Bangladeshi Jamaat-e-Islami Want Friendship day with India: बांग्लादेश के 12 फरवरी 2026 के चुनाव से ठीक पहले जो हुआ है, उसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे. जमात-ए-इस्लामी, जिसे बांग्लादेश में 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पाकिस्तान का साथ देने और भारत-विरोधी रुख के लिए जाना जाता रहा, जो शेख हसीना के 15 साल के शासन में जहर उगलती रही, उसके कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया, पार्टी पर बैन लगा. वही जमात अब चुनावी मेनिफेस्टो में भारत से दोस्ती का बड़ा-बड़ा ऐलान कर रही है. ये पढ़कर अटपटा लग सकता है, लेकिन यह सच है. 4 फरवरी 2026 को ढाका के शेराटन होटल में पार्टी के अमीर डॉ. शफीकुर रहमान ने ये घोषणा-पत्र लॉन्च किया, और इसमें साफ लिखा है कि भारत समेत पड़ोसियों के साथ रिश्ते “आपसी सम्मान, निष्पक्षता और न्याय” पर टिकेंगे. समझते हैं पूरी बात.
चुनाव से पहले Jamaat का नया रंग, पुराना रुख vs नया ऐलान
बांग्लादेश में चुनाव बस कुछ दिन दूर हैं और इसी बीच Jamaat-e-Islami ने सबको चौंका दिया है. पार्टी ने अपने घोषणापत्र में साफ किया कि वह भारत, नेपाल, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव और थाईलैंड समेत सभी पड़ोसी देशों के साथ “शांति और सहयोग” के रिश्ते बनाएगी. यह बदलाव कई लोगों के लिए हैरानी वाला है, क्योंकि पहले पार्टी अक्सर विवादास्पद बयानों के लिए जानी जाती थी. जागो न्यूज़24 ने इसे “डिप्लोमैटिक मेकओवर” कहा है, मतलब पार्टी का विदेश नीति का रवैया अचानक नरम हो गया लगता है. पहले जहां पाकिस्तान से करीबी और भारत से दूरी की बात होती थी, अब मुस्लिम दुनिया के साथ-साथ विकसित देशों, अमेरिका, UK, चीन से भी बैलेंस रिश्ते बनाने की बात है.
क्यों बदला ये रुख? सत्ता की भूख और सच्चाई चेक
दरअसल, 2024 के जुलाई विद्रोह ने सब बदल दिया. शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा. अवामी लीग बैन हो गई, और जमात अब बीएनपी के साथ 11-पार्टी गठबंधन में मजबूत दावेदार बन गई है. कई सर्वे में जमात बीएनपी से पीछे नहीं दिख रही. अल जज़ीरा की रिपोर्ट में एक एक्सपोर्ट्स ने कहा कि “अगर जमात सत्ता में आती है, तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि इस्लामाबाद के साथ घनिष्ठ संबंध होने के बावजूद, वे खुले तौर पर टकराव करने के बजाय अपने हित के लिए नई दिल्ली के साथ एक समझ भी विकसित कर सकते हैं.” मतलब, सत्ता में आने के बाद भारत से टकराव मोल लेना फायदेमंद नहीं. पड़ोसी बड़ा है, व्यापार, पानी, सीमा सब मुद्दे हैं. जमात समझ रही है कि भारत से पंगा लेकर चलना मुश्किल होगा. रॉयटर्स में भी कहा गया कि पार्टी अब “संतुलित तरीके” में रिश्ते रखना चाहती है, किसी एक तरफ नहीं झुकना चाह रही.
मेनिफेस्टो में और क्या है? बांग्लादेश की छवि सुधारने की योजना
Jamaat ने कहा कि वह बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और पासपोर्ट की मान्यता बढ़ाने के लिए काम करेगी. इसका मकसद देश की छवि को मजबूत करना और नागरिकों को विदेश यात्रा में आसानी देना है. पार्टी ने वैश्विक मंचों पर सक्रिय भूमिका निभाने का भी वादा किया.
मुस्लिम दुनिया और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सक्रियता
घोषणापत्र में मुस्लिम देशों के साथ रिश्तों को मजबूत करने, पूर्वी यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के साथ कूटनीतिक और आर्थिक संबंध बढ़ाने पर जोर दिया गया. UN और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर शांति, सुरक्षा, मानवाधिकार और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर काम करने का वादा भी किया गया.
रोहिंग्या संकट और UN मिशन
पार्टी ने रोहिंग्या संकट का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान निकालने की बात कही और UN शांति मिशनों में अपनी भागीदारी जारी रखने का ऐलान किया. ये कदम बांग्लादेश के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चा का विषय बने हुए हैं.
चुनाव और राजनीतिक पृष्ठभूमि
चुनाव 12 फरवरी को होने वाले हैं. Awami League इस बार चुनाव में नहीं भाग ले रही, जबकि BNP और Jamaat सीट साझा समझौते में सक्रिय हैं. International Crisis Group ने इस चुनाव की प्रक्रिया की विश्वसनीयता और हिंसा के जोखिम पर चेतावनी भी दी है. इसलिए जमात का ये चुनावी घोषणापत्र के बहुत मायने हैं. लेकिन जमात का ये भारत-दोस्ती वाला ऐलान कईयों को शक में डाल रहा है. क्या ये सिर्फ वोट के लिए जुमला है? या सच में पार्टी बदल रही है? युवा वोटर, जो 2024 के आंदोलन में थे, अब जमात को “अल्टरनेटिव” देख रहे हैं? भारत के लिए ये वादा कितना पक्का होगा? ये तो चुनाव नतीजे और सत्ता में आने के बाद पता चलेगा.
