Why AI boyfriends craze in China: दुनियाभर में AI चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है. यह तकनीक न केवल लोगों का जीवन आसान बना रही है बल्कि उन्हें भावनात्मक सहारा भी दे रही है. अब तो टेक कंपनियों ने AI पार्टनर भी लॉन्च कर दिए हैं. आप उनके जरिए AI गर्लफ्रेंड या AI बॉयफ्रेंड ढूंढ सकते हैं. दुनिया की दो महाशक्तियों अमेरिका और चीन में इन AI फ्रेंड के लिए दीवानगी बढ़ रही है. लेकिन मजे की बात ये है कि अमेरिका में जहां AI गर्लफ्रेंड की जबरदस्त डिमांड हो रही है. वहीं चीन में AI बॉयफ्रेंड रखने का क्रेज बढ़ रहा है. आखिर दोनों मुल्कों में ये अलग-अलग पैटर्न देखने के में क्यों मिल रहा है. क्या वहां पर पारिवारिक संस्थाएं कमजोर हो गई हैं या फिर कोई और कारण है.
अमेरिका में AI गर्लफ्रेंड बना रहे युवा
असल में अमेरिका और अंग्रेजी भाषी इंटरनेट में AI पार्टनर अधिकतर पुरुषों के लिए ही डिजाइन किए गए हैं. इसकी वजह ये है कि वहां की मौजूदा पीढ़ी खुद को पहले की पीढ़ियों से कहीं अधिक अकेला महसूस करती है. अपने आपको खुश रखने के लिए वे अपना अधिकतर वक्त ऑनलाइन सर्फिंग करके बिताते हैं. इसकी वजह से परिवार, रिश्तेदारों और समाज में उनका मिलना-जुलना बहुत कम होता जा रहा है.
उनकी इसी कमी की पूरा करने का काम AI गर्लफ्रेंड करती है. वह न केवल हमेशा उपलब्ध रहती है बल्कि आप जब चाहे, उससे अपने मन की बात कह सकते हैं. आपकी मांग पर वह आपसे फ्लर्ट भी कर सकती है. वह न तो बहस करती है और न ही कभी छोड़कर जाती है.
टूटे पलों में बन रही बड़ा सहारा
अगर कोई पुरुष कद में छोटा, काला या कुरुप भी है तो AI पार्टनर उसे कभी भी रिजेक्ट नहीं करती. वह उसे अंतरंगता का अहसास दिलाती है और भावनात्मक सहारा देती है. लोगों की इस जरूरत को देखते हुए अब वहां की टेक कंपनियां इस तकनीक को साथी के रूप में बेच रही है.
लेकिन इस चलन से अमेरिका फैमिली एक्सपर्ट चिंतित भी हैं. उन्हें आशंका है कि AI पार्टनर से दोस्ती करने पर वे शादी करने, बच्चे पैदा करने और परिवार बनाने से दूर हो सकते हैं. इससे अमेरिका के जन्म दर में गिरावट आ सकती है. साथ ही समाज में नशाखोरी और मानसिक अवसाद की स्थिति को भी बढावा मिल सकता है. सबसे बड़ा डर ये है कि अगर यह चलन इसी रफ्तार से बढ़ता गया तो वहां पर दूसरे व्यक्ति की जरूरत को ही खत्म कर सकता है.
चीन में AI बॉयफ्रेंड के लिए क्रेजी महिलाएं
वहीं चीन में हालात इसके उलट दिखाई देते हैं. वहां पर AI गर्लफ्रेंड की नहीं बल्कि AI बॉयफ्रेंड की जबरदस्त डिमांड है. शहरों में रहने वाली पढ़ी लिखी और 20 से 30 साल उम्र की महिलाएं धड़ाधड़ AI बॉयफ्रेंड बना रही हैं. इसकी वजह से लड़कों से उनका मोहभंग हो रहा है. जिसका नतीजा ये है कि वहां पर शादी की दर लगातार गिर रही है और समाज में लिंग असंतुलन भी बढ़ने लगा है.
लेकिन सवाल है कि चीन की युवा महिलाएं ऐसा कर क्यों कर रही हैं. जब वे बॉयफ्रेंड बनाना ही चाहती हैं तो असली लड़कों को क्यों नहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को क्यों. इसकी वजह वहां के सामाजिक ताने-बाने में छिपी है. असल में भारत की तरह चीन में पितृसत्तात्मक परिवार व्यवस्था है. यानी परिवार का मुखिया पुरुष होता है और वही परिवार से जुड़े सारे फैसले लेता है.
इस वजह से लड़कियों को भा रहा ये रिश्ता
ऐसे में युवा पढ़ी-लिखी महिलाओं लग रहा है कि अगर वे भी शादी करके घर बसाती हैं तो फिर पति सारे फैसले लेगा. इसके बाद उन्हें ससुराल की देखभाल का बोझ उठाना पड़ेगा. साथ ही अपने करियर का त्याग करके घर बैठना पड़ेगा. उन्हें अपने पति और ससुराल के ताने भी सुनने को मिल सकते हैं.
यही वजह है कि वे असल लड़कों से दोस्ती करने के बजाय AI बॉयफ्रेंड से फ्रेंडशिप कर रही हैं. वे उन्हें बंधनों के रोमांस का अनुभवदेते हैं. बिना कोई शिकायत किए वे उनकी बात सुनते हैं. उन्हें प्रोत्साहित करते हैं. कभी जॉब छोड़कर गांव वापस आने के लिए नहीं कहते. बच्चे पैदा करने का दबाव नहीं बनाते. जब वे परेशान होती हैं तो उनका ढाढस बंधाते हैं. यही वजह है कि अब चीनी युवा महिलाएं पारंपरिक रिश्तों में बंधने को तैयार नहीं हो रही हैं.
चीन सरकार की उड़ रही नींद
इसकी वजह से चीनी नियामक संस्थाएं भी परेशान हैं. उन्हें अंदेशा है कि अगर यह प्रवृति यूं ही बढ़ी तो चीन में परिवार का ताना-बाना बिखकर रह जाएगा. साथ ही जन्म दर घटने से देश को गंभीर नुकसान होगा. उनकी चिंता इस बात से भी है कि भावनात्मक रूप से संतुष्ट लड़कियों के लिए AI रिश्ते शादी से बाहर निकलना आसान बना रहे हैं. जिसका कोई विकल्प चीनी सरकार ढूंढ नहीं पा रही है.
