अणु ऊर्जा विभाग
संसद प्रश्न : होमी भाभा कैंसर अस्पताल और रेडियोफार्मास्युटिकल उत्पादन केंद्र
प्रविष्टि तिथि: 04 FEB 2026 6:23PM by PIB Delhi
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क्रम संख्या |
अस्पताल का नाम |
शहर, राज्य |
चालू होने की तिथि |
बिस्तर |
2025 में पंजीकृत रोगियों की संख्या |
2025 में की गई सर्जरी की संख्या |
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1 |
टाटा मेमोरियल अस्पताल |
मुंबई, महाराष्ट्र |
1941 |
650 |
35705 |
43208 |
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2 |
कैंसर के उपचार, अनुसंधान और शिक्षा के लिए उन्नत केन्द्र (एसीटीआरईसी) |
नवी मुंबई, महाराष्ट्र |
2002 |
500 |
8970 |
12588 |
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3 |
महामाना पं. मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (एमपीएमएमसीसी), वाराणसी |
वाराणसी, उत्तर प्रदेश |
19/02/2019 |
394 |
25047 |
4188 |
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4 |
होमी भाभा कैंसर अस्पताल |
वाराणसी, उत्तर प्रदेश |
01/05/2018 |
189 |
2684 |
556 |
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5 |
होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र |
विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश |
11/05/2023 |
210 |
9751 |
4581 |
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6 |
होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र |
न्यू चंडीगढ़, पंजाब |
24/08/2022 |
300 |
10107 |
4807 |
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7 |
होमी भाभा कैंसर अस्पताल |
संगरूर, पंजाब |
20/01/2015 |
150 |
7796 |
1963 |
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8 |
डॉ. बी. बरूआ कैंसर संस्थान (बीबीसीआई) |
गुवाहाटी, असम |
27/11/2017 |
312 |
9810 |
4273 |
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9 |
होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र |
मुजफ्फरपुर, बिहार |
30/04/2025 |
107 |
7526 |
1212 |
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10 |
प्लेटिनम जुबली ब्लॉक |
मुंबई, महाराष्ट्र |
अपेक्षित 31/03/2027 |
583 |
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11 |
कैंसर के उपचार, अनुसंधान और शिक्षा के लिए एकीकृत केंद्र (आईसीटीआरईसी) |
खोपोली, रायगढ़, महाराष्ट्र |
अपेक्षित तिथि 27/06/2026 |
75 |
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— |
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12 |
होमी भाभा कैंसर अस्पताल |
भुवनेश्वर, ओडिशा |
अपेक्षित 07/05/2026 |
200 |
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परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) ने मुंबई, खारघर-नवी मुंबई, पंजाब, वाराणसी, विशाखापत्तनम, मुजफ्फरपुर और गुवाहाटी में व्यापक कैंसर देखभाल प्रदान करने के लिए 11 अस्पताल/संस्थान स्थापित करके सात राज्यों में विस्तार किया है। टीएमसी ने दवा की खोज और सस्ती और कम दुष्प्रभाव वाली दवाओं के लिए भारतीय चिकित्सा प्रणाली का उपयोग करके खोपोली में सुविधा स्थापित की। भारत में पाए जाने वाले औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण और ओडिशा के जटनी (खुरदा जिला) स्थित एनआईएसईआर परिसर में 200 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र स्थापित किया जा रहा है। वर्तमान स्थिति और उपयोग इस प्रकार हैं:
क. ओडिशा में चिकित्सा उत्पादों के इस्ट्रेलाइजेशन के लिए डीएई द्वारा स्थापित कोई विकिरण सुविधा नहीं है। ओडिशा में दो गामा विकिरण चेम्बर यूनिट हैं।
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- जीसी-5000 को राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (एनआईएसईआर), भुवनेश्वर, ओडिशा में स्थापित किया गया है।
- “आईएमएस और एसयूएम अस्पताल”, भुवनेश्वर, ओडिशा में रक्त इरेडिएटर।
ख. भारत में विशाल भंडारों में पाए जाने वाले फेरोकार्बोनेटाइट (एफसी) दुर्लभ मृदा तत्वों (आरईई) का एक सिद्ध स्रोत है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) ने अनुवेषण और अनुसंधान संबंधी परमाणु खनिज निदेशालय के साथ संयुक्त रूप से दुर्लभ मृदा तत्वों (आरईई) के लिए प्रमाणित संदर्भ सामग्री (एफसी-सीआरएम) तैयार की है, जो विश्लेषणात्मक विधियों के विकास और सत्यापन, उपकरणों के अंशांकन और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए आवश्यक है। यह 13 आरईई (सीई, डीवाई, ईआर, ईयू जीडी, एलए, एनडी, पीआर, एससी, एसएम, टीबी, वाई और वाईबी) और 6 प्रमुख तत्वों (एल, सीए, एफई, एमजी, मैंगनीज और फॉस्फोरस) को प्रमाणित करती है और आरईई अयस्क खनन में अन्वेषण, निष्कर्षण और प्रक्रिया नियंत्रण में उपयोगी है। यह सीआरएम विश्व में चौथी और भारत में पहली है। बीएआरसी अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के समर्थन में अर्धचालकों और विकिरण डिटेक्टरों में उपयोग के लिए महत्वपूर्ण उच्च-शुद्धता वाले गैलियम, इंडियम और जर्मेनियम का उत्पादन कर रहा है। इसके अलावा, रेडियोफार्मास्युटिकल अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक गुणवत्ता वाला ल्यूटेटियम भी आइसोटोप संवर्धन विधि द्वारा उत्पादित किया जाता है। इन सीआरएम और ल्यूटेटियम आधारित रेडियोफार्मास्युटिकल उत्पादों का उपयोग ओडिशा सहित पूरे देश में उद्योगों और अस्पतालों द्वारा किया जा सकता है।
ग. आरईई अयस्क खनन में अन्वेषण, निष्कर्षण और प्रक्रिया नियंत्रण के लिए आवश्यक आरईई सीआरएम से संबंधित स्वदेशी रूप से विकसित ये प्रौद्योगिकियां, विशेषकर कैंसर के इलाज में चिकित्सा अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक गुणवत्ता वाले रेडियोआइसोटोप का उत्पादन और उच्च शुद्धता वाले गैलियम, इंडियम और जर्मेनियम का उत्पादन, आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप आयात पर निर्भरता को कम करने में सहायक सिद्ध होंगी। ये सामग्रियां नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, विकिरण डिटेक्टर जैसे प्रमुख प्रौद्योगिकी-प्रधान क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं, ताकि देश के परमाणु, स्वास्थ्य सेवा और औद्योगिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता प्राप्त की जा सके, जिसमें ओडिशा राज्य भी शामिल है। वर्तमान में बीएआरसी के पास ओडिशा के किसी जनजातीय और आकांक्षी जिले में कोई परियोजना प्रस्ताव नहीं है।
केन्द्रीय प्रधानमंत्री कार्यालय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह जानकारी लोकसभा में 4 फरवरी 2026 को दी।
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