दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच बढ़ते तनाव के बीच हिंद महासागर का एक छोटा सा द्वीप अचानक सुर्खियों में आ गया है. डिएगो गार्सिया नाम का यह सैन्य अड्डा अब अमेरिका-ईरान तनाव के कारण वैश्विक रणनीति का केंद्र बन चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ब्रिटेन को साफ चेतावनी देते हुए कहा है कि इस इलाके पर नियंत्रण छोड़ना पश्चिमी देशों की सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम बन सकता है. ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है जब खबरें हैं कि ब्रिटेन चागोस द्वीप समूह को लेकर नए समझौते पर आगे बढ़ रहा है, जिसके तहत इस क्षेत्र की संप्रभुता से जुड़ा फैसला बदल सकता है. यही बात वॉशिंगटन की चिंता बढ़ा रही है. दूसरी तरफ ईरान से अमेरिका के रिश्ते बहुत नाजुक हो रहे हैं. तो आइए समझते हैं डिएगो गार्सिया की कहानी.
डिएगो गार्सिया एक छोटा सा द्वीप, हिंद महासागर के बीचों बीच में बसा
डिएगो गार्सिया वो छोटा-सा द्वीप है, जो हिंद महासागर के बीचों-बीच बसा है, लेकिन इसकी ताकत इतनी बड़ी है कि अमेरिका इसे अपनी “फ्रीडम का फुटप्रिंट” कहता है. ये द्वीप चागोस आर्किपेलागो का सबसे बड़ा हिस्सा है, और यहां यूएस-यूके का जॉइंट मिलिट्री बेस है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और सीक्रेट बेस में से एक माना जाता है. ट्रंप इसी वजह से भड़क गए हैं, क्योंकि ब्रिटेन अब इसकी संप्रभुता (सॉवरेन्टी) मॉरीशस को सौंपने जा रहा है, और सिर्फ 99-100 साल की लीज पर बेस रखेगा. ट्रंप कह रहे हैं कि ये बड़ी गलती है, खासकर जब ईरान से टेंशन पीक पर है. क्योंकि ईरान डील नहीं मानी तो अमेरिका इसी बेस से हमला कर सकता है.
डिएगो गार्सिया कैसा दिखता है?
ये द्वीप हिंद महासागर के सेंटर में है, भूमध्य रेखा से थोड़ा नीचे. आसपास कोई बड़ा लैंड नहीं है, जो तंजानिया से करीब 3500 किमी, मालदीव से 700 किमी, भारत से 1800 किमी दूर है. ये एक कोरल एटॉल है, जो घोड़े की नाल जैसा दिखता है. जिसकी लंबाई करीब 38 किमी, चौड़ाई 22 किमी, कुल एरिया सिर्फ 30 वर्ग किमी है. चारों तरफ नीला पानी, सफेद रेत, लेकिन आम आदमी के लिए एंट्री बैन. यहां सिर्फ मिलिट्री पर्सनल और सपोर्ट स्टाफ रहते हैं. कोई लोकल पॉपुलेशन नहीं, क्योंकि 1970 के दशक में ब्रिटेन ने मूल निवासियों (चागोसियन) को जबरन हटा दिया था ताकि बेस बन सके.
डिएगो गार्सिया क्यों है ये इतना खास? अमेरिका के लिए “लाइफलाइन”
डिएगो गार्सिया की लोकेशन ऐसी है कि ये मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, साउथ एशिया और इंडो-पैसिफिक सबको कवर करता है. यहां लंबी रनवे हैं, जहां B-2 स्पिरिट (स्टेल्थ बॉम्बर), B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस, B-1 लैंसर जैसे हैवी बॉम्बर्स उतर सकते हैं. डीप वॉटर पोर्ट, फ्यूल स्टोरेज, रिफ्यूलिंग टैंकर, सर्विलांस सिस्टम. सब कुछ है. ईरान से 3000-4000 किमी दूर होने की वजह से अमेरिकी बॉम्बर्स यहां से उड़कर ईरान पर अटैक कर सकते हैं और वापस आ सकते हैं बिना रिफ्यूलिंग के (खासकर स्टेल्थ वाले). ईरान के मिसाइल या ड्रोन की रेंज से भी बाहर है, तो सेफ है. पिछले सालों में यहां से इराक, अफगानिस्तान, यमन (हूती) ऑपरेशंस सपोर्ट हुए. 2025 में ईरान न्यूक्लियर साइट्स पर अटैक से पहले B-2 बॉम्बर्स यहां डिप्लॉय किए गए थे. ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा कि अगर ईरान डील नहीं करता, तो “डिएगो गार्सिया से हमला करके उस अस्थिर रिजीम के अटैक को खत्म करना पड़ सकता है” जो यूके और दूसरे दोस्त देशों पर हो सकता है.
ब्रिटेन क्यों “बेच” रहा है? और ट्रंप क्यों भड़के?
ब्रिटेन ने 2025 में मॉरीशस के साथ डील की है कि चागोस द्वीपों की सॉवरेन्टी मॉरीशस को लेकिन डिएगो गार्सिया पर 99 साल की लीज (एक्सटेंडेबल) ब्रिटेन को मिलेगा. यूके हर साल मॉरीशस को करोड़ों पाउंड देगा. ये डील इंटरनेशनल कोर्ट और यूएन के दबाव में आई, क्योंकि चागोसियन लोगों का हक था. अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने 18 फरवरी 2026 को इसे सपोर्ट किया, लेकिन ट्रंप अलग स्टैंड पर हैं. उन्होंने स्टारमर को “बड़ी गलती” कहा, लीज को “कमजोर” बताया, और कहा कि कंट्रोल खोने से बेस पर खतरा आ सकता है. ट्रंप पहले इसे “मूर्खता” कह चुके थे, फिर स्टारमर से बात के बाद “बेस्ट डील” बताया, लेकिन अब फिर यू-टर्न लेकर हमला बोल दिया है. ट्रंप की चिंता जायज लगती है क्योंकि अगर फ्यूचर में कोई इश्यू आया (जैसे मॉरीशस बदल जाए या चीन का इन्फ्लुएंस बढ़े), तो बेस का यूज मुश्किल हो सकता है.
US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट किया, “मैं यूनाइटेड किंगडम के प्राइम मिनिस्टर कीर स्टारमर से कह रहा हूं कि जब देशों की बात आती है तो लीज़ अच्छी नहीं होतीं और वह डिएगो गार्सिया पर अधिकार, टाइटल और इंटरेस्ट का “दावा” करने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ 100 साल की लीज़ पर साइन… pic.twitter.com/mNc5BcNoV2
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 18, 2026
इसी बेस से अमेरिका मचा सकता है तांडव?
ईरान टेंशन में ये बेस अमेरिका का सबसे बड़ा हथियार है, जहां से अमेरिका का तांडव मचाया जा सकता है बिना किसी लोकल गवर्नमेंट की परमिशन के. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे क्या होगा. डील अभी रैटिफाई होने वाली है, ब्रिटिश संसद में बिल पास हो रहा है. ट्रंप का पोस्ट यूके-अमेरिका रिश्तों में थोड़ी टेंशन दिखा रहा है, लेकिन ऑफिशियल तौर पर अमेरिका सपोर्ट कर रहा है. दुनिया भर में चर्चा है कि हिंद महासागर अब नई जंग का सेंटर बन सकता है. डिएगो गार्सिया सिर्फ एक द्वीप नहीं. ये पावर प्रोजेक्शन का सिंबल है, और ट्रंप नहीं चाहते कि ब्रिटेन इसे “हाथ से जाने” दे
