युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय
“वैश्विक खेल शक्ति बनने की हमारी 10 वर्षीय योजना केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे प्रत्येक खेल के मैदान, प्रत्येक जिले और प्रत्येक युवा के सपने में साकार होना चाहिए” – केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया
“खेलो भारत मिशन हमारे युवाओं की ऊर्जा और राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रतीक है” – डॉ. मांडविया
विभिन्न राज्यों के खेल मंत्रियों ने खिलाड़ी-केंद्रित दृष्टिकोण पर आम सहमति बनाने की इस पहल की प्रशंसा की
प्रविष्टि तिथि: 25 APR 2026 6:05PM by PIB Delhi
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रियों का चिंतन शिविर आज जम्मू–कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में शुरू हुआ। इसमें समन्वित कार्रवाई, व्यवस्थागत सुधार, नीतिगत अनुकूलन और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के माध्यम से भारत के खेल परिदृश्य को मजबूत करने पर ध्यान देने के बारे में विचार–विमर्श किया गया।
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर देते हुए कहा कि भारत की खेल संबंधी महत्वाकांक्षाएं जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के माध्यम से ही साकार होंगी।
केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा, “वैश्विक खेल शक्ति बनने का हमारी 10 वर्षीय रूपरेखा केवल कागजों पर ही नहीं सीमित रहनी चाहिए, बल्कि इसे हर खेल के मैदान, हर जिले और हर युवा के सपने में साकार होना चाहिए।”

जम्मू–कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी चिंतन शिविर में उपस्थित थे। उन्होंने भारत को खेलों का महाशक्ति स्थल बनाने के दृष्टिकोण की प्रशंसा की।
केंद्रीय खेल मंत्री ने राज्यों से नीति निर्माण से आगे बढ़कर सक्रिय कार्यान्वयन की दिशा में कदम बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वास्तविक प्रगति का मापन जिलों, प्रशिक्षण प्रणालियों और जमीनी स्तर के खेल परिदृश्य में दिखाई देने वाले परिणामों से ही होगा।
Addressed the ‘Chintan Shivir’ of State Sports Ministers in Srinagar today.
The Centre and States are working together to build a stronger sports ecosystem, aligned with PM Shri @narendramodi ji’s vision of making India a global sporting powerhouse by 2047. pic.twitter.com/iXlbm0TVJq
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) April 25, 2026
उन्होंने कहा, “खेलो भारत मिशन सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, यह हमारे युवाओं की ऊर्जा और राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है।”
डॉ. मांडविया ने राज्य सरकारों और खेल संघों के बीच लंबे समय से चली आ रही दूरी को पाटने का आह्वान करते हुए एक मजबूत और एकीकृत प्रतिभा विकास केंद्र बनाने के लिए घनिष्ठ समन्वय का आग्रह किया।

डॉ. मांडविया ने समन्वय के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रारंभिक प्रतिभा पहचान के लिए शिक्षा प्रणाली के साथ समन्वय आवश्यक है और शारीरिक शिक्षा शिक्षक जमीनी स्तर की खेल व्यवस्था का आधार हैं।
केंद्रीय खेल मंत्री महोदय ने कहा, “यदि एक भी प्रतिभाशाली बच्चा अवसर की कमी के कारण पीछे रह जाता है, तो यह केवल व्यक्तिगत हानि नहीं है, बल्कि पूरे राष्ट्र की हानि है।”
डॉ. मांडविया ने कहा कि खेल एक परिवर्तनकारी साधन के रूप में विशेष रूप से, जम्मू–कश्मीर और अन्य चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में कार्य करते हैं, जो सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता में योगदान करते हैं।
केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मांडविया ने प्रणालीगत कमियों को दूर करते हुए प्रशिक्षकों के नियमित प्रमाणीकरण और उन्नयन, खिलाड़ियों के वैज्ञानिक प्रशिक्षण तथा खेल प्रशासन में क्षमता निर्माण का आह्वान किया।

डॉ. मांडविया ने एक सुचारू इकोसिस्टम के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “जब बुनियादी ढांचा, प्रतिभा की पहचान और प्रशिक्षित मानव संसाधन एक अटूट कड़ी के रूप में एक साथ आते हैं, तो ओलंपिक पोडियम अपने आप ही मिल जाएंगे।” उन्होंने जमीनी स्तर की भागीदारी को उच्च स्तरीय प्रदर्शन से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. मांडविया ने ग्वालियर के लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान द्वारा कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए खेल में भागीदारी, खेल भावना और नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए वाईईएस–पीई (युवाओं की खेल एवं शारीरिक शिक्षा में भागीदारी) कार्यक्रम का भी शुभारंभ किया।
खेल सचिव श्री हरि रंजन राव ने सभा को संबोधित करते हुए प्रतिभागियों का स्वागत किया और सामूहिक चिंतन तथा कार्य–विमर्श के मंच के रूप में शिविर के महत्व पर प्रकाश डाला।

खेल सचिव ने चिंतन शिविर के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “यह सभा केवल एक सम्मेलन नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन, संकल्प और नवीनीकृत प्रतिबद्धता का एक सामूहिक क्षण है।”
चिंतन शिविर में पदक रणनीति, नीति समन्वय, स्वच्छ एवं सुरक्षित खेल और प्रतिभा पहचान एवं विकास जैसे विषयों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए।

15 से अधिक राज्यों के खेल मंत्रियों ने आदिले सुमारीवाला, अभिनव बिंद्रा, पुलेला गोपीचंद और गगन नारंग सहित कई प्रख्यात खेल हस्तियों के साथ चिंतन शिविर में भाग लिया और हितधारकों के साथ अपने विचार साझा किए, जो भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और सहयोगात्मक नीतिगत संवाद को आगे बढ़ाने के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

विभिन्न राज्यों के खेल मंत्रियों ने एथलीट और खिलाड़ी केंद्रित दृष्टिकोण पर आम सहमति बनाने की पहल की प्रशंसा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस मॉडल को देश के विभिन्न क्षेत्रों में दोहराया जा सकता है ताकि भारत में एक सशक्त खेल परिदृश्य को मजबूत और विकसित किया जा सके।
विचार–विमर्श में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, प्रशिक्षण प्रणालियों को बेहतर बनाने, केंद्र–राज्य समन्वय को बढ़ाने, नैतिक और सुरक्षित खेल वातावरण सुनिश्चित करने और स्कूलों, अकादमियों और विशिष्ट प्रशिक्षण केंद्रों में एकीकृत वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी–आधारित प्रतिभा विकास प्रणाली विकसित करने पर बल दिया गया।
इन सत्रों में खिलाड़ियों के विकास में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए संरचित प्रक्रियाओं और संस्थागत समन्वय के महत्व पर भी बल दिया गया, जिसमें प्रतिभा की पहचान से लेकर उच्च–प्रदर्शन प्रशिक्षण तक की प्रक्रिया शामिल है।

प्रतिभागियों ने नीतिगत उद्देश्यों को जमीनी स्तर पर मापने योग्य प्रभाव में परिवर्तित करने के लिए राज्यों के बीच निरंतर निगरानी, मूल्यांकन और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान–प्रदान की आवश्यकता पर भी बल दिया।
विचार–विमर्श में भारत के वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में उभरने के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अनुरूप, एक मजबूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार खेल इकोसिस्टम के निर्माण के लिए केंद्र, राज्यों और सभी हितधारकों को शामिल करते हुए एक एकीकृत और समन्वित दृष्टिकोण के महत्व की पुष्टि की गई।
****
पीके/केसी/एमकेएस/डीके
(रिलीज़ आईडी: 2255574) आगंतुक पटल : 15
