Russia News: दुनियाभर में सोने और चांदी को लेकर हलचल मची है. कभी दाम तेजी से बढ़ रहे हैं तो कभी कम हो रहे हैं जिससे दुकानदारों और ग्राहकों दोनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन रूस में सोने-चांदी नहीं किसी और ही वजह से हलचली मची है. इसका दाम इतनी तेजी के साथ बढ़ रहा है कि लोग हैरान-परेशान हो गए हैं. गुस्साए लोगों ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है और इसकी तुलना लग्जरी चीजों से करने लगे हैं.
तेजी से बढ़ रहे हैं दाम
इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक रूस में खीरे के दाम आसमान छू रहे हैं और दिसंबर से दोगुने होकर लगभग 300 रूबल (Rs 356) प्रति kg हो गए हैं. कुछ तो इससे दो या तीन गुना ज्यादा दाम पर बिक रहे हैं. रूस के लोगों ने खीरे की तुलना लग्जरी चीज़ों से करने के लिए डार्क ह्यूमर का इस्तेमाल किया है. सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर करते हुए एक यूजर्स ने सलिखा कि एक समय अंडे सुनहरे होते थे लेकिन अब खीरे सुनहरे हैं.
The price of cucumbers in Moscow, Russia is just insane right now pic.twitter.com/vXtfU4CLOs
February 9, 2026
मीट से भी हुए महंगे
फोर्ब्स रूस ने बताया कि फरवरी की शुरुआत तक, खीरे असल में मीट जितने महंगे हो गए थे, कई सुपरमार्केट में, खीरे की कीमत मीट और केले जैसे बाहर से आने वाले फलों के बराबर या उनसे भी ज्यादा हो गई है. ये मुद्दा मार्केट से निकलकर सियासत में पहुंच गया है. जस्ट रशिया पार्टी के लीडर सर्गेई मिरोनोव ने सरकार के सीजनल फैक्टर्स वाले बहाने की आलोचना करते हुए कहा कि लोगों को बेसिक खाने के लिए भी मुश्किल हो रही है, यह मंजूर नहीं है.
सियासी मुद्दा बना खीरा
मिरोनोव ने पूछा कि इस सर्दी में, हमारी दुकानों में एक नई ‘खास चीज’ आई है वो है खीरे, उन्होंने पिछले साल के ‘सुनहरे’ आलू के लिए भी यही वजह बताई थी औ अब ‘सोने के’ खीरे के लिए, लोग क्या करें? बस यह मान लें कि वे सबसे बेसिक खाना भी नहीं खरीद सकते? इस बीच, एंटीमोनोपॉली रेगुलेटर ने किसानों और ग्रोसरी चेन से कीमतों में बढ़ोतरी के बारे में बताने को कहा है.
कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी
रूस और यूक्रेन के बीच सालों से युद्ध चल रहा है. इसकी वजह से काफी ज्यादा नुकसान हो रहा है. रूस के मिलिट्री पर फोकस करने वाली इकॉनमी की ओर बढ़ने से नॉन-मिलिट्री सेक्टर्स में कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, पहले भारी सब्सिडी से ग्रीनहाउस इंडस्ट्री को बढ़ावा मिला, लेकिन युद्ध और उसके बाद की ड्राफ्टिंग से लेबर की बहुत ज्यादा कमी हो गई है, 1 जनवरी, 2026 से वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) में 20% से 22% की बढ़ोतरी ने कंज्यूमर कीमतों पर और दबाव डाला है. मौजूदा कीमतों में उछाल आम सीजनैलिटी के उतार-चढ़ाव से कहीं ज्यादा है. रिटेलर्स को उम्मीद है कि अगले महीने मौसम गर्म होने पर खीरे की कीमतें कम हो जाएंगी.
