मिडिल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा है.दुनिया की सांसें अटक गई हैं. ट्रंप अब पूरी तरह आर-पार के मूड में आ चुके हैं. एक तरफ वो कह रहे हैं कि ईरान नेगोशिएट कर रहा है और देखते हैं क्या डील हो पाती है, लेकिन साथ ही उनका आर्मडा USS अब्राहम लिंकन कैरियर ग्रुप और दर्जनों डिस्ट्रॉयर्स ईरान की तरफ बढ़ता जा रहा है. ट्रंप ने खुलेआम कहा, “डील हो गई तो अच्छा, नहीं हुई तो देखते हैं क्या होता है… और अगला हमला पिछले से कहीं ज्यादा बुरा होगा. यानी अब ट्रंप ने साफ शब्दों में कह दिया है कि अब डील करो या मार होनी तय है, इसी बीच रूस और कतर भी इस मामले में मैदान में उतर आया है. समझते हैं पूरी खबर.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयान ने ईरान-अमेरिका तनाव को आर-पार की स्थिति में ला दिया है. ट्रंप ने इशारों-इशारों में ईरान को चेतावनी दी कि अगर उसने समझौता नहीं किया, तो अंजाम बेहद खतरनाक हो सकता है.

ट्रंप का सख्त संदेश: अब और इंतजार नहीं
व्हाइट हाउस और अमेरिकी मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान बातचीत कर रहा है, लेकिन अगर बात नहीं बनी तो अमेरिका हर विकल्प के लिए तैयार है. उन्होंने खुले तौर पर कहा कि अमेरिका ने क्षेत्र में “बड़ा नौसैनिक बेड़ा” भेज दिया है. ट्रंप का यह बयान ईरान के लिए किसी आख़िरी अल्टीमेटम से कम नहीं माना जा रहा.

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ईरान का जवाब: धमकी में नहीं होगी बातचीत
ईरान की ओर से भी पलटवार कम तीखा नहीं है. राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और सेना प्रमुख अमीर हातमी ने साफ कहा है कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन दबाव और धमकियों के आगे झुकने वाला भी नहीं है.
ईरान ने दोहराया कि उसकी मिसाइल और परमाणु क्षमता किसी भी डील का हिस्सा नहीं बनेगी.

धमाकों से बढ़ी चिंता
इसी बीच ईरान के बंदर अब्बास और अहवाज़ जैसे शहरों में हुए धमाकों ने हालात और गंभीर कर दिए हैं. बंदर अब्बास में एक इमारत विस्फोट में तबाह हो गई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और कई लोग घायल हुए. ईरान ने इसे गैस लीक बताया है, जबकि इज़राइल ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है.

मध्यस्थों की आखिरी कोशिश: रूस-कतर-सऊदी बीच में क्यों कूदे?
तनाव इतना बढ़ गया है कि रूस, कतर, सऊदी, टर्की, ओमान सब बीच में आ गए हैं. कई देश कतर और सऊदी अरब कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रिय हो गए हैं. रूस ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है. क़तर के प्रधानमंत्री तेहरान पहुंचे हैं, वहीं सऊदी अरब भी दोनों पक्षों से संपर्क में है, ताकि हालात हाथ से न निकलें. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डील नहीं हुई तो मिडिल ईस्ट में हालात बेकाबू हो सकते हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला वैश्विक तेल व्यापार भी इसकी चपेट में आ सकता है. अब पूरी दुनिया की नजर इसी पर है क्या बातचीत जंग को रोक पाएगी?