Donald Trump: वेनेजुएला के राष्ट्रपति को बंदी बनाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति की निगाहें इन दिनों ग्रीनलैंड पर टिक गई है. ट्रंप ग्रीनलैंड को खरीदने की धमकी दे रहे हैं और यूरोपीय देशों पर दबाव भी बना रहे हैं. फ्रांस और अमेरिका में भी ग्रीनलैंड को लेकर तनातनी छिड़ी है. ट्रंप के दबाव के बीच ग्रीनलैंड का सबसे चर्चित ‘नानूक’ बैंड ने दुनियाभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है. नानूक बैंड शांति का संदेश दे रहा है.
शांति का दे रहा संदेश
यह बैंड पूरी तरह से ग्रीनलैंडिक भाषा में गाता है. इससे जुड़े लोगों का कहना है कि धमकियों के बीच यहां के लोग डरे हुए हैं, वो काफी ज्यादा तनाव में हैं, उन्हें शांत कराने के लिए वो लोग बैंड का इस्तेमाल कर रहे हैं.
कब हुई थी शुरुआत?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 2008 में भाइयों क्रिश्चियन और फ्रेडरिक एल्सनर ने इसे शुरू किया था. यह बैंड न सिर्फ अपने अनोखे साउंड के लिए बल्कि ग्रीनलैंड की भाषा के प्रति अपने पक्के कमिटमेंट के लिए भी मशहूर है. कमर्शियल सफलता के लिए यूरोपियन रिकॉर्ड लेबल्स की तरफ से इंग्लिश में बदलने के काफी दबाव के बावजूद, नानूक अपनी मातृभाषा के प्रति वफादार रहा है, यह मानते हुए कि उनका म्यूजिक उनके दिल और कल्चरल जड़ों के जरिए सबसे अच्छे से जाहिर होता है.
मजबूत आवाज बना बैंड
हाल ही में, यह बैंड U.S. प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के विवादित प्रस्ताव के खिलाफ एक मजबूत कल्चरल आवाज के तौर पर उभरा है और अपने प्लेटफॅार्म का इस्तेमाल आजादी और नेशनल एकता की वकालत करने के लिए किया है. बैंड की म्यूजिकल यात्रा ग्रीनलैंड के ऊबड़-खाबड़ और बिना सड़क वाले इलाके से बहुत प्रभावित है, जहां यात्रा अक्सर डॉग स्लेज या हेलीकॉप्टर पर निर्भर करती है.
लेटेस्ट अकूस्टिक एल्बम किया शामिल
क्रिश्चियन एल्सनर बताते हैं कि टूर के दौरान उन्हें हफ्तों तक एवलांच में फंसे रहने जैसी जानलेवा स्थितियों का सामना करना पड़ा लेकिन बड़े बर्फ के मैदान और नॉर्डिक लैंडस्केप की उदास सुंदरता उनकी मुख्य प्रेरणा बनी हुई है. प्रेसिडेंट ट्रंप की ग्रीनलैंड को एक स्ट्रेटेजिक एसेट के तौर पर हासिल करने की इच्छा से पैदा हुए जियोपॉलिटिकल टेंशन ने बैंड को इंटरनेशनल लाइमलाइट में ला दिया. इन बाहरी खतरों के जवाब में, नानूक ने मौजूदा पॉलिटिकल चिंता को अपने लेटेस्ट अकूस्टिक एल्बम में शामिल किया, जिसका मकसद डरी हुई आबादी को शांत करना और यह मैसेज देना था कि ग्रीनलैंड उसके लोगों का है और बिकाऊ नहीं है.
