औषधि विभाग
दवाइयों के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना
प्रविष्टि तिथि: 27 MAR 2026 4:26PM by PIB Delhi
भारत में महत्वपूर्ण, प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों (केएसएम)/औषधि मध्यवर्ती (डीआई) और सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (एपीआई) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना (जिसे आमतौर पर “थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना” के रूप में जाना जाता है) के कार्यान्वयन की स्थिति निम्नलिखित है:
i. दिसंबर 2025 तक, ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में 4,329.95 करोड़ रु की निवेश प्रतिबद्धता के मुकाबले 4,814 करोड़ रु का निवेश किया जा चुका है।
ii. कुल 91,077 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता 33 स्वीकृत उत्पादों के लिए निर्धारित की गई है, जबकि मूल रूप से 41 उत्पादों के लिए 82,270 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता परिकल्पित की गई थी (41 उत्पादों की सूची अनुलग्नक में दी गई है)। इसके अतिरिक्त, दिसंबर 2025 तक 28 महत्वपूर्ण केएसएम, डीआई और एपीआई के लिए 56,800 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की उत्पादन क्षमता सृजित की गई है। इस योजना के परिणामस्वरूप 2,720 करोड़ रु की संचयी बिक्री हुई है, जिसमें 527.96 करोड़ रु का निर्यात शामिल है।
औषधि विभाग, बल्क ड्रग पार्क संवर्धन योजना के तहत 3,000 करोड़ रुपये के बजट से एक योजना लागू कर रहा है, जिसके अंतर्गत आंध्र प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश राज्यों में तीन बल्क ड्रग पार्क स्वीकृत किए गए हैं और संबंधित राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से विकास के विभिन्न चरणों में हैं। इन पार्कों की कुल परियोजना लागत 6,306.68 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें सामान्य अवसंरचना सुविधाओं के निर्माण के लिए प्रत्येक पार्क से 1,000 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है। इन पार्कों में बल्क ड्रग या एपीआई निर्माताओं को पार्क में स्थापित इकाइयों के लिए रियायती दर पर भूमि और बिजली, पानी, अपशिष्ट उपचार संयंत्र, भाप, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और गोदाम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। संबंधित राज्यों की कार्यान्वयन एजेंसियों ने स्थिर पूंजी निवेश पर पूंजी सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, राज्य वस्तु एवं सेवा कर प्रतिपूर्ति, स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क से छूट आदि के रूप में वित्तीय प्रोत्साहन भी प्रदान किए हैं। इसके अलावा, योजना में पार्कों में भूमि आवंटन के लिए आवेदन करने वालों को बल्क ड्रग्स के लिए पीएलआई योजना में प्राथमिकता प्राप्त उत्पादों के निर्माण के लिए इकाइयां स्थापित करने हेतु भूमि आवंटन में प्राथमिकता देने का प्रावधान है।
उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का उद्देश्य फार्मास्युटिकल क्षेत्र में निवेश और उत्पादन बढ़ाकर और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में उच्च मूल्य वाली वस्तुओं के उत्पाद विविधीकरण में योगदान देकर भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना है। यह योजना जैव-औषधीय दवाओं, जटिल जेनेरिक दवाओं, पेटेंट वाली दवाओं या पेटेंट की समाप्ति के करीब पहुंच चुकी दवाओं, ऑटोइम्यून दवाओं, कैंसर-रोधी दवाओं आदि जैसी उच्च मूल्य वाली दवाओं के उत्पादन को प्रोत्साहित करती है।
उक्त योजनाओं के प्रारंभ होने के बाद से दवा क्षेत्र में कुल संचयी निवेश और वर्षवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों की संख्या नीचे दी गई है:
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संचयी निवेश (करोड़ रुपये में) |
अब तक सृजित रोजगार के अवसरों की संख्या (संख्या) |
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मार्च 2023 |
मार्च 2024 |
मार्च 2025 |
दिसंबर 2025 |
मार्च 2023 |
मार्च 2024 |
मार्च 2025 |
दिसंबर 2025 |
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थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना |
2,374.93 |
3,721.44 |
4,554.25 |
4,814.10 |
2,163 |
3,538 |
4,490 |
4,896 |
|
फार्मास्युटिकल्स के लिए पीएलआई योजना |
20,647 |
29,268 |
37,306.65 |
42,694.89 |
46,357 |
70,362 |
93,532 |
1,13,300 |
अनुलग्नक
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क्रमांक |
थोक औषधियों के लिए पीएलआई योजना के अंतर्गत आने वाले उत्पादों के नाम |
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पेनिसिलिन जी |
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7-एसीए |
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क्लैवुलैनिक एसिड |
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एरिथ्रोमाइसिन थायोसाइनेट (टीआईओसी) |
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बीटामेथासोन |
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डेक्सामेथासोन |
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प्रेडनिसोलोन |
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रिफैम्पिसिन |
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क्लिंडामाइसिन बेस |
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स्ट्रेप्टोमाइसिन |
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टेट्रासाइक्लिन |
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निओमाइसिन |
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जेंटामाइसिन |
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पैरा एमिनो फिनोल |
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1,1 साइक्लोहेक्सेन डायएसिटिक एसिड (सीडीए) |
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डाइसायनडायमाइड (डीसीडीए) |
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2-मिथाइल-5-नाइट्रो-इमिडाज़ोल (2-एमएनआई) |
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मेरोपेनेम |
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एटोरवास्टेटिन |
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ओलमेसार्टन |
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वाल्सार्टन |
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लोसार्टन |
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लिवोफ़्लॉक्सासिन |
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सल्फाडाईज़ीन |
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ओफ़्लॉक्सासिन |
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नॉरफ्लोक्सासिन |
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आर्टिसुनेट |
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टेल्मिसर्टन |
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एस्पिरिन |
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लेवेतिरासिटाम |
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कार्बीडोपा |
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रिटोनाविर |
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लोपीनावीर |
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ऐसीक्लोविर |
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कार्बमेज़पाइन |
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ओक्स्कार्बज़ेपिंन |
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विटामिन बी6 |
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लीवोडोपा |
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विटामिन बी1 |
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डिक्लोफेनाक सोडियम |
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सिप्रोफ्लोक्सासिं |
यह जानकारी रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित जवाब में दी।
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