इटली की राजधानी रोम के एक प्राचीन चर्च में बनी पेंटिंग ने देशभर में विवाद खड़ा कर दिया है. चर्च की दीवार पर बने एक फरिश्ते (चेरुब) का चेहरा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मिलता-जुलता दिखने पर हंगामा मच गया. विवाद बढ़ने के बाद यह चेहरा रातों-रात मिटा दिया गया. अब पेंटिंग में सिर्फ फरिश्ते की बॉडी बची है.

अचानक क्यों चर्चा में आया यह चर्च?
यह मामला रोम के ऐतिहासिक बेसिलिका ऑफ सैन लोरेंजो इन लुसीना चर्च का है. बीते कुछ दिनों से चर्च की एक दीवार पर बनी एंजेल पेंटिंग लोगों का ध्यान खींच रही थी. इस एंजेल का चेहरा प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से काफी मिलता-जुलता बताया जा रहा था. तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जिसके बाद चर्च में लोगों की भीड़ बढ़ने लगी.

फोटो लेने उमड़ी भीड़, प्रार्थना में भी पड़ा असर
स्थानीय लोगों और पर्यटकों की भारी भीड़ चर्च पहुंचने लगी. कई लोग केवल उस पेंटिंग की फोटो लेने आते थे. हालात ऐसे हो गए कि कई बार चर्च में चल रही प्रार्थनाओं में भी व्यवधान की शिकायतें सामने आईं.

बुधवार सुबह बदला नजारा
एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार सुबह जब चर्च के दरवाजे खुले तो तस्वीर बदली हुई थी. फरिश्ते का चेहरा गायब था. उसकी जगह मोटे प्लास्टर या पेंट की परत चढ़ा दी गई थी. हालांकि फरिश्ते की बॉडी, पंख और हाथ में पकड़ा इटली का नक्शा पहले की तरह मौजूद है.

किसके कहने पर हटाया गया चेहरा?
इटली के अखबार ला रेपब्लिका ने बताया कि इस पेंटिंग को बहाल करने वाले रेस्टोरर ब्रूनो वैलेंटिनेट्टी ने रात में ही चेहरा ढका. यह कदम चर्च प्रशासन के कहने पर उठाया गया. वैलेंटिनेट्टी पहले यह स्वीकार कर चुके हैं कि एंजेल का चेहरा मेलोनी से प्रेरित था. हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि यह मूल पेंटिंग जैसा ही था.

सरकार और चर्च दोनों ने शुरू की जांच
विवाद सामने आने के बाद रोम डायोसीज़ और इटली के संस्कृति मंत्रालय ने जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि साल 2000 में बनी मूल पेंटिंग में एंजेल का चेहरा कैसा था और रेस्टोरेशन के दौरान क्या बदलाव किए गए.

मेलोनी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस पूरे मामले पर पहले हल्की प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, “नहीं, मैं बिल्कुल एंजेल जैसी नहीं दिखती,” और साथ में हंसने वाला इमोजी लगाया था. लेकिन अब मामला गंभीर हो चुका है. विपक्ष इसे पॉलिटिकल स्टंट बता रहा है, तो कुछ लोग कह रहे हैं कि कला को आज़ादी मिलनी चाहिए. उधर कार्डिनल बाल्दासारे रीना ने साफ कहा है कि चर्च की कला में किसी राजनीतिक शख्सियत को जगह नहीं दी जा सकती. अब अगर पेंटिंग को दोबारा बदला जाता है, तो इसके लिए सरकार, डायोसीज़ और संस्कृति विभाग से अनुमति लेनी होगी.

क्यों अहम है यह मामला?
विशेषज्ञों का कहना है कि इटली जैसे देश में, जहां हर इमारत इतिहास से जुड़ी है, इस तरह के मामले तेजी से तूल पकड़ लेते हैं. फिलहाल ‘एंजेल मेलोनी’ का चेहरा मिट चुका है, लेकिन विवाद अभी थमा नहीं है.