बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में जैसे नतीजे की उम्मीद थी, वही आए हैं. तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) प्रचंड जीत की ओर बढ़ रही है. जमात-ए-इस्लामी को लोगों ने नकार दिया है. यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब पूर्व पीएम शेख हसीना देश से बाहर भारत में निर्वासन में हैं और उनकी पार्टी पर बैन लगा हुआ है. ऐसे में बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त रहीं वीणा सीकरी ने इस चुनाव के पीछे एक बड़े खेल की ओर इशारा किया है. 

हमारे सहयोगी न्यूज चैनल WION से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि इस चुनाव को हमें रिजीम चेंज ऑपरेशन के संदर्भ में देखना चाहिए, जो जुलाई-अगस्त 2024 में हुआ था. वो ऑपरेशन सफल हुआ था. इसके पीछे मोहम्मद यूनुस और जमात-ए-इस्लामी की बड़ी भूमिका रही. जमात को पाकिस्तान से और पाकिस्तान को पश्चिमी देशों से सपोर्ट मिलता है. अब आगे की क्रोनोलॉजी को हमें समझना होगा. एंबेसडर ने कहा कि पहले वह कह रहे थे कि हमें चुनाव की जरूरत ही नहीं है. यूनुस और उनके सलाहकार कह रहे थे कि पहले हम रिफॉर्म्स करेंगे फिर चुनाव कराए जाएंगे. 

84 सवाल पूछ रहे लेकिन सीरियल नंबर नहीं

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पूर्व एंबेसडर सीकरी ने कहा कि जब लोगों ने और तमाम राजनीतिक पार्टियों ने प्रोटेस्ट किया तो चुनाव कराए गए लेकिन रेफरेंडम (जनमत संग्रह) भी साथ लेकर आ गए. चार्टर में वे चार सेक्शन में 84 सवाल पूछ रहे हैं. लोगों से कहा गया कि वे हां या ना में जवाब दें. उन्होंने बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि इन बैलेट पेपर्स में कोई भी सीरियल नंबर ही नहीं है. आप कल्पना कीजिए कि यह कितना फेक रेफरेंडम है. यह संवैधानिक रेफरेंडम नहीं, बल्कि इसके जरिए एक और तख्तापलट को वैध बनाने की कोशिश की गई है. 

उन्होंने कहा कि वे संविधान बदलना चाहते हैं, यह बताकर यस वोट मिले हैं लेकिन सीरियल नंबर नहीं है तो सरकार कितने भी प्रिंट करवा सकती है. इस पर बस यस वोट का स्टैंप लगाना होगा मतलब उन्हें यस में ही रिजल्ट देना है. इस चुनाव के साथ यह एक बड़ा खेल किया गया है. सीकरी ने कहा कि आवामी लीग को चुनाव से प्रतिबंधित करना भी गैरकानूनी है. यूरोप के जो डिप्लोमेट्स जैसे ब्रिटिश हाई कमिश्नर 2024 में शेख हसीना की निंदा कर रहे थे क्योंकि बीएनपी ने चुनावों से दूर रहने का फैसला किया था, जबकि उसे बैन नहीं किया गया था. अब वे आवामी लीग को बैन किए जाने पर खामोश हैं और इसे जस्टिफाई कर रहे हैं. 

41 लाख वोट पड़े रेफरेंडम में

हां, चुनाव के साथ नए संविधान समेत तमाम सुधारों के लिए कराए गए रेफरेंडम में 41 लाख 37 हजार 196 वोट पड़े. इसमें YES वोट के पक्ष में 65.3 प्रतिशत और NO वोट के पक्ष में 34.7 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला.