रेल मंत्रालय
भारतीय रेल के लिए रिकॉर्ड 2.93 लाख करोड़ रूपए का पूंजीगत व्यय(कैपेक्स); उच्च-गति कनेक्टिविटी, माल ढुलाई और सुरक्षा खर्च पर मुख्य ध्यान
देश भर में सात नए हाई-स्पीड कॉरिडोर शीर्ष भारतीय शहरों को और करीब लाएंगे; दक्षिण हाई-स्पीड डायमंड से कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी को लाभ
लगभग 4,000 किलोमीटर में फैले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से करीब 16 लाख करोड़ रूपए के निवेश की उम्मीद: अश्विनी वैष्णव
पूर्व–पश्चिम व्यापार को मज़बूती प्रदान करने के लिए डंकुनी(पश्चिम बंगाल) और सूरत के बीच 2052-किमी लंबा नया समर्पित मालवाहक कॉरिडोर घोषित
यलगभग 1.20 लाख करोड़ रूपए के प्रावधान के साथ, सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है: अश्विनी वैष्णव
भारत में डिज़ाइन और विकसित प्रणोदन (प्रोपल्शन) प्रणालियां अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, स्विट्ज़रलैंड और स्पेन सहित प्रमुख देशों को दिए जा रहे हैं: अश्विनी वैष्णव
प्रविष्टि तिथि: 01 FEB 2026 7:51PM by PIB Delhi
भारतीय रेल तेजी से विस्तार के लिए तैयार है। इस वर्ष के केन्द्रीय बजट में 2,78,000-करोड़ रूपए के बड़े आवंटन के साथ, रेलवे अपना व्यय हाई-स्पीड कनेक्टिविटी, माल ढुलाई और सुरक्षा पर करने में ध्यान केन्द्रित कर रहा है।
रेलवे के लिए ₹2.78 लाख करोड़ का ऐतिहासिक बजट। प्रधानमंत्री @narendramodi जी और वित्त मंत्री @nsitharaman जी का हार्दिक आभार।
इस बजट से रेलवे सुरक्षा, modernisation और यात्री सुविधा के कार्यों को और गति मिलेगी। pic.twitter.com/BhcrCIyDn9
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 1, 2026
केन्द्रीय बजट 2026–27 में भारतीय रेल के लिए 2,93,030-करोड़ रूपए के रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय(कैपेक्स) की योजना बनाई गई है। यह भारतीय रेलवे के लिए अब तक का सबसे अधिक पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) और आवंटन है।
Historic Capex!
A robust capital expenditure of ₹ 2,93,030 cr has been given to the Railways to drive infrastructure-led growth and accelerate the vision of Viksit Bharat.#Budget2026 #UnionBudget2026 #ViksitBharatBudget pic.twitter.com/W9zZdhtCIm
— Ministry of Railways (@RailMinIndia) February 1, 2026
यह आवंटन रेलवे अवसंरचना को मजबूती देने, क्षमता विस्तार करने और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने पर सरकार के निरंतर फोकस को दर्शाता है। इसका उद्देश्य आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स दक्षता के मुख्य चालक के रूप में रेलवे अवसंरचना का लाभ उठाने पर दिए गए जोर को दिखाता है। इस सतत निवेश से माल ढुलाई में सुधार, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, उच्च-घनत्व कॉरिडोरों में भीड़ कम करने तथा आधुनिक ट्रेनों और पुनर्विकसित स्टेशनों के माध्यम से यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना है।
दीर्घकालिक विजन के तहत, सरकार ने पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ यात्री परिवहन को बढ़ावा देने के लिए शहरों के बीच सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोरों को ‘ग्रोथ कनेक्टर्स’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। इनमें मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी शामिल हैं। इन प्रस्तावित कॉरिडोरों से शहरों के बीच यात्रा के समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और यात्रियों के लिए बिना किसी रुकावट के, बहु-माध्यमीय आवाजाही आसान हो जाएगा।
#ViksitBharatBudget:
7 High-Speed Rail Corridors as growth connectors between cities ⬇️🚅 Mumbai to Pune
🚅 Pune to Hyderabad
🚅 Hyderabad to Bengaluru
🚅 Hyderabad to Chennai
🚅 Chennai to Bengaluru
🚅 Delhi to Varanasi
🚅 Varanasi to Siliguri pic.twitter.com/XY5PEVge1y— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 1, 2026
नए कॉरिडोरों की घोषणा के साथ रेल-आधारित परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र में एक बुनियादी परिवर्तन आने की उम्मीद है। दक्षिण भारत में चेन्नई–बेंगलुरु–हैदराबाद हाई-स्पीड नेटवर्क एक दक्षिण हाई-स्पीड ट्रायंगल(या डायमंड) का निर्माण करेगा, जो प्रमुख आर्थिक और आईटी हब को जोड़ेगा। रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज रेल भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
7 नए हाई स्पीड कॉरिडोर अनाउंस हुए हैं, उससे देश में ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर पूरी तरह से ट्रांसफॉर्म हो जाएगा। चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद ये साउथ हाई स्पीड डायमंड बनेगा। 5 साउथ इंडियन स्टेट्स कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के लिए एक बड़ा वरदान साबित होगा: रेल… pic.twitter.com/ga63cQERYw
— Ministry of Railways (@RailMinIndia) February 1, 2026
श्री वैष्णव ने कहा कि चेन्नई–बेंगलुरु की यात्रा में लगभग 1 घंटा 13 मिनट, बेंगलुरु–हैदराबाद में लगभग 2 घंटे और चेन्नई–हैदराबाद में लगभग 2 घंटे 55 मिनट लगेंगे। यह नेटवर्क कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के लिए एक सशक्त विकास गुणक के रूप में कार्य करेगा और इससे क्षेत्रीय विकास को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा।
पश्चिमी और मध्य भारत में, प्रस्तावित मुंबई–पुणे हाई-स्पीड कॉरिडोर यात्रा के समय को घटाकर लगभग 48 मिनट कर देगा, जिससे ये दोनों बड़े शहरी केंद्र प्रभावी ढंग से जुड़ जाएंगे। पुणे से हैदराबाद तक लगभग 1 घंटा 55 मिनट में कनेक्टिविटी और आगे दक्षिणी केंद्रों से जुड़ाव से, विभिन्न क्षेत्रों में एक सतत हाई-स्पीड नेटवर्क का निर्माण होगा, जिससे यात्रियों और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं दोनों को लाभ होगा।
उत्तरी और पूर्वी भारत में, दिल्ली–वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर के माध्यम से यात्रा लगभग 3 घंटे 50 मिनट में पूरी होगी। इसके अतिरिक्त, वाराणसी से पटना होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से वाराणसी–सिलीगुड़ी की यात्रा लगभग 2 घंटे 55 मिनट में पूरी की जा सकेगी। यह कनेक्टिविटी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ते हुए एक नया आर्थिक कॉरिडोर विकसित करेगी, जिससे क्षेत्रीय विकास और आर्थिक गतिविधियों को काफी बढ़ावा मिलेगा।
श्री वैष्णव ने कहा कि ये सातों हाई-स्पीड कॉरिडोर मिलाकर लगभग 4,000-किलोमीटर में फैले होंगे और इनसे करीब 16-लाख करोड़ रूपए के निवेश की उम्मीद है, जिससे रेलवे भविष्य की गतिशीलता का एक मुख्य स्तंभ बन जाएगा।
माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स दक्षता की क्षमता को बढ़ावा देने के लिए, केन्द्रीय बजट में पश्चिम बंगाल के डंकुनी से गुजरात के सूरत तक एक नए समर्पित मालवाहक कॉरिडोर का प्रस्ताव भी किया गया है, जो ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगा। 2,052 किमी लंबा यह कॉरिडोर मौजूदा पश्चिमी समर्पित मालवाहक कॉरिडोर से जुड़ेगा, जिससे पश्चिमी तट के बंदरगाहों तक माल की बिना किसी रुकावट के आवाजाही हो सकेगी। केन्द्रीय मंत्री श्री वैष्णव ने बताया कि मौजूदा पूर्वी और पश्चिमी डीएफसी पहले से ही लगभग पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं, जहां प्रतिदिन लगभग 400 मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं, इसलिए भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए नए कॉरिडोर की आवश्यकता है।
🛤️ A new Dedicated Freight Corridor linking Dankuni (West Bengal) to Surat (Gujarat) to enhance seamless East-West trade and logistics efficiency.#ViksitBharatBudget pic.twitter.com/w5AtSR7edc
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 1, 2026
यह पूर्व–पश्चिम कॉरिडोर अलग-अलग क्षेत्रों में बिना रुकावट के व्यापार प्रवाह को सुदृढ़ करेगा, मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव कम करेगा और माल ढुलाई की दक्षता बढ़ाएगा, जिससे औद्योगिक विकास और आपूर्ति शृंखलाओं को काफी लाभ मिलेगा।
नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का बड़ा अनाउंसमेंट हुआ है। WDFC और EDFC की बहुत सिग्निफिकेंट प्रोग्रेस है। रोज 400 ट्रेन इन कॉरिडोर में ट्रैवल कर रही है। 2052 किमी का ईस्ट वेस्ट फ्रेट कॉरिडोर और 7 हाई स्पीड कॉरिडोर मिलकर रेलवे को नई एनर्जी देंगे: रेल मंत्री श्री @AshwiniVaishnaw जी pic.twitter.com/ztEIfokxiE
— Ministry of Railways (@RailMinIndia) February 1, 2026
केन्द्रीय मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है, जिसके लिए लगभग 1.20 लाख करोड़ रूपए विशेष रूप से सुरक्षा-संबंधी कार्यों हेतु निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में किए गए सतत निवेश के परिणामस्वरूप रेलवे दुर्घटनाओं में लगभग 95-प्रतिशत की कमी आई है, ऐसे में अब सुरक्षा को और मजबूत करने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। फोकस वाले क्षेत्रों में ट्रैक, लोकोमोटिव, वैगन और कोच का बेहतर रखरखाव, कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का तेज़ी से विस्तार, सीसीटीवी कैमरे लगाना, ओवरहेड इलेक्ट्रिकल(OHE) प्रणालियों का उन्नयन, स्टेशन पुनर्विकास तथा बेहतर ग्राहक सेवा और यात्री सुविधाएं शामिल हैं।
सेफ्टी पर बहुत बड़ा फोकस है। ₹1,20,000 करोड़ सेफ्टी पर इन्वेस्ट किया जाएगा और जो पास्ट परफॉर्मेंस रही है, उसमें करीब 95% सेफ्टी इंप्रूवमेंट हुई है और 95% एक्सीडेंट्स रिड्यूस हुए हैं:
रेल मंत्री श्री @AshwiniVaishnaw जी pic.twitter.com/rwwGWTFmkE— Ministry of Railways (@RailMinIndia) February 1, 2026
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि प्रणोदन प्रणालियां रेलवे तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं और भारत में डिज़ाइन व निर्मित प्रणोदन प्रणालियां अब अमेरिका, स्विट्ज़रलैंड, जर्मनी, फ्रांस और स्पेन जैसे प्रमुख देशों को निर्यात की जा रही हैं।
रेलवे की टेक्नोलॉजी का सबसे इंपॉर्टेंट पार्ट किसी भी ट्रेन का प्रोपल्शन सिस्टम होता है। आज भारत में डिजाइन, भारत में बना हुआ प्रोपल्शन स्विट्जरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, अमेरिका में एक्सपोर्ट हो रहा है: रेल मंत्री श्री @AshwiniVaishnaw जी pic.twitter.com/e2WVyGDYfP
— Ministry of Railways (@RailMinIndia) February 1, 2026
केन्द्रीय मंत्री ने अवसंरचना निर्माण में रिकॉर्ड उपलब्धियों का भी उल्लेख किया, जिनमें 35,000-किमी नई पटरियों का निर्माण, 47,000-किमी विद्युतीकरण और ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.5 प्रतिशत से अधिक विद्युतीकरण शामिल है। उन्होंने बताया कि वंदे भारत स्लीपर और चेयर कार ट्रेनों, अमृत भारत और नमो भारत ट्रेनों का निर्माण तथा वैगनों की रिकॉर्ड संख्या में आपूर्ति अभूतपूर्व गति से हो रही है।
स्थिरता पर जोर देते हुए, श्री वैष्णव ने कहा कि रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में लगभग 95-प्रतिशत कम प्रदूषण फैलाता है, जो सरकार की पर्यावरण और जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है तथा प्रधानमंत्री के रेलवे को हरित जन परिवहन माध्यम के रूप में विकसित करने के विजन को दर्शाता है।
यह रिकॉर्ड आवंटन भारतीय रेलवे की राष्ट्रीय विकास, आर्थिक वृद्धि और समावेशी कनेक्टिविटी की रीढ़ के रूप में भूमिका को और सुदृढ़ करता है। केन्द्रीय बजट 2026–27 में घोषित पहलों के साथ, भारतीय रेलवे ‘विकसित भारत’ के विजन के अनुरूप तेज कनेक्टिविटी, कुशल लॉजिस्टिक्स और सुदृढ़ अवसंरचना प्रदान करते हुए राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
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(रिलीज़ आईडी: 2221954) आगंतुक पटल : 15
