Great American Recovery Initiative: वॉशिंगटन में इस योजना पर साइन करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि नशे की समस्या अमेरिका में बहुत गंभीर है. शायद हर देश में है. उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद लोगों को वह मदद और सहारा देना है जिसकी जरूरत उन्हें नशे की लत से बाहर निकलने के लिए होती है. इस नई पहल के तहत केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, स्थानीय प्रशासन और निजी संस्थाएं मिलकर काम करेंगी. ट्रंप सरकार का कहना है कि नशा कोई बुरी आदत नहीं बल्कि एक बीमारी है. इसका इलाज संभव है. सरकार इसे देश की सेहत, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा मान रही है.
हर साल लाखों मौतें
ट्रंप ने बताया कि अमेरिका में हर साल करीब 3 लाख लोगों की मौत नशे और शराब की वजह से हो जाती है. उनका कहना था कि असली आंकड़ा इससे भी ज्यादा हो सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक साल में ड्रग ओवरडोज से होने वाली मौतों में 21 फीसदी की कमी आई है.
सीमा सुरक्षा को बताया वजह
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कमी का श्रेय सख्त सीमा सुरक्षा और ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़े जाने को दिया. उन्होंने बताया कि अब तक 4 करोड़ 70 लाख से ज्यादा फेंटेनाइल गोलियां और करीब 10 हजार पाउंड फेंटेनाइल पाउडर जब्त किया गया है. ट्रंप के मुताबिक समुद्र के रास्ते आने वाले ड्रग्स में भी 97 फीसदी की गिरावट आई है.
सरकार और प्राइवेट सेक्टर साथ आएंगे
ट्रंप ने कहा कि यह योजना एक बड़ा और मजबूत कदम है. इसके तहत केंद्र, राज्य, स्थानीय प्रशासन और निजी कंपनियां मिलकर इलाज, रोकथाम और रिकवरी पर काम करेंगी, ताकि नशे से जूझ रहे लोगों की हर लेवल पर मदद की जा सके.
स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा बयान
अमेरिका के स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर, इस पहल के सह-अध्यक्ष होंगे, उन्होंने कहा कि यह आदेश सरकार के सोचने के तरीके में बड़ा बदलाव है. उन्होंने साफ कहा कि नशा कोई नैतिक कमजोरी नहीं, बल्कि एक बीमारी है. यह लंबे समय तक चल सकती है लेकिन इसका इलाज संभव है.
इलाज से दूर हैं करोड़ों लोग
कैनेडी ने बताया कि करीब 5 करोड़ अमेरिकी किसी न किसी तरह की नशे की लत से जूझ रहे हैं. उनमें से बहुत से लोगों को कभी इलाज ही नहीं मिल पाता. नई योजना के तहत सरकारी योजनाओं को एक साथ जोड़ा जाएगा. सही इलाज को बढ़ावा दिया जाएगा. समय रहते मदद दी जाएगी. लंबे समय तक ठीक रहने पर ध्यान दिया जाएगा.
बता दें, कैनेडी ने कहा कि रिकवरी सिर्फ इलाज का मामला नहीं है. यह नौकरी, परिवार, समाज और देश की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है. अगर लोग ठीक होते हैं तो देश की ताकत भी बढ़ती है.
बीमारी की तरह होगा इलाज
व्हाइट हाउस की वरिष्ठ सलाहकार कैथरीन बर्गम ने कहा कि नशे की लत एक ऐसी बीमारी है जो पूरी जिंदगी साथ रह सकती है. जैसे डायबिटीज या दिल की बीमारी की तरह ही. उन्होंने कहा कि नई सोच का मतलब है कि अब देर से कार्रवाई नहीं बल्कि पहले से रोकथाम पर ध्यान दिया जाएगा. गलत धारणाओं की जगह सही जानकारी को अपनाया जाएगा.
निजी अनुभव आए सामने
इस मौके पर कई सरकारी अधिकारियों और मेहमानों ने अपने निजी अनुभव साझा किए है. विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने नशे की वजह से अपने बेटे को खोने की बात कही है. स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारियों ने रिसर्च, इलाज बढ़ाने और रोकथाम के प्रयासों पर भी बात की है.
ट्रंप ने कहा है कि यह पहल उनके पहले किए गए कामों को आगे बढ़ाती है. इसमें सीमा सुरक्षा मजबूत करना, इलाज तक पहुंच बढ़ाना, नालोक्सोन जैसी दवाओं की उपलब्धता और रोकथाम कार्यक्रमों में निवेश शामिल है.
लंबे समय से जूझ रहा अमेरिका
अमेरिका पिछले एक दशक से नशे और ओपिओइड संकट से जूझ रहा है. कोरोना महामारी के दौरान हालात और खराब हो गए थे. अब सरकारें कानून व्यवस्था के साथ-साथ सेहत पर आधारित उपायों पर ज्यादा जोर दे रही हैं.
आपको बता दें, अंत में ट्रंप ने कहा कि इस योजना का मकसद पूरे देश को एकजुट करना है. जब लोग नशे से बाहर निकलते हैं तो परिवार मजबूत होते हैं. समाज बेहतर बनता है. बच्चों का भविष्य सुरक्षित होता है.
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