वस्त्र मंत्रालय
घरेलू कपड़ा कार्य में लगी महिलाओं की गणना और सामाजिक सुरक्षा कवरेज
प्रविष्टि तिथि: 27 MAR 2026 3:00PM by PIB Delhi
सरकार कपड़ा सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए कई जनगणनाएं और सर्वेक्षण आयोजित कर रही है, जैसे चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना (2019-20), वार्षिक आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) और गैर-निगमित क्षेत्र उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण आदि। ये सर्वेक्षण विभिन्न सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर अनुमान देते हैं। पीएलएफएस के अनुसार, महिला श्रम बल भागीदारी दर 31.7% है, जिसका राज्य/केंद्र शासित प्रदेश वार डेटा नीचे संलग्न है। वस्त्र मंत्रालय द्वारा अलग से घर पर और पीस-रेट (कार्य-अनुसार भुगतान) पर कपड़ा कार्य में लगी महिलाओं की गणना के लिए कोई विशिष्ट सर्वेक्षण आयोजित नहीं किया गया है।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (ईएसआईसी) का अध्याय IV हर उस प्रतिष्ठान पर लागू होता है जिसमें दस या अधिक व्यक्ति कार्यरत हैं, सिवाय एक मौसमी कारखाने के जो ईएसआई लाभों पर कवरेज प्रदान करता है। इसके अलावा, मंत्रालय ने एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है-औद्योगिक विकास, क्लस्टर मजबूती, कौशल उन्नयन आदि को मिलाकर कपड़ा और पारंपरिक क्षेत्र का समर्थन करने के लिए जिसमें महिलाओं की भागीदारी और उत्पादकता में सुधार शामिल है। गुणवत्तापूर्ण रोजगार, कल्याण और बाजार से जुड़े सशक्तीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है-
- पीएम मित्र – इन मेगा टेक्सटाइल पार्कों को परिधान और घरेलू कपड़ा इकाइयों में महिलाओं की उच्च भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके तहत क्रेच (शिशु गृह), महिला छात्रावास, कौशल केंद्र, सुरक्षित परिवहन, सीसीटीवी, सुरक्षा और आधुनिक ओएचएस सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। यह योजना महिलाओं के लिए औपचारिक क्षेत्र में लाखों नए और सुरक्षित रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
- समर्थ – समर्थ कौशल कार्यक्रमों में लाभार्थियों का एक बड़ा हिस्सा महिलाएँ हैं—विशेष रूप से वस्त्र निर्माण, कढ़ाई, बुनाई, हस्तशिल्प आदि क्षेत्रों में। समर्थ योजना के तहत अब तक 5.3 लाख लाभार्थियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से 88% लाभार्थी महिलाएँ हैं।
- हथकरघा क्षेत्र – हथकरघा बुनकरों (जिनमें महिला बुनकर भी शामिल हैं) को कच्चे माल की आपूर्ति के लिए यह एक प्रमुख योजना है। कच्चा माल आपूर्ति योजना (आरएमएसएस) के तहत परिवहन सब्सिडी (सभी प्रकार के सूत पर), 15% मूल्य सब्सिडी और डिपो संचालन व्यय प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त, पात्र लाभार्थियों में व्यक्तिगत महिला बुनकर, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), संयुक्त देयता समूह (जेएलजी) सहकारी समितियां, हथकरघा उत्पादक कंपनियां और बुनकर उद्यमी शामिल हैं। इसके अलावा, कुछ विशेष प्रावधान इस प्रकार हैं—
i. कपड़ा मंत्रालय और डीसी हैंडलूम कार्यालय के साथ साझेदारी में, संयुक्त राष्ट्र ने महिला कारीगरों के बीच नेतृत्व और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाओं की एक श्रृंखला #सृजन शुरू की, जिसके माध्यम से एक वर्ष के भीतर पूरे भारत में 1,000 महिला बुनकरों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है। पहली कार्यशाला 18.10.2025 को वाराणसी में आयोजित की गई।
ii. राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के तहत महिला बुनकरों को वर्कशेड शेड के निर्माण के लिए 100% छूट की पेशकश की जाती है। लघु क्लस्टर विकास कार्यक्रम (लघु क्लस्टर विकास कार्यक्रम) के अंतर्गत 73% से अधिक लाभार्थी महिलाएं हैं।
iii. पंजाब नेशनल बैंक के सहयोग से ‘हैंडलूम वीवर मुद्रा पोर्टल’ विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य दावों का केंद्रीयकृत ऑनलाइन वितरण सुनिश्चित करना है; इससे मार्जिन मनी, ब्याज सबवेंशन और क्रेडिट गारंटी शुल्क के रूप में मिलने वाली वित्तीय सहायता में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा।
iv. दिल्ली हाट में ‘महिला दिवस’ के अवसर पर एक विशेष स्लॉट (1 मार्च से 15 मार्च 2026 तक) और ‘पंचलखिया वीवर दीदी’ के लिए एक विशेष स्लॉट (16 अगस्त से 31 अगस्त 2025 तक) आयोजित किया गया।
v. देश भर में 30 महिलाओं के नेतृत्व वाली उत्पादक कंपनियाँ और 15 महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप।
vi. कमलादेवी चट्टोपाध्याय पुरस्कार, जिसे विशेष रूप से महिला बुनकरों के लिए 2016 से शुरू किया गया है; अब तक 14 पुरस्कार प्रदान किए जा चुके हैं।
- रेशम क्षेत्र – रेशम उद्योग लगभग 97.3 लाख लोगों को रोज़गार देता है, जिनमें से 55-60% महिलाएँ हैं। केंद्रीय रेशम बोर्ड ने महिलाओं की मेहनत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए कई महिला-अनुकूल नवाचार विकसित किए हैं, जैसे-महिलाओं के लिए आसान संचालन वाली स्वचालित/मोटर-चालित रीलिंग और कताई मशीनें, केंद्रीय योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता, और महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देना आदि।
चार श्रम संहिताओं के राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन के साथ सुरक्षा के दायरे को विस्तार देने के लिए एक औपचारिक ढांचे की शुरुआत की गई है। इन नई श्रम संहिताओं का उद्देश्य कपड़ा क्षेत्र सहित सभी क्षेत्रों में कल्याणकारी सुविधाओं, मातृत्व लाभ, कार्य के घंटों, व्यावसायिक सुरक्षा और महिला श्रमिकों की भागीदारी को बढ़ाना है, जहाँ कार्यबल में महिलाओं की एक बड़ी हिस्सेदारी है। इसके अतिरिक्त, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 45 के अनुसार, ईएसआईसी के अध्याय IV के तहत मिलने वाले लाभों को असंगठित श्रमिकों, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स तक विस्तारित करने का प्रावधान भी किया गया है।
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राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार महिला श्रम बल भागीदारी दर, 2023-24 (प्रतिशत में) |
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क्र.सं. |
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश |
Female LFPR(%) |
|
1 |
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह |
38.0 |
|
2 |
आंध्र प्रदेश |
35.8 |
|
3 |
अरुणाचल प्रदेश |
49.9 |
|
4 |
असम |
36.8 |
|
5 |
बिहार |
20.3 |
|
6 |
चंडीगढ़ |
25.0 |
|
7 |
छत्तीसगढ़ |
46.1 |
|
8 |
दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव |
34.7 |
|
9 |
दिल्ली |
14.5 |
|
10 |
गोवा |
22.9 |
|
11 |
गुजरात |
35.8 |
|
12 |
हरयाणा |
18.8 |
|
13 |
हिमाचल प्रदेश |
56.2 |
|
14 |
जम्मू एवं कश्मीर |
38.8 |
|
15 |
झारखंड |
35.8 |
|
16 |
कर्नाटक |
30.5 |
|
17 |
केरल |
33.4 |
|
18 |
लद्दाख |
43.7 |
|
19 |
लक्षद्वीप |
13.0 |
|
20 |
मध्य प्रदेश |
39.4 |
|
21 |
महाराष्ट्र |
32.0 |
|
22 |
मणिपुर |
36.3 |
|
23 |
मेघालय |
47.1 |
|
24 |
मिजोरम |
30.4 |
|
25 |
नगालैंड |
42.7 |
|
26 |
ओडिशा |
38.0 |
|
27 |
पुदुचेरी |
28.9 |
|
28 |
पंजाब |
24.4 |
|
29 |
राजस्थान |
38.0 |
|
30 |
सिक्किम |
56.9 |
|
31 |
तमिलनाडु |
35.2 |
|
32 |
तेलंगाना |
36.5 |
|
33 |
त्रिपुरा |
36.8 |
|
34 |
उत्तराखंड |
35.9 |
|
35 |
उत्तर प्रदेश |
25.2 |
|
36 |
पश्चिम बंगाल |
31.7 |
|
अखिल भारतीय |
31.7 |
|
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स्रोत: पीएलएफएस, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय |
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यह जानकारी वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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