Trump offer US hospital ship to Greenland: ट्रंप को ग्रीनलैंड चाहिए, ये बात पूरी दुनिया को पता है. जिसको लेकर खूब हल्ला भी मच चुका है. जंग तक बात आ चुकी है. जब ट्रंप किसी भी तरह से ग्रीनलैंड पर कब्जा का प्लान आगे नहीं बढ़ा पाए तो उन्होंने मदद के नाम पर ग्रीनलैंड को ‘हॉस्पिटल बोट’ भेजने की बात कह दी, जिसके बाद से सियासी अटकलें तेज हो गई, लेकिन इसी बीच ग्रीनलैंड ने ट्रंप का ऑफर पूरी तरह ठुकराकर अमेरिकी प्लान को फेल कर दिया है. समझते हैं पूरी बात.

क्या है पूरा मामला?
Al Jazeera में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, आर्कटिक क्षेत्र में स्थित Greenland एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गया है. शनिवार को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट डाली जो देखते ही देखते वायरल हो गई. उन्होंने लिखा ‘लुइसियाना के शानदार गवर्नर जेफ लैंड्री के साथ मिलकर हम ग्रीनलैंड को एक ग्रेट हॉस्पिटल बोट भेज रहे हैं ताकि वहां के बहुत सारे बीमार लोगों का इलाज हो सके, जो नजरअंदाज हो रहे हैं. ये रास्ते में है!!!” पोस्ट में USNS Mercy नाम के अमेरिकी नेवी हॉस्पिटल जहाज की एक इमेज थी, जो AI से बनी लग रही थी. ट्रंप ने ये भी कहा कि ग्रीनलैंड में हेल्थकेयर खराब है. जैसे ही ये पोस्ट सामने आई, हर किसी ने इस पर चर्चा करना शुरू कर दिया. लोगों को लगने लगा ये ट्रंप की चाल है. अपना पूराना मकसद पूरा करना, जिसमें कहा गया है कि नेशनल सिक्योरिटी के नाम पर ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल होना चाहिए.

ग्रीनलैंड ने ठुकराया ऑफर, दिया ट्रंप को करारा जवाब
लेकिन ग्रीनलैंड सरकार ने इस प्रस्ताव को विनम्र लेकिन बेहद स्पष्ट शब्दों में ठुकरा दिया. सरकार का कहना है कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत है और लोगों को इलाज के लिए किसी बाहरी ‘रेस्क्यू मिशन’ की जरूरत नहीं है, रविवार को ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने फेसबुक पर जवाब देते हुए लिखा, ‘प्रेसिडेंट ट्रंप का अमेरिकी हॉस्पिटल शिप भेजने का आइडिया नोट किया गया. लेकिन हमारे यहां से ‘नो थैंक्स’.’ आगे कहा, “हमारे पास पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम है जहां नागरिकों को फ्री इलाज मिलता है. ये हमारा जानबूझकर चुना हुआ रास्ता है.” उन्होंने ट्रंप से अपील की कि सोशल मीडिया पर रैंडम पोस्ट करने की बजाय सीधे बात करें. यानी ग्रीनलैंड का मतलब साफ है कि हमारी सुविधाएं शानदार हैं, आपकी मदद की जरूरत नहीं है.

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डेनमार्क भी आया समर्थन में
ग्रीनलैंड, Denmark के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है. डेनमार्क के रक्षा मंत्री ने भी साफ कहा कि ग्रीनलैंड के लोगों को जरूरी मेडिकल सुविधाएं मिलती हैं. अगर किसी मरीज को विशेष इलाज की जरूरत होती है तो उसे डेनमार्क लाया जाता है. डेनमार्क की प्रधानमंत्री Mette Frederiksen ने भी कहा कि उनके देश में इलाज सभी के लिए बराबरी से उपलब्ध है, चाहे व्यक्ति अमीर हो या गरीब.

कब्जे की चर्चा से बढ़ा विवाद
दरअसल, ट्रंप पहले भी कई बार ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से अहम बता चुके हैं. खनिज संसाधनों और आर्कटिक में इसकी लोकेशन को लेकर अमेरिका की दिलचस्पी जगजाहिर रही है. ट्रंप के हालिया बयान के बाद यूरोप में यह बहस फिर तेज हो गई कि क्या अमेरिका इस इलाके में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है.

NATO फैक्टर और बदलते समीकरण
रिपोर्ट्स के मुताबिक जनवरी में NATO प्रमुख Mark Rutte के साथ बातचीत के बाद अमेरिका का रुख थोड़ा नरम जरूर पड़ा, लेकिन आर्कटिक क्षेत्र को लेकर रणनीतिक खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है.