अरब सागर में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसका ड्रोन अमेरिका के साथ हुए टकराव से पहले अपना जासूसी मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर चुका था.
IRGC का दावा: ड्रोन ने भेज दिया पूरा डेटा
IRGC से जुड़े तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के हवाले से एक जानकार सूत्र ने बताया कि Shahed-129 ड्रोन अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नियमित निगरानी मिशन पर था. इस दौरान ड्रोन ने समुद्री गतिविधियों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए और सारा डेटा सुरक्षित तरीके से कंट्रोल सेंटर तक भेज दिया. सूत्र के मुताबिक, मिशन पूरा होने के बाद ड्रोन से संपर्क टूट गया, जिसकी वजह की जांच की जा रही है.
ईरान बोला- मिशन पूरी तरह कानूनी था
ईरान का कहना है कि ड्रोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उड़ान भर रहा था. IRGC ने साफ किया कि यह कोई उकसावे वाली कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक “रूटीन और वैध निगरानी मिशन” था.
अमेरिका का जवाब: F-35 से गिराया ड्रोन
वहीं अमेरिकी सेना ने इस घटना को आत्मरक्षा से जुड़ा कदम बताया है. US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरानी ड्रोन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln की ओर तेजी से बढ़ रहा था. अमेरिकी बयान के मुताबिक, हालात को देखते हुए एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भर रहे अत्याधुनिक F-35 फाइटर जेट ने ड्रोन को मार गिराया. अमेरिका ने कहा कि इस कार्रवाई में किसी भी अमेरिकी सैनिक या सैन्य उपकरण को नुकसान नहीं हुआ. उसी दिन एक और घटना हुई जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी गनबोट्स ने एक अमेरिकी फ्लैग वाला टैंकर M/V Stena Imperative को रोकने की कोशिश की. अमेरिकी डिस्ट्रॉयर USS McFaul ने टैंकर को एस्कॉर्ट किया और स्थिति कंट्रोल में आ गई. ये सब मिलकर दिखाता है कि दोनों तरफ तनाव बहुत ज्यादा है.
होर्मुज जलडमरूमध्य में भी तनाव
इसी दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में भी हालात बिगड़ते नजर आए. अमेरिका ने आरोप लगाया कि IRGC की नौकाओं ने अमेरिकी झंडे वाले व्यापारी जहाज को रोकने की कोशिश की, जिसके बाद अमेरिकी युद्धपोत को सुरक्षा के लिए आगे आना पड़ा.
मिडिल-ईस्ट में बेचैनी बढ़ी
ड्रोन, युद्धपोत और फाइटर जेट से जुड़ी इन घटनाओं ने मध्य पूर्व में पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है. जानकारों का मानना है कि अगर ऐसे टकराव जारी रहे तो हालात और गंभीर हो सकते हैं. ये घटना ऐसे वक्त हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर डील को लेकर बातचीत की कवायद चल रही है. ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में क्षेत्र में अपनी नौसेना बढ़ाई है, ताकि ईरान पर दबाव बने. लेकिन ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई और हार्डलाइनर्स बातचीत के खिलाफ हैं. एक तरफ अमेरिका कह रहा है कि हम अपनी सुरक्षा के लिए कुछ भी करेंगे. दूसरी तरफ ईरान कह रहा है कि हमारा मिशन कानूनी था, डेटा तो मिल गया. अब देखना ये है कि क्या ये घटना बातचीत को पटरी से उतार देगी या दोनों देश पीछे हटेंगे? मिडिल ईस्ट में छोटी-छोटी चिंगारी बड़ी आग लगा सकती हैं.
