India- US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की घोषणा पिछले सप्ताह कर दी गई. लंबे समय से इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति थी. डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल व्यापार समझौते का ऐलान किया, बल्कि भारत पर थोपा गया 50 प्रतिशत का टैरिफ कम करते हुए इसको 18 फीसदी कर दिया. भारत और अमेरिका बीच हुई डील की खबर सामने आते ही कच्चे तेला का मुद्दा गरमा गया.
दरअसल, ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति ने दावा किया था कि समझौते के तहत भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताई है और इसके बदले वह अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से तेल खरीदेगा. इस पूरे मसले पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है. वहीं, रूस ने स्पष्ट कहा कि उसे नई दिल्ली से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है.
तेल केवल व्यापार का हिस्सा नहीं, एक रणनीतिक साधन है
कच्चा तेल खरीदना आम भाषा में दो देशों के बीच व्यापार का मुद्दा समझा जा सकता है, लेकिन यह एक रणनीतिक साधन है जो गठबंधनों, प्रतिबंधों, युद्धों और व्यापार समझौतों को आकार देता है. भारत और अमेरिका के बीच हुए इस समझौते ने इस गतिशीलता को स्पष्ट रूप से सामने ला दिया है. जिससे ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीति को टैरिफ, आपूर्ति श्रृंखला और बाजार पहुंच के साथ-साथ महत्व मिल रहा है.
जब ट्रंप और पीएम मोदी ने दुनिया को चौंकाया
इस बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी ने अचानक एक व्यापार समझौते की घोषणा करके कई लोगों को चौंका दिया. इस समझौते के तहत अमेरिका में प्रवेश करने वाले भारतीय सामानों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा. बता दें कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते पर अभी औपचारिक रूप से हस्ताक्षर नहीं हआ है. बारीक विवरणों पर काम चल रहा है.
टीओआई वैश्विक मामलों के जानकार मानते हैं कि भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का अमेरिकी निर्णय द्विपक्षीय व्यापारिक तनाव में स्पष्ट कमी का संकेत देता है. वहीं, यह कदम दोनों पक्षों के समन्वित रणनीतिक इरादों को दर्शाता है. आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल-नवंबर के दौरान स्पेन को निर्यात में 56 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई और यह लगभग 4.7 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया.
भारत और अमेरिका बड़े साझेदार
गौरतलब है कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. पिछले साल अप्रैल में ट्रंप की ओर से थोपे गए टैरिफ से भारत को काफी नुकसान हुआ था. अब टैरिफ दर घटकर 18% हो जाने से भारत अमेरिकी बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता फिर से हासिल कर लेगा. टैरिफ के कम होने के बाद वस्त्र, चमड़ा, जूते, कालीन, समुद्री भोजन और रत्न एवं आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.
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‘500 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदेगा भारत’
उल्लेखनीय है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और बड़ा दावा किया था कि भारत 500 अरब डॉलर मूल्य का अमेरिकी सामान खरीदेगा. हालांकि, अभी तक भारत की ओर से इसपर पूरे मसले पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है. जानकार मानते हैं कि भारत द्वारा अमेरिका से 500 अरब डॉलर तक का सामान आयात करने की घोषणा व्यापक टैरिफ-रीसेट पैकेज का एक स्पष्ट हिस्सा है और समझौते के रणनीतिक संतुलन को रेखांकित करती है.
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