US warning countries for trading with Iran: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया है. इस आदेश के तहत अमेरिका ने ईरान के खिलाफ पहले से लागू राष्ट्रीय आपात स्थिति को फिर से बरकरार रखा है. साथ ही उन देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का रास्ता खोल दिया गया है जो अब भी ईरान के साथ कारोबार कर रहे हैं. व्हाइट हाउस के अनुसार अब अमेरिका ऐसे किसी भी देश से आने वाले सामान पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगा सकता है. ये टैरिफ अधिकतम 25 प्रतिशत तक हो सकता है. ये नियम उन देशों पर लागू होगा जो सीधे या किसी और तरीके से ईरान से सामान या सेवाएं खरीदते हैं, या ईरान से व्यापारिक लेनदेन करते हैं. अमेरिका का कहना है कि यह कदम उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है.

ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर लगेगा तगड़ा टैरिफ
व्हाइट हाउस ने बताया कि इस आदेश के तहत एक ऐसा सिस्टम बनाया गया है. जिससे अमेरिका ईरान से व्यापार करने वाले देशों के खिलाफ टैरिफ लगा सकेगा. राष्ट्रपति को यह अधिकार भी दिया गया है कि हालात बदलने पर इन उपायों में बदलाव किया जा सके. अगर कोई देश जवाबी कार्रवाई करता है. या फिर ईरान या संबंधित देश अमेरिका की सुरक्षा, विदेश नीति और आर्थिक हितों के साथ तालमेल बनाने के लिए ठोस कदम उठाते हैं. तो टैरिफ नीति में ढील दी जा सकती है. इस आदेश को लागू कराने की जिम्मेदारी विदेश मंत्री, वाणिज्य मंत्री और अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि को दी गई है. ये अधिकारी जरूरी नियम और दिशा निर्देश जारी कर सकेंगे, ताकि यह नई टैरिफ व्यवस्था सही तरीके से लागू हो सके.

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह फैसला ईरान की कथित खतरनाक गतिविधियों के खिलाफ व्यापक अभियान का हिस्सा है. व्हाइट हाउस के मुताबिक, ईरान परमाणु क्षमता हासिल करने की कोशिश कर रहा है. आतंकवादी संगठनों का समर्थन करता है. बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम चला रहा है. और पश्चिम एशिया में अस्थिरता फैलाने में भूमिका निभा रहा है. अमेरिका ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान कई देशों में सक्रिय अपने सहयोगी सशस्त्र समूहों को समर्थन देता है. अपने ही नागरिकों पर सख्ती करता है. और देश के संसाधनों को घरेलू जरूरतों की जगह परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर खर्च कर रहा है.

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परमाणु हथियार बनाना चाहता है ईरान
व्हाइट हाउस ने इन सभी गतिविधियों को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए असामान्य और गंभीर खतरा बताया है. इसी वजह से अमेरिका लंबे समय तक कड़े कदम उठाए रखने के पक्ष में है. यह आदेश राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान के प्रति पहले से चली आ रही सख्त नीति का ही विस्तार माना जा रहा है. अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था. ईरान पर अधिकतम दबाव वाली नीति के तहत कड़े प्रतिबंध लगाए थे. और ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था. दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद भी ट्रंप ने यही नीति फिर से लागू कर दी है. ताकि ईरान को परमाणु हथियार बनाने का कोई रास्ता न मिल सके.

इस बीच अमेरिका ने ईरान के लिए एक सुरक्षा चेतावनी भी जारी की है. इसमें ईरान में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी होने, इंटरनेट सेवाओं में रुकावट, उड़ानों के रद्द होने, और पूरे देश में संचार पर पाबंदियों की आशंका जताई गई है. अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी गई है कि अगर सुरक्षित हो तो वे तुरंत ईरान छोड़ दें, किसी भी प्रदर्शन या भीड़ से दूर रहें, अपनी पहचान को लेकर सतर्क रहें, और लंबे समय तक बाधाएं रहने की तैयारी रखें. अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल कोई राजनयिक या दूतावास संबंध नहीं हैं. ईरान में अमेरिका के हितों की देखरेख स्विट्जरलैंड का दूतावास करता है.

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