अमेरिका ने भारत से कहा है कि वह जल्द ही वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदना दोबारा शुरू कर सकता है. रॉयटर्स से बात करने वाले मामले से जुड़े तीन सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका इस सप्लाई को रूसी तेल के विकल्प के तौर पर पेश कर रहा है, क्योंकि भारत रूसी तेल का आयात तेजी से घटाने जा रहा है. वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में तेजी से बदलाव हो रहे हैं. तेल की सप्लाई अब सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि कूटनीति और रणनीति का हिस्सा बन चुकी है. हाल के दिनों में कच्चे तेल को लेकर बड़े फैसले लिए जा रहे हैं, जिनका असर आयात, टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों पर पड़ रहा है. एक तरफ पुराने साझेदारों से दूरी बनाने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ नए विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. इसी कड़ी में अब एक नया प्रस्ताव सामने आया है, जो आने वाले महीनों में तेल आयात की दिशा बदल सकता है. यह कदम न सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि व्यापार और वैश्विक दबावों के बीच संतुलन साधने की कोशिश भी माना जा रहा है.

रूसी तेल की जगह नया विकल्प

रॉयटर्स से जुड़े तीन सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने भारत से कहा है कि वह जल्द ही वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदना दोबारा शुरू कर सकता है. इसे रूसी तेल के विकल्प के तौर पर पेश किया जा रहा है. यह पहल ऐसे समय में आई है, जब भारत ने रूस से तेल आयात में बड़ी कटौती का संकेत दिया है. अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि रूसी तेल से होने वाली कमाई को सीमित किया जाए, क्योंकि उसी से यूक्रेन युद्ध की फंडिंग हो रही है. सूत्रों के मुताबिक, आने वाले महीनों में रूसी तेल का आयात कई लाख बैरल प्रतिदिन तक घटाया जा सकता है.

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टैरिफ और बदला हुआ अमेरिकी रुख

मार्च 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसमें भारत भी शामिल था. उसी दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई थी. हालांकि अब अमेरिका के रुख में बदलाव दिख रहा है. वॉशिंगटन का मानना है कि रूसी सप्लाई में कटौती की भरपाई वेनेजुएला के तेल से की जा सकती है. यह साफ नहीं है कि यह तेल निजी कंपनियों के जरिए आएगा या सीधे वहां की सरकारी तेल कंपनी के माध्यम से बेचा जाएगा.

आयात घटाने की तैयारी और विविधता पर जोर

यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों और भारी छूट के कारण भारत रूस का बड़ा तेल खरीदार बन गया था. लेकिन बाद में रूसी तेल पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए गए, जिससे अगस्त तक कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गए. तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही कह चुके हैं कि भारत अपने कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता ला रहा है. रॉयटर्स के अनुसार, रूसी तेल आयात जल्द ही 10 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे आ सकता है और आगे चलकर 5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिरने की संभावना है.

नए स्रोतों से भरपाई की कोशिश

व्यापार से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर में रूसी तेल आयात दो साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. इसके चलते ओपेक देशों से तेल आयात बढ़ा है. कमी पूरी करने के लिए मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ाई गई है. माना जा रहा है कि रूसी तेल पर निर्भरता घटाने से अमेरिका के साथ व्यापक व्यापार समझौते की राह भी आसान हो सकती है. बदलते हालात में तेल अब सिर्फ ऊर्जा नहीं, बल्कि रणनीतिक संतुलन का अहम हिस्सा बन चुका है.