China on Japanese Army Unit 731: दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानी सैनिकों ने चीन पर हमला कर वहां जमकर कहर ढहाया था. खासकर जापानी आक्रमणकारी सेना की ‘यूनिट 731’ के अत्याचारों का याद कर चीन के लोग अब भी सिहर जाते हैं. चीन का दावा है कि इस जापानी यूनिट ने उसके देश में जैविक हथियारों का भी इस्तेमाल किया था. जिससे लाखों लोग हताहत हुए थे.
चीन के संग्रहालय ने जारी किया पुराना वीडियो
अब चीन के अपराधों के साक्ष्य संग्रहालय ने इस यूनिट के एक पूर्व सदस्य का पुराना वीडियो जारी किया है. चीन का दावा है कि वीडियो में दिख रहा सैनिक जंग के दौरान पकड़ा गया था. उसका नाम हिदेओ सातो था. पूछताछ में उसने 47 मिनट तक गवाही देकर जापानी सेना के अत्याचारों के बारे में बताया था.
जीवित जानवरों की करती थी चीरफाड़
चीन के अनुसार, हिदेओ सातो ने पूछताछ में बताया कि जापानी सेना की ‘यूनिट 731’ को अक्सर ‘ताकाहाशी टीम’ कहकर भी पुकारा जाता था. यह यूनिट प्लेग बैक्टीरिया की खेती करती थी. साथ ही ऐसे जानवरों को जीवित पकड़कर उनकी चीड़फाड़ करती थी. जो प्लेग से संक्रमित होते थे.
इसका मकसद पशुओं के जरिए प्लेग बैक्टीरिया की घातक खुराक और मृत्यु दर को सत्यापित करना था. बकौल चीन, ऐसा करके जापानी टीम प्लेग बैक्टीरिया को हथियार में बदलना चाहती थी. इसके साथ ही जीवित मानवों पर भी प्रयोग किए जाते थे.
कड़ी सुरक्षा वाले इलाकों में चलती थी रिसर्च!
हिदेओ सातो ने बताया कि मानव प्रयोग विशेष रूप से निर्मित, कड़ी सुरक्षा वाले कारागार भवन में किए गए थे. यह यूनिट 731 के काम करने का मुख्य क्षेत्र था. उस इलाके में केवल अनुभवी विशेषज्ञ को ही जीवित मनुष्यों पर प्रयोग करने की अनुमति दी जाती थी. युवा सैनिकों को इस काम से दूर रखा जाता है. चीन ने दावा किया कि हिदेओ सातो ने यूनिट 731 की ओर से बायोलॉजिकल हथियार बनाने की बात भी स्वीकार की.
चीन के अपराध साक्ष्य संग्रहालय के निदेशक जिन शिचेंग ने कहा कि हिदेओ सातो का जन्म 1927 में हुआ था और उन्होंने 1942 से 1945 तक यूनिट 731 में सेवा की थी.
(आईएएनएस)
