रेल मंत्रालय
भारतीय रेल आम आदमी और मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं की आधुनिक, सुरक्षित और सुगम सवारी – संसद में केंद्रीय रेल मंत्री
सरकार किफायती दरों पर यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाकर गरीब से गरीब व्यक्ति की सेवा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध
भारतीय रेलवे का ‘धीमी प्रगति’ से ‘सुपर-फास्ट परिवर्तन’ की ओर कदम, एक नए युग का सूत्रपात: केंद्रीय रेल मंत्री
लगभग 1,37,000 किलोमीटर के रेल मार्ग और 25,500 से अधिक ट्रेनों के विशाल नेटवर्क के साथ, भारतीय रेलवे देश के एक कोने से दूसरे कोने तक यात्रियों के आवागमन और माल ढुलाई को सुगम बनाकर लोगों को रोजगार से जोड़ने और अर्थव्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है
अधिक नॉन-एसी कोच के साथ भारतीय रेलवे आम नागरिकों की जरूरतों को दे रही प्राथमिकता: केंद्रीय रेल मंत्री, श्री अश्विनी वैष्णव
भारत सरकार देश में भारी सब्सिडी वाली रेल यात्रा प्रदान कर रही है, सरकार प्रत्येक यात्री टिकट की लागत का 45 प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन करती है, जिससे आधुनिक यात्रा अनुभव सुनिश्चित होने के बावजूद यहाँ का किराया पड़ोसी देशों और विकसित देशों की तुलना में काफी कम है
कम दूरी की यात्रा को सुगम बनाने के लिए 200 नई इंटरसिटी ट्रेनें और मुंबई हेतु स्वचालित दरवाजों वाली 238 नई उपनगरीय ट्रेनें जल्द शुरू की जाएंगी
पिछले 10 वर्षों में 5 लाख नौकरियों और बीते 2 वर्षों में 1.43 लाख सीधी नियुक्तियों के अलावा, रेलवे की विभिन्न परियोजनाएं लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित कर रही हैं
स्टेशन पर बेहतर सुविधाएं और तकनीक-आधारित रखरखाव पद्धतियां भारत में यात्रा के अनुभव को नया आयाम दे रही हैं
प्रविष्टि तिथि: 17 MAR 2026 9:49PM by PIB Delhi
भारतीय रेलवे वर्तमान में अभूतपूर्व विस्तार और आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है, जिसे केंद्रीय बजट 2026-27 में ₹2.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड बजटीय आवंटन से सशक्त बनाया गया है। रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों (2026-27) पर संसद में हुई चर्चा का जवाब देते हुए, रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज रेखांकित किया कि रेलवे में एक प्रमुख संरचनात्मक सुधार रेल बजट का आम बजट में विलय था, जिसके परिणामस्वरूप तीन प्रमुख लाभ हुए हैं। उन्होंने भारतीय रेल के वर्तमान रूपांतरण को ‘धीमी प्रगति’ से ‘सुपर-फास्ट ट्रांसफॉर्मेशन’ की ओर एक बड़े बदलाव के रूप में वर्णित किया, जो इस राष्ट्रीय परिवहन सेवा के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।
सबसे पहले, इसने बजटीय सहायता में व्यापक वृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया है, जो पहले के लगभग ₹25,000–30,000 करोड़ से बढ़कर वर्तमान वित्तीय वर्ष में लगभग ₹2.78 लाख करोड़ हो गई है। दूसरा, इसने वर्ष भर निरंतर निर्णय लेने और आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करने की प्रक्रिया को सुगम बनाया है, जिसमें परियोजनाओं की मंजूरी, नई सेवाओं की शुरुआत और आधुनिक तकनीक को अपनाना शामिल है। तीसरा, इससे प्रणाली में बेहतर पारदर्शिता और संस्थागत निगरानी आई है, जहाँ अब परियोजनाओं की समीक्षा वित्त मंत्रालय और नीति आयोग से जुड़ी प्रणालियों के माध्यम से की जा रही है।
रेलवे की फाइनेंशियल हेल्थ माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में इन 10 वर्षों में बहुत सुधरी है:माननीय रेल मंत्री @AshwiniVaishnaw जी pic.twitter.com/eM4DCKhiVz
— Ministry of Railways (@RailMinIndia) March 17, 2026
ऐतिहासिक बजटीय आवंटन और रेलवे की मजबूत वित्तीय स्थिति
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय रेलवे के लिए रिकॉर्ड आवंटन किया गया है, जो देश भर के सभी राज्यों को लाभान्वित कर रहा है और बुनियादी ढांचे के त्वरित विकास को गति दे रहा है।
रेलवे को जो रिकॉर्ड बजट एलोकेशन हुआ है 2 लाख 78 हजार करोड़ रुपए का, उसका लाभ करीब-करीब हर राज्य को मिलेगा :माननीय रेल मंत्री @AshwiniVaishnaw जी pic.twitter.com/yBFiAqiBaL
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श्री वैष्णव ने स्पष्ट किया कि रेलवे के प्रमुख व्यय मदों में लगभग ₹1.19 लाख करोड़ का कार्मिक व्यय, करीब ₹64,000 करोड़ का पेंशन व्यय, लगभग ₹32,000 करोड़ की ऊर्जा लागत और लगभग ₹23,000 करोड़ की वित्त लागत शामिल है। इन भारी खर्चों के बावजूद, रेलवे निरंतर सकारात्मक संतुलन बनाए हुए है।
उन्होंने आगे उल्लेख किया कि रेल विद्युतीकरण के परिणामस्वरूप लगभग ₹6,000 करोड़ की बचत हुई है और विद्युतीकरण के बढ़ते दायरे के कारण डीजल की खपत में भी निरंतर गिरावट आ रही है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और क्षमता में वृद्धि
श्री वैष्णव ने पिछले एक दशक में रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर में हुए महत्वपूर्ण विस्तार पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि माल ढुलाई 2013-14 के लगभग 1,055 मिलियन टन से बढ़कर अब लगभग 1,650 मिलियन टन हो गई है, जिससे भारतीय रेलवे वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा माल वाहक बन गया है।
Under the leadership of Prime Minister @narendramodi, Indian Railways has transformed dramatically over the past 10 years
🚉 Cargo volume was 1,055 million tonnes from 2004 to 2013-14. Last year, it hit 1,617 million tonnes, and it’s on track for 1,650 million tonnes by the end… pic.twitter.com/MVgYEnEy4e
— PIB India (@PIB_India) March 17, 2026
रेलवे ट्रैक निर्माण की गति में व्यापक तेजी आई है, जिसके तहत लगभग 35,000 किलोमीटर नई पटरियां बिछाई गई हैं, जबकि इससे पिछली अवधि में यह आंकड़ा लगभग 15,000 किलोमीटर था। विद्युतीकरण के क्षेत्र में भी तीव्र प्रगति देखी गई है, जो लगभग 5,200 किलोमीटर से बढ़कर करीब 47,000 किलोमीटर तक पहुँच गई है। इसके साथ ही भारतीय रेलवे ने 99 प्रतिशत से अधिक नेटवर्क विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है।
सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के संदर्भ में, रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) और रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) की संख्या लगभग 4,000 से बढ़कर करीब 14,000 हो गई है। इसी तरह, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग (स्वचालित सिग्नल प्रणाली) का विस्तार भी लगभग 1,500 किलोमीटर से बढ़कर 4,000 किलोमीटर से अधिक हो गया है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि एलएचबी कोचों की संख्या में, जो कि अधिक सुरक्षित और आधुनिक हैं, उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और हाल के वर्षों में लगभग 48,000 ऐसे कोच जोड़े गए हैं। इसके साथ ही, लोकोमोटिव का उत्पादन बढ़कर लगभग 12,000 यूनिट हो गया है, जबकि वैगन की संख्या 2 लाख यूनिट के आंकड़े को पार कर गई है।
टनल, माल ढुलाई गलियारे (फ्रेट कॉरिडोर) और रणनीतिक संपर्क
श्री वैष्णव ने रेखांकित किया कि टनल निर्माण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है। उन्होंने बताया कि जहाँ 2014 तक लगभग 125 किलोमीटर टनल का निर्माण किया गया था, वहीं उसके बाद 486 किलोमीटर अतिरिक्त टनल बनाई गई हैं। इससे पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में संपर्क में व्यापक सुधार हुआ है।
रेलवे के आरंभ से 2014 तक कुल 125 किलोमीटर टनल बनी थी। 2014 के बाद 486 किलोमीटर टनल बनी है :माननीय रेल मंत्री @AshwiniVaishnaw जी pic.twitter.com/dRRwUNxPtq
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उन्होंने आगे उल्लेख किया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के निर्माण में व्यापक प्रगति हुई है, जिसके तहत लगभग 2,800 किलोमीटर का कार्य पूर्ण हो चुका है और इन कॉरिडोर पर प्रतिदिन लगभग 480 मालगाड़ियाँ संचालित हो रही हैं।
परिचालन दक्षता और रेल नेटवर्क में वृद्धि
श्री वैष्णव ने बताया कि भारतीय रेलवे वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 25,571 ट्रेनों का संचालन करती है, जिससे होली, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान यात्रियों की यात्रा अधिक सुगम और सुविधाजनक सुनिश्चित होती है।
रिकॉर्ड संख्या में 25,571 ट्रेनें डेली चल रही है। जिसका बहुत अच्छा रिजल्ट मिला है : माननीय रेल मंत्री @AshwiniVaishnaw जी pic.twitter.com/9H2WqnedDD
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कुल रेल नेटवर्क विस्तार बढ़कर लगभग 1,37,522 रूट किलोमीटर तक पहुँच गया है, जिसमें निरंतर वार्षिक वृद्धि देखी जा रही है। इसके अतिरिक्त, रेलवे के पास अब लगभग 3.86 लाख वैगन और करीब 98,000 कोच उपलब्ध हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड स्तर है।
सुरक्षा व्यवस्था में सुधार
श्री वैष्णव ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। इसके लिए ट्रैक रखरखाव, रोलिंग स्टॉक के रखरखाव, अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने और प्रशिक्षण पद्धतियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि रेलवे दुर्घटनाओं में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है, जिसे ‘रूट कॉज़ एनालिसिस’ (व्यवस्थित मूल कारण का विश्लेषण) और सुधारात्मक उपायों के माध्यम से संभव बनाया गया है। सुरक्षा में निवेश भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, जिसके तहत सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए लगभग ₹1.2 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं।
सुरक्षा तकनीक पर चर्चा करते हुए, उन्होंने स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच‘ की प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि लगभग 3,000 किलोमीटर के नेटवर्क को पहले ही इसके दायरे में लाया जा चुका है, जबकि करीब 20,000 किलोमीटर पर कार्य प्रगति पर है और लगभग 8,000 रेल इंजनों में इसे लगाने की योजना है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘कवच‘ एक व्यापक सुरक्षा प्रणाली है, जिसमें ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, टेलीकॉम टावर, डेटा सेंटर और ऑनबोर्ड उपकरण शामिल हैं। इसकी जटिलता एक पूर्ण टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के समान है।
यात्री सेवाएँ और सस्ती यात्रा की सुविधा
श्री वैष्णव ने कहा कि रेलवे आम नागरिकों के लिए किफायती यात्रा को प्राथमिकता देना जारी रखे हुए है। लगभग 70 प्रतिशत कोच जनरल और स्लीपर श्रेणी के हैं, जो अधिकांश यात्रियों के लिए सुलभता सुनिश्चित करते हैं।
उन्होंने सूचित किया कि अतिरिक्त जनरल कोच (सामान्य श्रेणी के डिब्बे) शुरू किए गए हैं, जिनमें वर्ष 2024-25 में लगभग 1,250 कोच और 2025-26 में करीब 860 कोच शामिल हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि रेलवे वर्तमान में प्रतिवर्ष लगभग ₹60,000 करोड़ की यात्री सब्सिडी प्रदान कर रही है, जो प्रति यात्री औसतन लगभग 45 प्रतिशत की छूट के बराबर है। इसके अतिरिक्त, मुंबई जैसे उपनगरीय (सबअर्बन) इलाकों में लगभग ₹3,000 करोड़ की अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
देश भर में 60 हजार करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जाती है जो कि बहुत बड़ा कन्सेशन है। करीब 45% कन्सेशन हर एक यात्री को मिल रहा है : माननीय रेल मंत्री @AshwiniVaishnaw जी pic.twitter.com/MlsxJYFReY
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नई रेल सेवाओं की शुरुआत
केंद्रीय मंत्री ने आधुनिक रेल सेवाओं की शुरुआत और उनके विस्तार पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 160 से अधिक वंदे भारत सेवाएं संचालित हैं, साथ ही किफायती लंबी दूरी की यात्रा की सुविधा प्रदान करने वाली 60 अमृत भारत ट्रेन सेवाएं भी अपनी सेवाएं दे रही हैं।
उन्होंने यह भी सूचित किया कि 133 अमृत भारत ट्रेनों का मैन्युफैक्चरिंग कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त, वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें भी शुरू की गई हैं और उनके प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक फीडबैक प्राप्त हुआ है।
133 अमृत भारत ट्रेनों का मैन्युफैक्चरिंग चल रहा है। जो देश के हर गरीब परिवार के लिए बहुत बड़ा वरदान साबित होगा : माननीय रेल मंत्री @AshwiniVaishnaw जी pic.twitter.com/EwVaPlrYYf
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उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे मुंबई के लिए ऑटोमैटिक डोर-क्लोजिंग सिस्टम (स्वचालित द्वार बंद होने की प्रणाली) वाली 238 नई उपनगरीय (सबअर्बन) ट्रेनों और कम दूरी की यात्रा के लिए लगभग 200 नई मेमू ट्रेनों के उत्पादन का कार्य कर रही है, जिन्हें ‘इंटरसिटी’ के नाम से जाना जाएगा।
विशेष रेलगाड़ियाँ और यात्रियों की सुलभता
श्री वैष्णव ने बताया कि पीक सीजन की मांग को पूरा करने के लिए विशेष ट्रेनों के संचालन का व्यापक विस्तार किया गया है। जहाँ पहले प्रतिवर्ष लगभग 2,000-2,500 विशेष ट्रेनें चलाई जाती थीं, वहीं इस बार लोगों की सुविधा के लिए रिकॉर्ड संख्या में विशेष ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।
दिवाली और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान लगभग 12,383 विशेष ट्रेनें संचालित की गईं, जबकि होली के दौरान अब तक 1,500 से अधिक ट्रेनें चलाई जा चुकी हैं।
उन्होंने आगे बताया कि 75 प्रमुख स्टेशनों पर होल्डिंग एरिया (प्रतीक्षा क्षेत्र) विकसित किए जा रहे हैं और यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए 1,200 से अधिक नई ईएमयू/मेमू सेवाएं शुरू की गई हैं।
रेलवे में रोजगार के अवसर और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया
रोजगार के विषय पर श्री वैष्णव ने बताया कि पिछले एक दशक में रेलवे में लगभग 5 लाख नौकरियां प्रदान की गई हैं, जबकि 1.43 लाख भर्तियों की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है।
उन्होंने एक व्यवस्थित वार्षिक भर्ती कैलेंडर की शुरुआत पर प्रकाश डाला, जो पूर्वानुमान और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। रेलवे की भर्ती परीक्षाएं 15 भाषाओं में और 150 शहरों में आयोजित की जा रही हैं, जिनमें लगभग 3.6 करोड़ उम्मीदवारों की भागीदारी देखी गई है।
उन्होंने यह भी सूचित किया कि शिकायतों के त्वरित निवारण और परीक्षाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के लिए एक केंद्रीय निगरानी प्रणाली (वार रूम) स्थापित की गई है।
रेलवे में तकनीक, नवाचार और ‘मेक इन इंडिया’
अपनी बात जारी रखते हुए, श्री अश्विनी वैष्णव ने परिचालन, रखरखाव, बुनियादी ढांचे और यात्री सेवाओं सहित भारतीय रेलवे के सभी क्षेत्रों में तकनीक और ‘मेक इन इंडिया‘ की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने सूचित किया कि जुलाई 2025 में लॉन्च किए गए रेलवन (RailOne) ऐप ने व्यापक लोकप्रियता हासिल की है, जिसके अब तक 2.5 करोड़ से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं और इसके माध्यम से प्रतिदिन लगभग 9.5 लाख टिकटों का सफल ट्रांजैक्शन हो रहा है। यह ऐप आरक्षित और अनारक्षित टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट, ट्रेन पूछताछ, पीएनआर स्थिति और शिकायत निवारण जैसी कई यात्री सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करता है।
मंत्री महोदय ने आगे बताया कि यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) को कई दशकों के बाद व्यापक रूप से आधुनिक बनाया गया है। इस उन्नत प्रणाली को अलग-अलग चरणों में लागू किया जा रहा है और इससे बुकिंग की दक्षता एवं पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, तत्काल बुकिंग प्रणाली में भी सुधार लागू किए गए हैं ताकि ऑटोमेटेड बॉट्स और अनधिकृत सॉफ्टवेयर के माध्यम से होने वाले दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सके, जिसके परिणामस्वरूप वास्तविक उपयोगकर्ताओं के लिए टिकटों की उपलब्धता बेहतर हुई है।
श्री वैष्णव ने वन्यजीव संरक्षण के लिए कैमरों सहित एआई आधारित प्रणालियों की तैनाती और पूरे नेटवर्क में प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस के लिए आईओटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग को भी रेखांकित किया।
‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत, भारतीय रेलवे एक प्रमुख निर्यातक के रूप में उभरा है, जिसके तहत रेलवे निर्यात ₹24,000 करोड़ के पार पहुंच गया है। भारतीय रेल तकनीक और उत्पादों का निर्यात जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों को किया जा रहा है।
स्टेशनों का कायाकल्प और क्षमता में वृद्धि
श्री वैष्णव ने बताया कि भारतीय रेलवे ने वैश्विक स्तर पर स्टेशन पुनर्विकास के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक शुरू किया है, जिसके तहत लगभग 1,300 स्टेशनों को कवर किया जा रहा है। इनमें से लगभग 180 स्टेशनों का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि करीब 500 स्टेशन पूर्ण होने के उन्नत चरण में हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक प्रथाओं के विपरीत, जहाँ पुनर्निर्माण के दौरान स्टेशनों को अक्सर बंद कर दिया जाता है, भारतीय रेलवे निरंतर ट्रेन संचालन को बनाए रखते हुए पुनर्विकास कार्य कर रही है। इससे सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ-साथ यात्रियों को होने वाली असुविधा को न्यूनतम रखा जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, 48 अधिक मांग वाले शहरों में क्षमता विस्तार के कार्य शुरू किए गए हैं, जिनमें अतिरिक्त प्लेटफार्मों, स्टेबलिंग लाइनों, पिट लाइनों और कोचिंग टर्मिनलों का निर्माण शामिल है। ये कार्य आने वाले वर्षों में परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे।
पीएम गति शक्ति – रेलवे परियोजनाओं का एकीकृत एवं त्वरित कार्यान्वयन
केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि रेलवे विस्तार की योजना अब पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के माध्यम से बनाई जा रही है, जो एकीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग के लिए जियोस्पेशियल मैपिंग का उपयोग करता है।
उद्योगों, शहरी केंद्रों और लॉजिस्टिक्स नोड्स से जुड़ी मांग के वैज्ञानिक आकलन के माध्यम से, नई रेलवे परियोजनाओं की व्यवस्थित रूप से पहचान की गई है। वर्ष 2014 से अब तक, लगभग 27,000 किलोमीटर की नई रेलवे परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें कुल निवेश लगभग ₹4.27 लाख करोड़ है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र में विस्तार
श्री वैष्णव ने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मिजोरम जैसे राज्यों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है, जबकि मणिपुर, नागालैंड और सिक्किम में कनेक्टिविटी परियोजनाओं का कार्य तीव्र गति से चल रहा है।
उन्होंने कहा कि बेहतर रेल कनेक्टिविटी ने क्षेत्र में परिवहन लागत को कम करने, लॉजिस्टिक्स में सुधार और पहुंच को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
रेलवे और सांस्कृतिक जुड़ाव
श्री वैष्णव ने देश भर के प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्रों के लिए रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।
नासिक, उज्जैन, हरिद्वार, राजमुंदरी और कुंभकोणम जैसे शहरों में होने वाले कुंभ आयोजनों जैसे बड़े कार्यक्रमों के लिए व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास योजनाएं तैयार की गई हैं। इनमें यात्रियों की भारी संख्या को कुशलतापूर्वक संभालने के लिए स्टेशनों का अपग्रेडेशन, अतिरिक्त पुल, अंडरपास, पटरियों का दोहरीकरण और सिग्नलिंग में सुधार शामिल हैं।
परियोजना कार्यान्वयन और भूमि अधिग्रहण की चुनौतियाँ
श्री वैष्णव ने कहा कि रेल परियोजनाओं के समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकारों के सक्रिय सहयोग की आवश्यकता है, विशेष रूप से भूमि अधिग्रहण के मामले में।
उन्होंने उल्लेख किया कि कुछ क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण में होने वाले विलंब ने परियोजनाओं की प्रगति को प्रभावित किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संघीय ढांचे के तहत रेलवे का विकास एक सहयोगात्मक प्रयास है और भूमि अधिग्रहण में तेजी आने से सभी राज्यों में परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
हाई-स्पीड रेल और बुलेट ट्रेन की प्रगति
श्री वैष्णव ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इसका निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है।
प्रमुख उपलब्धियाँ:
- 300 किमी से अधिक वायाडक्ट निर्माण का कार्य पूर्ण।
- पिलर निर्माण, ट्रैक बिछाने और स्टेशनों के विकास में उल्लेखनीय प्रगति।
- कई नदियों पर पुलों का निर्माण कार्य संपन्न।
- भारत की पहली समुद्र के नीचे की रेल सुरंग पर कार्य जारी, जिसमें महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की गई है।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना को 2027 से चरणों में शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें ट्रेनों के 350 किमी/घंटा तक की गति से चलने की उम्मीद है। इससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय घटकर 2 घंटे से भी कम हो जाएगा।
मंत्री महोदय ने यह भी सूचित किया कि सात अतिरिक्त हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई है, जो भविष्य में भारत के हाई-स्पीड नेटवर्क को लगभग 4,000 किलोमीटर तक विस्तारित करेंगे।
विश्वस्तरीय यात्री सुविधाएं और स्वच्छता सुधार
श्री वैष्णव ने यात्री अनुभव, विशेष रूप से स्वच्छता में सुधार लाने के उद्देश्य से चल रहे सुधारों पर प्रकाश डाला। लंबी दूरी की ट्रेनों में पायलट आधार पर एक नई पहल शुरू की गई है, जहाँ सामान्य कोचों सहित सभी श्रेणियों में प्रस्थान से गंतव्य तक निरंतर सफाई सुनिश्चित की जाती है। यह पहल विभिन्न जोन की चुनिंदा ट्रेनों में लागू की जा रही है और इससे यात्रियों की समग्र संतुष्टि में वृद्धि होने की उम्मीद है।
सीमावर्ती बुनियादी ढांचे और सामरिक संपर्क
अपने उत्तर के समापन में, श्री अश्विनी वैष्णव ने सीमावर्ती और सामरिक क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी पर दिए जा रहे विशेष बल को रेखांकित किया।
उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क को मजबूत करने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जो सामरिक आवाजाही और क्षेत्रीय विकास दोनों को बढ़ावा देंगी। जम्मू-कश्मीर में बारामूला-उरी विस्तार (डीपीआर चरण), काजीगुंड-बडगाम दोहरीकरण और जम्मू-राजौरी-पुंछ कनेक्टिविटी के लिए सर्वेक्षण जैसे कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र में कई परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिनमें लंका-सिलचर, डेकरगांव-सिलघाट और अन्य सामरिक मार्गों जैसी नई लाइनों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करना और उन्हें पूरा करना शामिल है। क्षमता वृद्धि के लिए सर्वेक्षण और निर्माण गतिविधियां भी चल रही हैं, जिनमें न्यू जलपाईगुड़ी और कामाख्या के बीच अतिरिक्त लाइनें बिछाने का कार्य शामिल है।
श्री वैष्णव ने आगे बताया कि अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं, जिसमें भूटान जैसे पड़ोसी देशों के साथ संपर्क स्थापित करना भी शामिल है।
उत्तरी और पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्रों में, अनुपगढ़-खाजूवाला, जैसलमेर-बाड़मेर-भीलडी और भारत-पाकिस्तान सीमा के साथ अन्य मार्गों जैसी परियोजनाओं को पहुंच और लॉजिस्टिक्स में सुधार के लिए विकसित किया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में, बेरी-मनाली-लेह (डीपीआर चरण) और घनाउली-बद्दी लाइन जैसे कार्य प्रगति पर हैं। इसी प्रकार, पंजाब और अन्य उत्तरी राज्यों में नई लाइनों और क्षमता विस्तार की परियोजनाएं चल रही हैं।
उन्होंने सिलीगुड़ी कॉरिडोर में एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना पर भी प्रकाश डाला, जहाँ महत्वपूर्ण स्थितियों में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने के लिए 30 किमी लंबे भूमिगत डबल-लाइन कॉरिडोर की योजना विकसित की जा रही है।
इसके अतिरिक्त, भारत-नेपाल सीमा पर क्रॉस-बॉर्डर कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय विकास को मजबूत करने के लिए नरकटियागंज-रक्सौल-सीतामढ़ी-दरभंगा-मुजफ्फरपुर जैसे खंडों सहित कई दोहरी रेल लाइन परियोजना और क्षमता वृद्धि की परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं।
रेलवे कर्मचारियों की सराहना और भविष्य के लक्ष्य
श्री अश्विनी वैष्णव ने लगभग 12.5 लाख रेल कर्मचारियों के अमूल्य योगदान की सराहना की, जिनमें लोको पायलट, ट्रैक मेंटेनर, स्टेशन स्टाफ और तकनीकी कर्मी शामिल हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि ये कर्मचारी त्योहारों और कठिन परिस्थितियों की परवाह किए बिना देश भर में निर्बाध रेल परिचालन सुनिश्चित करते हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय रेलवे का यह कायाकल्प इसके समस्त कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है, जिसे सरकार की मजबूत नीतियों और निवेश का पूरा साथ मिला है।
अनुदान की मांगों के माध्यम से रेल मंत्रालय के विस्तृत व्यय प्रस्तावों पर संसद की स्वीकृति मांगी गई। भारत की संचित निधि से होने वाले इस खर्च में मुख्य रूप से क्षमता विस्तार, सुरक्षा में सुधार, रेल नेटवर्क पर भीड़ कम करने और यात्री सुविधाओं जैसी प्राथमिकताओं को शामिल किया गया है, साथ ही रेलवे की परिचालन प्रतिबद्धताओं के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है।
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