खाड़ी में तनाव अब हद पार कर रहा है. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्ला अली खामनेई ने 17 फरवरी को ट्रंप को सीधे चुनौती दी. बोले, “दुनिया की सबसे ताकतवर फौज को भी ऐसा थप्पड़ लग सकता है कि वो दोबारा न उठ सके.” फिर अमेरिकी युद्धपोतों पर तंज कसते हुए कहा, “अमेरिका बार-बार कहता है कि हमने ईरान की तरफ युद्धपोत भेजा है. हां, युद्धपोत खतरनाक है, लेकिन उससे ज्यादा खतरनाक वो हथियार है जो इसे समंदर की तलहटी में दफना सकता है.” ये धमकी इसलिए और गंभीर लग रही है क्योंकि ट्रंप ने USS Gerald R Ford – दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर सुपरकैरियर को इलाके में भेज दिया है. ये जहाज USS Abraham Lincoln के साथ मिलकर अमेरिकी ताकत बढ़ा रहा है. 

खामनेई का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को लेकर तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है. एक तरफ जेनेवा में न्यूक्लियर टॉक्स चल रहे हैं, लेकिन दोनों तरफ से तीखी बयानबाजी. ईरान ने Strait of Hormuz में लाइव फायर ड्रिल्स भी कीं, जो अमेरिका को चेतावनी जैसी हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सच में ईरान के पास इतनी ताकत है. समझते हैं पूरी बात.

आखिर कितना ताकतवर है USS Gerald R. Ford?
ये कैरियर कोई साधारण जहाज नहीं, 1 लाख टन का भारीभरकम अमेरिकी नौसेना का सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत माना जाता है. है. यह सुपरकैरियर परमाणु ऊर्जा से चलता है और लंबे समय तक समुद्र में ऑपरेशन करने में सक्षम है. सालों की हाई-टेक इंजीनियरिंग से बना हुआ है. इसमें दर्जनों वाटरटाइट सेक्शन हैं. मतलब अगर कहीं छेद हो तो पूरा जहाज नहीं डूबेगा.  2021 में अमेरिकी नेवी ने शॉक टेस्ट किए, जहां पानी के नीचे हजारों पाउंड विस्फोटक फोड़े गए. जहाज डिगा नहीं, कोई बड़ा डैमेज नहीं हुआ. डिफेंस एक्सपर्ट्स कहते हैं कि एक-दो मिसाइल से इसे डुबाना नामुमकिन है. क्रू मेंबर आग बुझाने, पानी रोकने में माहिर हैं. लेकिन अगर कई जगहों पर हमला हो जैसे गोला-बारूद या फ्यूल स्टोरेज – तो जहाज की लड़ने की ताकत कम हो सकती है.

Add Zee News as a Preferred Source

क्या एक मिसाइल से डूब सकता है इतना बड़ा जहाज?
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी फिल्मी सीन की तरह एक मिसाइल से सुपरकैरियर डूब जाना लगभग असंभव है. इतना विशाल जहाज तुरंत नहीं डूबता. हालांकि, हमला होने पर उड़ान संचालन रुक सकता है या जहाज को अस्थायी नुकसान पहुंच सकता है. लेकिन पूरी तरह डुबाने के लिए कई जगहों पर लगातार और बेहद सटीक हमले जरूरी होंगे.

ईरान की रणनीति और मिसाइल ताकत
ईरान ने पिछले वर्षों में मिसाइल, ड्रोन और समुद्री माइंस पर भारी निवेश किया है. उसकी रणनीति खास तौर पर Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री रास्तों में दुश्मन की गतिविधियां सीमित करने पर आधारित है. लेकिन खुले समुद्र में तेजी से चल रहे कैरियर को ट्रैक करना और सटीक निशाना लगाना बेहद कठिन सैन्य चुनौती माना जाता है.

असली खतरा: सामूहिक हमला
विशेषज्ञों के मुताबिक असली खतरा एक मिसाइल नहीं बल्कि दर्जनों मिसाइलों और ड्रोन के संयुक्त हमले से हो सकता है. इसे “सैचुरेशन अटैक” कहा जाता है, जिसमें सुरक्षा सिस्टम पर एक साथ दबाव बनाया जाता है.

सुपरकैरियर की सुरक्षा दीवार
अमेरिकी सुपरकैरियर अकेला नहीं चलता. इसके साथ पूरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप होता है, जिसमें मिसाइल डिफेंस सिस्टम वाले युद्धपोत, पनडुब्बियां और एडवांस रडार शामिल होते हैं. यह बहुस्तरीय सुरक्षा किसी भी हमले को रोकने के लिए बनाई गई है.

बयान ज्यादा, हकीकत अलग
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि Ford-class सुपरकैरियर को पूरी तरह डुबाना किसी भी देश के लिए बेहद कठिन और बड़े स्तर के सैन्य अभियान जैसा होगा. इसलिए खामनेई का बयान रणनीतिक दबाव और शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है. 

तनाव क्यों बढ़ रहा?
ट्रंप ने कहा है कि अगर न्यूक्लियर डील नहीं हुई तो मिलिट्री ऑप्शन खुले हैं. कैरियर भेजना इसी का हिस्सा है. लेकिन खामनेई की धमकी से अमेरिकी नेवी हाई अलर्ट पर है. दोनों तरफ प्रॉक्सी वॉर चल रहे हैं, लेकिन डायरेक्ट क्लैश से बड़ा संकट हो सकता है. फिलहाल, जेनेवा टॉक्स में प्रोग्रेस की खबरें हैं, लेकिन धमकियां जारी हैं. कुल मिलाकर, खामनेई की बातें डराने वाली हैं, लेकिन USS Gerald R Ford को समंदर में दफनाना अभी दूर की कौड़ी लगती है. देखते हैं आगे क्या होता है.