उप राष्ट्रपति सचिवालय
भारतीय जनसंचार संस्थान के 57वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति ने कहा, “विकसित भारत के निर्माण के लिए निडर होकर सत्य लिखें”
उपराष्ट्रपति ने कहा, प्रबुद्ध वर्ग सत्य आधारित विमर्श के माध्यम से सशक्त भारत की नींव रखे
एआई, एवीजीसी और क्रिएटर इकोनॉमी स्टोरीटेलिंग के माहौल को फिर से परिभाषित कर रहे हैं: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने कहा, “सत्य के प्रति अपना विश्वास अडिग रखें, फिर आपको कोई पराजित नहीं कर सकता”
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन के दौरान वरिष्ठ पत्रकार ए. एन. शिवरामन के योगदान को याद किया, छात्रों से उनकी सामाजिक सरोकार वाली पत्रकारिता से प्रेरणा लेने का आह्वान किया
शब्दों के परिणाम, छवियों के प्रभाव और विमर्श की शक्ति सोच को प्रभावित करती है: उपराष्ट्रपति
प्रविष्टि तिथि: 27 FEB 2026 8:32PM by PIB Delhi
उपराष्ट्रपति, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
Vice President Shri C. P. Radhakrishnan graced the 57th Convocation of Indian Institute of Mass Communication (IIMC) in New Delhi today.
Addressing the graduates, the Vice President said that journalism and mass communication will play a key role in the country’s journey… pic.twitter.com/lfSSwlJyBE
— Vice-President of India (@VPIndia) February 27, 2026
स्नातक होने वाले छात्रों को हार्दिक बधाई देते हुए, उपराष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि आईआईएमसी की स्थापना लगभग छह दशक पहले हुई थी और तब से इसने पत्रकारों और कम्युनिकेशन प्रोफेशनल्स की ऐसी पीढ़ियां तैयार की हैं, जिन्होंने विशिष्टता के साथ भारत के लोकतंत्र और सार्वजनिक जीवन में अपनी सेवाएं दी हैं।
जनवरी 2024 में आईआईएमसी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्थान देश के अग्रणी जनसंचार संस्थान के रूप में अपनी विरासत को निरंतर आगे बढ़ाता रहेगा। उन्होंने मीडिया नवाचार और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिए कैंपस इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की भी सराहना की।
मीडिया परिदृश्य में हो रहे बदलावों पर विचार करते हुए, उपराष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, इमर्सिव स्टोरीटेलिंग और सोशल प्लेटफॉर्म्स ने कहानियों के सृजन और उन्हें देखने व पढ़ने के तरीके को बदल दिया है। उन्होंने एवीजीसी क्षेत्र—एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स—और व्यापक क्रिएटर इकोनॉमी के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, सरकार ने विश्व स्तरीय प्रतिभा और नवाचार को पोषित करने के लिए नेशनल एवीजीसी-एक्सआर मिशन और सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस जैसी पहल शुरू की हैं। उन्होंने इच्छुक छात्रों को संसद टीवी के साथ इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट के अवसरों को तलाशने के लिए भी आमंत्रित किया।
लेखनी की शक्ति पर जोर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रबुद्ध वर्ग विशुद्ध रूप से सत्य पर आधारित सही और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाकर राष्ट्र का नेतृत्व कर सकते हैं। उन्होंने ग्रेजुएट हो रहे विद्यार्थियों से कहा, “निर्भीक होकर सत्य लिखें और आप विकसित भारत का निर्माण करेंगे।” उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे रेटिंग या शॉर्टकट के पीछे न भागें, बल्कि अपने लेखन की शुद्धता और ईमानदारी को आधार बनाएँ। दिनमणि के पूर्व संपादक और दिग्गज पत्रकार ए.एन. शिवरामन के प्रति अपने सम्मान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक रूप से जागरूक और सूचनात्मक पत्रकारिता नेतृत्व को आकार दे सकती है और नए लीडर्स बना सकती है।
डिजिटल युग की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि जहाँ सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति के रास्तों का विस्तार किया है, वहीं इसने भ्रामक सूचनाओं और पोलराइजेशन को भी बढ़ावा दिया है, जो समाज के लिए एक गंभीर खतरा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शब्दों के परिणाम होते हैं, छवियाँ धारणाएँ बनाती हैं और विमर्श विचारों को प्रभावित करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि जमीनी स्तर पर राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के साथ-साथ, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैल रही भ्रामक खबरों और मनगढ़ंत विमर्श के खिलाफ भी उतनी ही महत्वपूर्ण लड़ाई लड़ी जा रही थी। उन्होंने पत्रकारों से समाज में सकारात्मक बदलाव के दूत के रूप में कार्य करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि उनका लेखन राष्ट्रीय सुरक्षा अभियानों के दौरान सशस्त्र बलों के मनोबल का समर्थन करे।
भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विस्तार लेते डिजिटल इकोसिस्टम और बढ़ते वैश्विक प्रभाव का अवलोकन करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दूरियां मिटाने और एक जागरूक नागरिकता को बढ़ावा देने में कम्युनिकेटर्स की निर्णायक भूमिका होगी। उन्होंने मीडिया संस्थानों से अपनी अपील दोहराते हुए कहा कि वे आर्थिक विकास, नवाचार और राष्ट्रीय प्रगति की सकारात्मक कहानियों को विशेष स्थान दें। उन्होंने कहा कि संतुलित पत्रकारिता को चुनौतियों के साथ-साथ उपलब्धियों पर भी प्रकाश डालना चाहिए। विज्ञापन और जनसंपर्क के छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रचनात्मकता का उपयोग ईमानदारी और उद्देश्य के साथ परिवर्तन के माध्यम के रूप में किया जाना चाहिए।
अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने कहा कि जहाँ एक ओर तकनीक और प्लेटफॉर्म विकसित होते रहेंगे, वहीं पत्रकारिता के मूल मूल्य—सटीकता, निष्पक्षता और जवाबदेही—हमेशा बनी रहनी चाहिए। उन्होंने ग्रेजुएट हो रहे छात्रों को सत्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग रहने का आह्वान करते हुए कहा, “यदि आप सत्य के प्रति अपना विश्वास अडिग रखें, तो कोई भी आपको पराजित नहीं कर सकता।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये छात्र एक जागरूक, मजबूत और विकसित भारत के निर्माण में सार्थक योगदान देंगे।
उपराष्ट्रपति ने आईआईएमसी, नई दिल्ली के नए शैक्षणिक ब्लॉक और छात्रावास की आधारशिला भी रखी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये नई सुविधाएँ डिजिटल लैब, एआई बेस्ड लर्निंग, डेटा पत्रकारिता और आधुनिक स्टूडियो को सुदृढ़ करेंगी, जिससे छात्र केवल तकनीक का अनुसरण करने के बजाय नवाचार का नेतृत्व करने में सक्षम बनेंगे।
Vice President Shri C. P. Radhakrishnan laid the foundation stone for the new academic block and hostel of Indian Institute of Mass Communication (IIMC) in New Delhi today.
Union Minister and Chancellor of IIMC, Shri Ashwini Vaishnaw; Vice Chancellor of IIMC, Dr. Pragya Paliwal… pic.twitter.com/Ldi1b2JGMu
— Vice-President of India (@VPIndia) February 27, 2026
इस दीक्षांत समारोह में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण, रेल और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री तथा आईआईएमसी के कुलाधिपति, श्री अश्विनी वैष्णव; आईआईएमसी की कुलपति, डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़; आईआईएमसी सोसाइटी के अध्यक्ष, श्री राघवन जगन्नाथन; वरिष्ठ संकाय सदस्य, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी और ग्रेजुएट हो रहे छात्रों के परिवारजन उपस्थित रहे।
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