रूस के विपक्षी नेता की हत्या में एक ऐसे जहर के इस्तेमाल का दावा किया जा रहा है जो मेंढक से मिलता है. हां, वही मेढक जो गांव में तालाब के आसपास बरसात के दिनों में टर्र-टर्र करता रहता है. ये नाली के रास्ते घर में घुस आते हैं और लोग इन्हें बाहर फेंक आते हैं. अब मेंढक से जहर मिलने की खबर ने आम लोगों को भी हैरत में डाल दिया है कि क्या मेंढक जहरीले होते हैं? रूस के विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी की मौत का रहस्य क्या है? यूके समेत कई यूरोपीय देशों ने मिलकर यह सनसनीखेज खुलासा किया है. उनका कहना है कि दो साल पहले नवलनी की हत्या में डार्ट मेंढक के जहर का इस्तेमाल किया गया था. आखिर मेंढक से जहर कैसे बन जाता है? 10 प्वाइंट्स में पूरी बात जानिए.
1. ब्रिटेन और उसके सहयोगी देशों ने क्रेमलिन (रूस का राष्ट्रपति ऑफिस) पर नवलनी की हत्या का आरोप मढ़ा है. उनका दावा है कि नवलनी के शव पर मिली कुछ चीजों की गहन जांच में जहर का पता चला. यह जहर रूस में प्राकृतिक रूप से नहीं मिलता है.
2. Epibatidine नाम का जहर दक्षिण अमेरिका के जंगलों में पाए जाने वाले डार्ट मेंढकों में प्राकृतिक रूप से मिलता है. हालांकि अगर डार्ट मेंढक को अलग रखा जाए तो ये जहर नहीं बना पाते हैं. ऐसे में सवाल यह है कि मेंढक के पेट में जहर बनता है?
3. डार्ट मेंढक सामान्य तौर पर रंगीन दिखते हैं और ये खुद जहरीले नहीं होते हैं बल्कि जहरीली चीज खाने के बाद वो जहर इनके शरीर में पड़ा रहता है. हां, जंगल में एल्कलॉइड से भरपूर शिकार जैसे शतपाद (Centipedes), चींटी, कीड़े और घुन खाकर जहर अपने शरीर में इकट्ठा करते हैं.
4. ये टॉक्सिन स्किन ग्लैंड्स में जमा होते जाते हैं और शिकारियों से रक्षा करने के लिए मेंढक इससे अटैक करते हैं.
5. रोचक बात यह है कि अगर इन मेंढकों को कैद में रखकर नियंत्रित और संतुलित डाइट दी जाए तो उनके भीतर का जहर कम हो जाता है.
6. ये डार्ट मेंढक शिकारियों से अलग तरीके से रक्षा करते हैं. इनकी ऊपरी स्किन पर दानेदार ग्लैंड्स टॉक्सिन निकालते हैं, जिससे मेंढक की सतह अगर शिकारियों के संपर्क में आ जाए या वे इन्हें खा ले तो मर सकते हैं.
7. कई एक्सपर्ट जब शोध के लिए इन मेंढकों को हाथ में लेते हैं तो पूरी एहतियात के साथ ग्लव्स पहने रहते हैं. नीचे वीडियो देखिए.
8. सवाल उठता है कि जब जहर बाहर से आता है तो ये खुद जिंदा कैसे रहते हैं? दरअसल इन मेंढकों में खास तरह की प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है. एक ‘टॉक्सिन स्पंज’ प्रोटीन होता है जो टॉक्सिन से जुड़ जाता है, जिससे जहरीला होने से बच जाते हैं.
9. मेंढक से तैयार होने वाला जहर सीधे नर्व सेल्स पर अटैक करता है. इससे तुरंत मांसपेशियों में सिकुड़न, सुन्नपन, दौरे आना, सांस लेने में दिक्कत और ज्यादा डोज दिया गया तो इंसान की 10-20 मिनट के अंदर मौत हो सकती है.
10 . इतने जहरीले मेंढक में जहर है, ये कैसे पता चला? दरअसल, आदिवासी कबीले पहले से ही अपने बाणों के नुकीले हिस्से पर इस जहर का इस्तेमाल करते रहे हैं. एक बार जहर लग जाए तो बाण एक साल तक जहरीला रहता है.
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