श्रम और रोजगार मंत्रालय
केन्द्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने नई दिल्ली में श्रम संहिता पर पांचवें क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया
श्रम संहिता के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु केन्द्र और राज्यों को समान भागीदार के रूप में काम करना चाहिए: डॉ. मांडविया
डॉ. मांडविया का कहना है कि भारत के श्रम सुधारों को आईएलओ, आईएसएसए और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों से वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है
प्रविष्टि तिथि: 27 FEB 2026 4:13PM by PIB Delhi
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने आज नई दिल्ली स्थित कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के मुख्यालय में श्रम संहिता तथा अन्य पहलुओं पर राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के पांचवें दो-दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। केन्द्रीय श्रम और रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया और कार्यक्रम में मुख्य भाषण दिया।

इस अवसर पर श्रम और रोजगार मंत्रालय की सचिव सुश्री वंदना गुरनानी, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम, नागालैंड, उत्तराखंड और दिल्ली सहित भाग लेने वाले विभिन्न राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ ईपीएफओ, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी), वीवी गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान (वीवीजीएनएलआई) के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
अपने उद्घाटन भाषण में, केन्द्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के संघीय ढांचे में केन्द्र व राज्य समान भागीदार हैं और श्रम सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था की आकांक्षाओं के अनुरूप देश के श्रम परिदृश्य में व्यापक सुधारों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। उन्होंने बताया कि भारत के श्रम तंत्र को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों, वैश्विक मानकों और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) जैसे संगठनों के दिशानिर्देशों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से चार श्रम संहिताएं 2019 और 2020 में लागू की गईं। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि 21 नवंबर 2025 को इन संहिताओं के लागू होने के बाद श्रमिकों और उद्योग जगत, दोनों ने इनका समान रूप से स्वागत किया है। उन्होंने आगे कहा कि भारत के सुधार संबंधी प्रयासों को आईएलओ और अंतरराष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ (आईएसएसए) जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मान्यता मिली है और द इकोनॉमिस्ट तथा द फाइनेंशियल टाइम्स सहित अग्रणी वैश्विक प्रकाशनों द्वारा भी इनकी सराहना की गई है। इन प्रकाशनों ने श्रमिकों की सुरक्षा को मजबूत करने और सुरक्षित एवं अधिक स्थायी रोजगार के साथ एक आधुनिक कार्यबल के निर्माण हेतु संहिताओं के प्रावधानों को स्वीकार किया है।

क्षेत्रीय सम्मेलन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि यह केन्द्र और राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के बीच समन्वय का एक मंच है और इससे संहिताओं के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु विचारों की एकजुटता और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान संभव होता है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे जहां भी जरूरत हो, विशेष रूप से मजबूत आईटी अवसंरचना के निर्माण में, केन्द्र से सहयोग लें। केन्द्रीय मंत्री ने ई-श्रम पोर्टल को सुदृढ़ बनाने के लिए सुझाव देने हेतु राज्यों का आह्वान किया ताकि देश भर में असंगठित श्रमिकों को लाभ का अधिकतम वितरण संभव हो सके। उन्होंने प्रधानमंत्री विकसित भारत योजना (पीएमवीबीवाई) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह लघु उद्यमों और कर्मचारियों, दोनों को सशक्त बनाने की एक पहल है। उन्होंने केन्द्रीय श्रम आयुक्तों की संरचना और राज्यों के श्रम विभागों को समन्वित कार्यान्वयन के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया।
डॉ. मांडविया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “एक्ट ईस्ट” विजन के अनुरूप औद्योगिक विकास को गति देने, मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र का विस्तार करने और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने में पूर्वोत्तर राज्यों की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दो- दिवसीय विचार-विमर्श केन्द्र और राज्यों के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा। उन्होंने सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं और समावेशी विकास, श्रमिक के कल्याण में सुधार एवं व्यवसाय करने में सुगमता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

अपने संबोधन में, श्रम और रोजगार मंत्रालय की सचिव सुश्री वंदना गुरनानी ने दस प्रतिभागी राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों का स्वागत किया और इस दो-दिवसीय सम्मेलन के ढांचे और प्रमुख उद्देश्यों का व्यापक विवरण पेश किया। 21 नवंबर को श्रम सुधारों की यात्रा में एक ऐतिहासिक मोड़ बताते हुए, उन्होंने कहा कि पिछले पांच क्षेत्रीय सम्मेलनों में हुई चर्चाएं बेहद फलदायी रही हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये श्रम संहिताएं श्रमिकों के कल्याण को मजबूत करने और व्यवसायों के अनुपालन की लागत को कम करने के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का लक्ष्य रखती हैं। उन्होंने न्यूनतम मजदूरी एवं सामाजिक सुरक्षा का सार्वभौमीकरण, नियुक्ति पत्रों को अनिवार्य रूप से जारी करना और श्रमिकों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जांच जैसे श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगे कहा कि कार्य जगत में हो रहे बदलावों और समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप, ये संहिताएं उद्योगों के लिए अधिक लचीलापन और पूर्वानुमानशीलता सुनिश्चित करेंगी।
सचिव ने प्रतिभागी राज्यों से चारों श्रम संहिताओं के अंतर्गत नियमों का सक्रिय रूप से मूल्यांकन करने तथा अंतिम रूप देने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि अनुपालन संबंधी जरूरतों और संबंधित प्रावधानों को सरल भाषा में स्पष्ट रूप से समझाने हेतु एक व्यापक अनुपालन पुस्तिका तैयार कर जारी की गई है, ताकि उद्योगों को इनकी बेहतर समझ हो सके। इसके साथ ही, सभी हितधारकों के संदर्भ के लिए अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) की एक विस्तृत सूची भी उपलब्ध कराई गई है। इन संहिताओं के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु तकनीक के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने बताया कि केन्द्र के स्तर पर एक मजबूत आईटी प्रणाली स्थापित की जा रही है और इसे राज्यों को भी उपलब्ध कराया जाएगा ताकि श्रमिकों और उद्योगों के लिए सुचारू एवं पारदर्शी शासन व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
सुश्री गुरनानी ने राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों से पारस्परिक ज्ञानवर्धन की भावना से चर्चा में भाग लेने का आह्वान किया और अपने संबोधन का समापन इस बात पर जोर देते हुए किया कि सरकार विशेष रूप से अपने अधीन संविदा श्रमिकों के संबंध में एक आदर्श नियोक्ता के रूप में उभरे।

उद्घाटन सत्र के बाद मंत्रालय और राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा श्रम संहिताओं के तहत नियमों को अंतिम रूप देने के कार्य में हुई प्रगति और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी तैयारियों की स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। यह सम्मेलन नियमों एवं विनियमों पर विचार-विमर्श करने, कमियों एवं मतभेदों की पहचान करने, वैधानिक अधिसूचनाओं को शीघ्रता से जारी करने और संहिताओं के तहत परिकल्पित बोर्डों, निधियों एवं अन्य संस्थागत तंत्रों की स्थापना पर चर्चा करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। इसने चारों श्रम संहिताओं के तहत प्रस्तावित योजनाओं पर परामर्श करने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक डिजिटल प्लेटफार्मों पर केन्द्रित चर्चा का अवसर भी प्रदान किया। इसके अलावा, सम्मेलन में जमीनी स्तर के अधिकारियों के क्षमता विकास और राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों तथा अन्य हितधारकों के बीच श्रम संहिताओं के उद्देश्यों, संरचना एवं कार्यान्वयन की रूपरेखा के बारे में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया।
Chaired the 5th Regional Conference of Labour & Employment and Industry Secretaries of States/UTs today.
By viewing industry and workers as equal stakeholders and enhancing Centre–State synergy, we are advancing reforms that make Bharat more competitive, worker-centric, and… pic.twitter.com/t1n3MaiELT
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) February 27, 2026
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पीके/केसी/आर/डीके
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