Russia US Economic Partnership: ग्लोबल इकोनॉमी में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है. हाल ही में आई रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ने संकेत दिए हैं कि वह इंटरनेशनल ट्रेड में फिर से अमेरिकी डॉलर को अपनाने पर विचार कर सकता है. हालांकि इस खबर ने चीन की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि चीन पिछले कई सालों से अमेरिकी डॉलर के दबदबे को खत्म करने की कोशिश कर रहा है और इस राह में उसने ‘डी-डॉलरलाइजेशन’ की मुहिम भी चला दी है. वहीं अगर रूस डॉलर को अपना लेता है, तो ग्लोबर इकोनॉमी में इसे डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीति की एक बड़ी जीत मानी जाएगी.
सेवन प्वाइंट प्रपोजल
रूस के एक इंटरनल डॉक्यूमेंट के अनुसार, क्रेमलिन (रूसी सरकार) अमेरिका के साथ सात मुख्य क्षेत्रों में मिलकर काम करना चाहता है. इसे ‘सेवन प्वाइंट प्रपोजल’ कहा जा रहा है.
– इस लिस्ट में पहले नंबर पर एविएशन है. इसमें रूस के पुराने होते जहाजों को आधुनिक बनाने के लिए लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट करना और रूसी मैन्युफैक्चरिंग में अमेरिका की भागीदारी चाहता है.
– दूसरे नंबर पर तेल और गैस है. रूस चाहता है कि समुद्र और कठिन जगहों से तेल निकालने के लिए अमेरिका के साथ प्रोजेक्ट शुरू करे. इससे अमेरिकी कंपनियों को रूस में हुए पुराने नुकसान की भरपाई करने का भी मौका मिलेगा.
– तीसरे नंबर पर ‘बाजार में वापसी’ करना है. अमेरिकी कंपनियों को रूस के कंज्यूमर मार्केट में वापस लाने के लिए खास रियायतें देना.
– चौथे नंबर पर परमाणु ऊर्जा और AI है. रूस न्यूक्लियर एनर्जी और AI के क्षेत्र में अमेरिका के साथ मिलकर काम करना चाहता है.
– पांचवें नंबर पर डॉलर का इस्तेमाल है. रूस को फिर से डॉलर के जरिए लेन-देन करने की अनुमति चाहता है.
– छठे नंबर पर कच्चा माल है. इसमें रूस अमेरिका के साथ लिथियम, तांबा, निकल और प्लेटिनम जैसे जरूरी धातुओं की मदद चाहता है.
– आखिरी और सातवें नंबर पर ईंधन नीति है. इसमें रूस चीन और यूरोप की ‘क्लाइमेट-फ्रेंडली’ नीतियों के खिलाफ अमेरिका के साथ मिलाकर फॉसिल फ्यूल को बढ़ावा देना चाहता है.
चीन के लिए क्यों है ‘बड़ा झटका’?
रूस की डॉलर पर वापसी चीन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. दरअसल यूक्रेन युद्ध के बाद जब अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, तब रूस और चीन नजदीक आ गए थे. दोनों देशों ने मिलकर योजना बनाई थी कि वे डॉलर को छोड़कर युआन और रूबल में व्यापार करेंगे. चीन को उम्मीद थी कि इससे डॉलर का वर्चस्व कम हो जाएगा. ऐसे में अब रूस का डॉलर की ओर झुकाव चीन की उन उम्मीदों पर पानी फेर सकता है.
रूस क्यों बदल चाह रहा है बदलाव?
रूस के लिए केवल युआन या रूबल में व्यापार करना उतना आसान नहीं है. इंटरनेशनल मार्केट में डॉलर आज भी सबसे ज्यादा ताकतवर है. ऐसे में अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से ठीक करने के लिए रूस अपने फैसले को बदलना चाह रहा है.
