What is US Philadelphia Experiment 2.0: यूएस और ईरान के बीच बढ़ती मोर्चाबंदी किसी भी दिन जंग के रूप में तब्दील हो सकती है. इसके लिए दोनों मुल्क अपनी-अपनी ओर से सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में लगे हैं. अमेरिका ने ईरान पर काबू पाने के लिए अपने दो सैन्य बेड़े फॉर्मुज खाड़ी की ओर भेजे हैं. इनमें से एक बेड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस व्हिसकिंसन के नेतृत्व में पहले ही खाड़ी में पहुंचकर सुरक्षित दूरी पर तैनात हो चुका है. वहीं दूसरा बेड़ा यूएसएस अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में स्वेज नहर से होते हुए आगे बढ़ रहा है. ईरानी रडार से खुद को छिपाने के लिए युद्धपोत ने अपने ट्रांसपोंडर बंद कर दिए हैं, जिससे खामेनेई की सेना उसके सिग्नल पकड़कर लोकेशन न जान सके. उसकी इस ट्रिक को फिलाडेल्फिया प्रयोग 2.0 कहा जा रहा है. आखिर यह फिलाडेल्फिया प्रयोग 2.0 क्या है, जिसकी डिफेंस एक्सपर्ट चर्चा कर रहे हैं. 

क्या है फिलाडेल्फिया प्रयोग 2.0? 

WION की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे पहले जान लेते हैं कि यह फिलाडेल्फिया प्रयोग 2.0 क्या है. कहा जाता है कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका नौसेना ने 1943 में अपने फिलाडेल्फिया नौसेना शिपयार्ड में एक सीक्रेट परीक्षण किया था. ‘प्रोजेक्ट रेनबो’ नामक इस कथित परियोजना के तहत विध्वंसक जहाज USS एल्ड्रिज को स्टेल्थ तकनीक से लैस करना था. जिससे दुश्मन के उपकरण उसे ढूंढ न सकें.  से अदृश्य बनाना था

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कहा जाता है कि उस वक्त तक अमेरिकी सेना ने ऑप्टिकल अदृश्यता की तकनीक विकसित कर ली थी. इसके बाद टेस्ट के लिए 320 किमी दूर वर्जीनिया के नॉरफोक भेजा गया. इसके बाद वह फिर फिलाडेल्फिया वापस आ गया. उसके आने-जाने के इस रूट को दुश्मन के जहाज ट्रैक नहीं कर सके. 

किस तकनीक से लापता किया जहाज?

इसके लिए जहाज में स्टील के हल के चारों ओर बिजली के केबल लपेटे गए. जिससे जहाज का चुंबकीय क्षेत्र कम गया. ऐसा करने से जहाज तो खुले तौर पर समुद्र में तैरता रहा लेकिन उसके सिग्नल इतने कम हो गए कि रडार उसे पकड़ ही नहीं पाए.

अब सवाल उठता है कि क्या फिलाडेल्फिया प्रयोग 2.0 इस बार भी सफल हो सकता है. तो इसका जवाब है कि कुछ हां, कुछ ना. हम ऐसा क्यों कह रहे हैं. इसकी दो बड़ी वजहें है. असल में USS अब्राहम लिंकन 333 मीटर से अधिक लंबा एक तैरता शहर है. ऐसे में इतने विशालकाय युद्धपोत को नंगी आंखों या सैटेलाइट इमेजरी से छिपाना असंभव है. इसलिए अमेरिका चाहकर भी अपने इस कैरियर को गायब नहीं कर सकता.

दोनों देश चल रहे शह-मात का खेल

उसकी नौसेना इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम में इतनी पारंगत है कि दुश्मन के रडार को भ्रमित कर उसके सेंसरों को धोखा दे सकती है. USS अब्राहम लिंकन AN/SLQ-32 इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट से लैस है. यह सिस्टम अपने युद्धपोत से निकलने वाले सिग्नलों को इतना छोटा कर सकता है कि वह समुद्र में मछली पकड़ने वाली छोटी नाव के रूप में नजर आए. इसके चलते दुश्मन का रडार कंफ्यूज हो जाता है और उसे लॉक करके अपनी मिसाइलें नहीं दाग सकता. 

फिलहाल दोनों देश अपनी-अपनी शह-मात चलने में लगे हैं. युद्ध कब शुरू होगा और कौन किस पर भारी पड़ेगा. इन सब सवालों का जवाब भविष्य के गर्भ में छिपा है. लेकिन इतना तय है कि अगर यह जंग हुई तो बड़ी तबाही होगी. इससे दुनिया का वर्ल्ड ऑर्डर बदल जाना भी तय माना जा रहा है.