
Why Bangladeshi Hindus in crisis: हिंदी की एक कहावत है – राज, काज में धर्म का चोला. आग लगाकर हाथ सेकना . इसका मतलब है कि राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए समाज में कट्टरपंथ की आग लगाई जाती है. यही बांग्लादेश में भी हो रहा है. वोटिंग से पहले बांग्लादेश में किलिंग शुरू हो गई है. वहां की सड़कों पर खूनखराबा हो रहा है. खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा बढ़ गई है.
बांग्लादेश में दिसंबर 2025 में चुनाव का ऐलान हुआ था . तब से लेकर अब तक बांग्लादेश में 16 हिंदुओं की बेरहमी से हत्या कर दी गई है. हिंदुओं के 100 से ज्यादा दुकानों को लूटा जा चुका है और तकरीबन 50 हिंदू परिवारों के घर जला दिए गए हैं. हिंदुओं के खिलाफ शुरु हुई हिंसा का नया सेंटर ढाका, मेमेनसिंह, चटगांव और खुलना जैसे बड़े क्षेत्र बने हुए हैं.
हिंदुओं के जान के दुश्मन बने BNP और जमात
हिंदुओं के खिलाफ हुई ज्यादातर वारदातों में BNP के स्टूडेंट विंग छात्र शिबिर और जमात-ए-इस्लामी के नेताओं का हाथ है. यानी हिंदू दोनों बड़ी पार्टी के टारगेट पर हैं. जमात-ए-इस्लामी के लोग भी मार रहे हैं और तारिक रहमान की पार्टी के लोग भी हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं.
हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का ये नया दौर बताता है कि कट्टरपंथी वोटबैंक को हासिल करने के लिए चुनाव में उतरे सभी दल हिंदुओं को बलि का बकरा बना रहे हैं . आपको भी इन बांग्लादेशी हिंदुओं की आवाज ध्यान से सुननी चाहिए ताकि आप समझ सकें कि अपने ही देश में ये हिंदू इस वक्त कितना असहाय महसूस कर रहे हैं.
ये दर्द सिर्फ अपनों को खोने का नहीं है . इस दर्द के साथ एक और डर बांग्लादेशी हिंदुओं को सता रहा है . ये डर भी बांग्लादेश के चुनाव से जुड़ा है. बांग्लादेश चुनाव के दो मुख्य पक्ष यानी BNP और जमात-ए-इस्लामी दोनों ही हिंदू विरोधी हैं. यही हिंदुओं का डर है. दोनों में से कोई भी जीता तो एक बार फिर बांग्लादेशी हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का बड़ा दौर शुरु हो जाएगा.
संयुक्त राष्ट्र की कमेटी ने जताई गंभीर चिंता
सोचिए, ये लोग कल वोट कैसे देंगे और किसे देंगे? बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं की दयनीय हालत को लेकर संयुक्त राष्ट्र की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने भी गंभीर चिंता जताई है. इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि बांग्लादेशी हिंदुओं के खिलाफ संगठित तौर पर हिंसा की जा रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक इस हिंसा के पीछे बांग्लादेश के राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं का हाथ है. साथ ही ये अंदेशा भी जताया गया है कि मतदान के दिन हिंदुओं को वोट डालने से रोकने के लिए बड़े पैमाने पर हिंसा की जाएगी.
इसे बांग्लादेशी हिंदुओं का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या कहा जाए. वक्त के सताए ये हिंदू पिछले 2 साल से इंतजार कर रहे थे कि बांग्लादेश में यूनुस का कट्टरपंथी सिस्टम खत्म हो और वो दोबारा सम्मानजनक जीवन जी पाएं लेकिन चुनाव आए भी तो ऐसे किरदारों के साथ. जो खुले तौर पर हिंदुओं के दुश्मन हैं.
भारत के खिलाफ माहौल बना रहे दोनों दल
बांग्लादेश के आम चुनाव में हिंदुओं के साथ ही साथ भारत को भी लगातार टारगेट किया जा रहा है. BNP और जमात-ए-इस्लामी, दोनों ही दल एंटी इंडिया नैरेटिव के साथ वोट हासिल करने की कोशिश में जुटे हैं. बांग्लादेश की सबसे बड़ी सक्रिय पार्टी यानी BNP के मेनिफेस्टो में साफ-साफ लिखा गया है कि भारत को अब बांग्लादेश के साथ समान मात्रा में नदियों का पानी साझा करना होगा.
दूसरी तरफ जमात-ए-इस्लामी के घोषणापत्र में कहा गया है कि भारत को दिया गया स्पेशल स्टेटस खत्म किया जाएगा. BNP के तारिक रहमान ने कहा है कि दक्षिण एशियाई देशों के संगठन सार्क में भारत का दबदबा कम किया जाएगा. विदेश नीति के मोर्चे पर जमात-ए-इस्लामी का कहना है कि भारत की जगह मुस्लिम देशों के साथ बांग्लादेश अपने सहयोग को आगे बढ़ाएगा.
ये कहना गलत नहीं होगा कि बांग्लादेश के दोनों मुख्य दल यानी BNP और जमात-ए-इस्लामी के पास देश से जुड़ा कोई ठोस एजेंडा नहीं है. दोनों ही दल हिंदू और भारत विरोधी नफरत को हवा दे रहे हैं और इसी के सहारे बांग्लादेश का चुनाव जीतने की जुगत लगा रहे हैं.
लाखों की तादाद में बुर्के किए गए बरामद
चीन के कम्युनिस्ट तानाशाह माओ-जे-डॉन्ग ने कहा था – राजनीतिक सत्ता बंदूक की नली से निकलती है यानी सत्ता हासिल करने के लिए बल प्रयोग या फिर खून-खराबा करना पड़ता है. आज का बांग्लादेश..माओ की इसी फिलॉस्फी पर चल रहा है.
दुनिया के हर फेल्ड स्टेट का इतिहास बताता है जब-जब लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रक्रियाओं का दमन किया गया है तो वो देश गर्त में चला गया है. बांग्लादेश में भी यही हो रहा है. अब हम आपके सामने बांग्लादेश में चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर चल रही धांधली का पर्दाफाश करने जा रहे हैं.
बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक बड़े पैमाने पर ऐसे बैलट पेपर छापे गए हैं जिनके ऊपर सीरियल नंबर नहीं है. यानी मतदाता अपना वोट तो डालेगा लेकिन वोट का इस्तेमाल सरकारी मशीनरी के मन मुताबिक होगा. अगर वोट पक्ष में पड़ा तो बैलट पेपर स्वीकार किया जाएगा और अगर वोट विरोधी दलों को पड़ा तो उसे अमान्य घोषित कर दिया जाएगा. इसके साथ ही बांग्लादेश पुलिस ने लाखों की तादाद में बुर्के भी बरामद किए हैं. पुलिस की जांच में सामने आया है कि इन बुर्कों की आड़ में फर्जी वोट कराने की प्लानिंग की गई थी.
महिला उम्मीदवारों को किया जा रहा ब्लैकमेल
चुनाव पर नजर रख रहे संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि डीप-फेक के जरिए चुनाव में खड़ी महिला उम्मीदवारों के आपत्तिजनक वीडियो बनाए गए हैं. इन वीडियोज के जरिए महिला उम्मीदवारों को ब्लैकमेल करके उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जा रहा है.
हिंदुओं के खिलाफ हिंसा, भारत विरोधी नैरेटिव, खून-खराबा और ब्लैकमेलिंग . बांग्लादेश के चुनाव को देखकर लग रहा है कि ये कोई लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं बल्कि गैंगवॉर चल रही है. एक ऐसी गैंगवॉर जिसमें कुर्सी हासिल करने के लिए किसी भी हद को पार किया जा रहा है.
