केस चलाना आसान हो जाएगा. यूरोप की पुलिस एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करना भी और तेज हो जाएगा.
ईरान का कड़ा विरोध
ईरान ने EU के इस कदम की आलोचना की है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे बड़ी रणनीतिक गलती बताया है. उन्होंने कहा कि जब कुछ देश इलाके में युद्ध रोकने की कोशिश कर रहे हैं तब यूरोप हालात और बिगाड़ रहा है. उनका कहना है कि अपनी राष्ट्रीय सेना को आतंकी कहना गलत और भड़काऊ कदम है.
बता दें, EU ने साफ किया है कि सख्त कदमों के बावजूद ईरान से बातचीत के रास्ते बंद नहीं किए जाएंगे. काजा कालास ने कहा कि यूरोप चाहता है कि बातचीत के चैनल खुले रहें. इटली के विदेश मंत्री ने भी कहा कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि बातचीत खत्म हो जाएगी.
नए प्रतिबंध भी लगाए गए
IRGC को आतंकी घोषित करने के साथ-साथ EU ने ईरान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप में 15 लोगों और 6 संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. इनमें IRGC के बड़े अधिकारी भी शामिल हैं. इसके अलावा इंटरनेट सेंसरशिप, गलत जानकारी फैलाने और ड्रोन व मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी संस्थाओं पर भी सख्ती की गई है. EU ने ड्रोन और मिसाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान के निर्यात पर रोक और बढ़ा दी है.
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