वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
भारत और न्यूजीलैंड ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए
प्रविष्टि तिथि: 27 APR 2026 4:05PM by PIB Delhi
यह समझौता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आर्थिक साझेदारी और अवसरों के एक नए युग की शुरुआत है
न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता नई पीढ़ी के लिए अवसरों को खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और साथ ही द्विपक्षीय सम्बंधों में एक नया अध्याय जोड़ता है
2047 तक विकसित भारत के लिए एक नई पीढ़ी का व्यापार समझौता टैरिफ, प्रतिभा, निवेश और कृषि उत्पादकता से युवाओं, किसानों, महिलाओं, कारीगरों और लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाता है
यह समझौता कई मायनों में अभूतपूर्व है: 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच, फार्मा क्षेत्र में त्वरित पहुंच, कृषि उत्पादकता साझेदारी, प्रतिभा गतिशीलता, आयुष का वैश्विक विस्तार और मजबूत बौद्धिक संपदा
कपड़ा, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग सामान और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्रों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए विस्तारित बाजार पहुंच
कृषि, मछली पालन और फैक्ट्रियों को बढ़ावा: भारत के 100 प्रतिशत एक्सपोर्ट पर ज़ीरो-ड्यूटी बाजार पहुंच भारत ने 70 प्रतिशत लाइनों में बाजर पहुंच की पेशकश की है, इसमें न्यूज़ीलैंड के 95 प्रतिशत द्विपक्षीय व्यापार शामिल हैं
भारत में कृषि, विनिर्माण उद्योग, ढांचागत विकास, स्टार्ट-अप, आविष्कारक और उभरती टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए 20 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश का वादा
किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं और घरेलू उद्योग को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, बाजार पहुंच में कॉफ़ी, दूध, क्रीम, चीज़, दही, मट्ठा, दुग्ध प्रोटीन, प्याज़, चीनी, मसाले, खाने के तेल, रबर जैसे डेयरी और मुख्य कृषि उत्पाद शामिल नहीं हैं
न्यूज़ीलैंड द्वारा अब तक की सबसे बेहतरीन बाजार पहुंच और सेवाओं की पेशकश, इससे कुशल पेशेवरों, स्टार्ट-अप और सेवा-आधारित उद्यमों के लिए उच्च-मूल्य वाले अवसर खुलेंगे। इसमें 118 सेवा क्षेत्र शामिल हैं, इनमें कंप्यूटर-सम्बंधी सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, श्रव्य-दृश्य सेवाएं, दूरसंचार सेवाएं, विनिर्माण सेवाएं, पर्यटन और यात्रा-सम्बंधी सेवाएं शामिल हैं, लगभग 139 उप-क्षेत्रों में सबसे पसंदीदा राष्ट्र का वादा
न्यूज़ीलैंड में पढ़ाई के बाद काम करने वाले वीज़ा और पेशेवर तौर तरीकों से छात्रों की आवाजाही को बढ़ावा, जिसमें कोई संख्यात्मक सीमा नहीं है: छात्र अपनी वैश्विक सीख को वैश्विक अनुभव में बदल सकते हैं। स्टेम (विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित) में बैचलर और मास्टर डिग्री वाले छात्रों को 3 साल तक और डॉक्टरेट शोधकर्ताओं को 4 साल तक पढ़ाई के बाद काम करने का अधिकार मिलेगा
भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए आवाजाही के रास्तों के ज़रिए वैश्विक करियर को बढ़ावा
भारतीय पेशेवरों के लिए ‘अस्थायी रोज़गार प्रवेश वीज़ा’ का 5,000 का विशेष कोटा, नए अवसरों का विस्तार
निर्माण की प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत करने और लचीली सप्लाई चेन बनाने के लिए शुल्क-मुक्त इनपुट: लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोयला, धातु का कचरा और स्क्रैप
उत्पादकता, किसानों की आय और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाने के लिए सेब, कीवी फल और मनुका शहद के लिए कृषि उत्पादकता साझेदारी और ‘उत्कृष्टता केंद्र’
कृषि उत्पादकता सहयोग के साथ-साथ कोटा और न्यूनतम आयात कीमतों के माध्यम से नियंत्रित बाजार पहुंच से घरेलू उत्पादकों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित
वैश्विक बाज़ारों में जैविक उत्पाद और ‘आयुष’ मुख्य आकर्षण बन रहे हैं
स्वास्थ्य और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सहयोग न्यूज़ीलैंड द्वारा अपनी तरह का पहला प्रयास है। यह आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक प्रणालियों को बढ़ावा देता है, साथ ही आयुष, वेलनेस सेवाओं और महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों में भारत के वैश्विक नेतृत्व को मज़बूत करता है
न्यूजीलैंड भारतीय भौगोलिक संकेतकों के पंजीकरण को सक्षम बनाने, ग्रामीण कारीगरों और पारंपरिक उद्योगों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है

भारत और न्यूजीलैंड ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (आईएन-एनजेड एफटीए) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण और नेतृत्व में भारत की वैश्विक आर्थिक साझेदारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री माननीय टॉड मैक्ले ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस हस्ताक्षर समारोह में दोनों देशों के व्यवसायों और उद्योग जगत के अग्रणी एक साथ आए। इसमें व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने संसद सदस्यों और 30 से अधिक न्यूजीलैंड व्यवसायों के एक बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
श्री मैक्ले ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर द्विपक्षीय सम्बंधों में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय है। यह साझी महत्वाकांक्षा, गहन जुड़ाव और पारस्परिक रूप से लाभकारी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर अपने संदेश में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए व्यापार, निवेश और नवाचार के व्यापक अवसर खोलता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इससे बाजार पहुंच का विस्तार होगा, निर्यात वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग संभव होगा। साथ ही, यह स्थिर, नियम-आधारित व्यापार और घनिष्ठ जन-संबंधों के प्रति साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगा।
इस अवसर पर श्री मैक्ले ने कहा कि यह समझौता वर्तमान पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा अवसर है। यह निर्यातकों के लिए नए रास्ते खोलेगा, रोजगार सृजित करेगा और महत्वपूर्ण आर्थिक संभावनाओं को उजागर करेगा। इससे न केवल मौजूदा व्यापारिक सम्बंध मजबूत होंगे बल्कि नई साझेदारियों के विकास में भी तेजी आएगी, इससे दोनों देशों के बीच समग्र आर्थिक सहयोग बढ़ेगा।
न्यूजीलैंड की मजबूत भागीदारी के बारे में उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निर्यातकों, क्षेत्र के अग्रणियों और व्यावसायिक हितधारकों सहित 40 से अधिक प्रतिनिधि भारत आए है। इससे समझौते के महत्व का पता चलता है।
इस समझौते से बाजार पहुंच में सुधार, बाधाओं में कमी और स्पष्ट एवं पूर्वानुमानित नियमों की स्थापना के माध्यम से व्यापार और निवेश प्रवाह में वृद्धि होने की उम्मीद है। यह लघु एवं मध्यम उद्यमों सहित सभी आकार के व्यवसायों को सहयोग प्रदान करेगा और व्यापार के लाभों का व्यापक वितरण सुनिश्चित करेगा।
श्री मैक्ले ने द्विपक्षीय सम्बंधों के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में जन-जन सम्बंधों की भूमिका पर भी बल दिया। उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड की लगभग 6 प्रतिशत आबादी की जड़ें भारत से जुड़ी हैं। भारतीय प्रवासी व्यापार, शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, खेल और सार्वजनिक जीवन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान साझा सैन्य इतिहास और खेल जगत के स्थायी जुड़ाव, विशेष रूप से क्रिकेट में, दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सम्बंधों पर भी प्रकाश डाला, जो द्विपक्षीय भागीदारी को मजबूत करना जारी रखता है।
यह समझौता वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों में हो रहे बदलावों के दौर में हुआ है, जहां विश्वसनीय साझेदारियां और भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। न्यूजीलैंड भारत को क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक मजबूती और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने में एक प्रमुख भागीदार मानता है।
भारत के तीव्र आर्थिक परिवर्तन को स्वीकार करते हुए, श्री मैक्ले ने वैश्विक आर्थिक गतिविधि में इसकी बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया और भारत की विकास यात्रा में साझेदारी करने के लिए न्यूजीलैंड की प्रतिबद्धता को दोहराया।
श्री मैक्ले ने वार्ता में शामिल अधिकारियों के पेशेवर रवैये और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि यह समझौता संतुलित, दूरदर्शी और व्यावहारिक परिणाम दर्शाता है। अब दोनों पक्ष समझौते के प्रभावी कार्यान्वयन और क्रियान्वयन के लिए मिलकर काम करेंगे।
अपने संबोधन के समापन में उन्होंने ने दोनों देशों के नेतृत्व को उनकी दूरदर्शिता और प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि यह समझौता आपसी सम्मान, साझा हितों और आने वाले वर्षों में सम्बंधों को और मजबूत करने की स्पष्ट महत्वाकांक्षा पर आधारित है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री श्री क्रिस्टोफर लक्सन की द्विपक्षीय बैठक की पूर्व संध्या पर 16 मार्च, 2025 को आधिकारिक तौर पर यह बातचीत शुरू हुई थी। यह समझौता दोनों देशों के बीच गहरे आपसी सम्बंधों और जीवंत लोकतंत्रों की साझेदारी पर आधारित है, इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापार, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक जुड़ाव को बढ़ावा देना है। 2024-25 में ओशिनिया और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 26 अरब अमरीकी डॉलर था। न्यूजीलैंड ओशिनिया क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके साथ द्विपक्षीय व्यापार का मूल्य लगभग 1.3 अरब अमरीकी डॉलर है। भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के साथ, बेहतर बाजार पहुंच, अधिक व्यापार सुविधा और दोनों देशों के बीच गहरे आर्थिक जुड़ाव के कारण द्विपक्षीय व्यापार में और वृद्धि होने की आशा है।
वार्ता के पांच औपचारिक दौरों और कई अंतर-सत्रों के माध्यम से, दोनों देशों ने 22 दिसंबर 2025 को शुरु होने के महज नौ महीने बाद ही समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। इससे यह भारत द्वारा किसी विकसित देश के साथ किए गए सबसे तेजी से संपन्न होने वाले मुक्त व्यापार समझौतों में से एक बन गया।
समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा, “ भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता विकसित देशों के साथ भारत के सम्बंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह समझौता हमारे किसानों, महिलाओं, युवाओं, कारीगरों और उद्यमियों के लिए वैश्विक आर्थिक साझेदारी के सम्बंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में 38 विकसित देशों के साथ भारत का यह नौवां समझौता है। समझौते का मूल उद्देश्य निर्यात, कृषि उत्पादकता, छात्र आवागमन, कौशल विकास, निवेश और सेवाओं को सशक्त बनाना है। न्यूजीलैंड द्वारा 20 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता भारत की विकास गाथा में मजबूत विश्वास का संकेत है। यह समझौता लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को वैश्विक बाजारों में फलने-फूलने में सक्षम बनाने पर विशेष बल देता है।”
वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने एक संदेश में कहा, “भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता हमारी आर्थिक साझेदारी में एक नए युग की शुरुआत करता है, यह विश्वास और पूरक शक्तियों पर आधारित है। अब न्यूजीलैंड के साथ निर्यात के लिए भारत के पास समान अवसर उपलब्ध हैं। यह मुक्त व्यापार समझौता कृषि उत्पादकता, जैविक उत्पादों, सेवाओं, परिवहन, आयुष और फार्मा क्षेत्रों तक पहुंच को बढ़ाता है, इससे अवसर व्यापक और भविष्य के अनुकूल हो जाते हैं। यह समझौता भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मजबूत प्रतिस्पर्धात्मक बढ़ावा देता है। भारत के निर्यातकों को अब न्यूजीलैंड और व्यापक क्षेत्रीय व्यापार इको-सिस्टम में शून्य शुल्क की पहुंच प्राप्त है। भारतीय निर्यातक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अधिक व्यापक स्तर पर और विविधीकरण के साथ काम कर सकते हैं। यह समझौता आज की पल-पल बदलती दुनिया में स्थायित्व प्रदान करता है।”
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हस्ताक्षरित किया गया। यह समझौता एक नई पीढ़ी की रणनीतिक व्यापार साझेदारी का प्रतिनिधित्व करता है, जो व्यापक, समावेशी, आत्मविश्वासपूर्ण, सुनियोजित और राष्ट्रीय हित पर आधारित है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ ऐसी साझेदारियां स्थापित कर रहा है जो हमारे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए वास्तविक बाजार पहुंच और समग्र आर्थिक साझेदारियां सुनिश्चित करती हैं। यह मुक्त व्यापार समझौता 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर एक नए दृष्टिकोण का प्रमाण है। यह व्यापार रोजगार सृजन करेगा, युवाओं, महिलाओं और लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाएगा और समावेशी विकास और आर्थिक लचीलेपन की परिकल्पना के साथ पूर्णतः संरेखित होगा। यह मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों में सभी घरेलू प्रक्रियाओं के पूर्ण होने और अनुसमर्थन के बाद लागू होगा।
उत्पादकता से लोगों की समृद्धि तक: विकसित भारत 2047 के लिए शुल्क, प्रतिभा और परिवर्तन
वस्तु व्यापार: लागू होने पर न्यूजीलैंड के बाजार में अभूतपूर्व 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच
- यह मुक्त व्यापार समझौता भारत के न्यूजीलैंड को होने वाले 100 प्रतिशत निर्यात के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करता है, इसमें सभी शुल्कलाइनें शामिल हैं, और इससे कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और रोजगार को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा मिलने की आशा है।
- इससे पहले, न्यूजीलैंड ने सिरेमिक, कालीन, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स सहित प्रमुख भारतीय निर्यातों पर 10 प्रतिशत तक के उच्चतम शुल्क को बरकरार रखा था।
- न्यूजीलैंड के अन्य व्यापारिक साझेदारों की तरह, भारतीय उत्पादों को प्रवेश के समय से ही शून्य शुल्क बाजार पहुंच प्राप्त होगी, इससे वे न्यूजीलैंड में पूरी तरह से प्रतिस्पर्धी होंगे और उन्हें समान अवसर मिलेंगे, जो भारत भर में श्रमिकों, कारीगरों, महिला उद्यमियों, युवाओं और लघु एवं मध्यम उद्यमों को सीधे तौर पर समर्थन प्रदान करेगा।
- महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत अपने विनिर्माण क्षेत्र के लिए लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोयला और धातुओं के अपशिष्ट और स्क्रैप सहित शुल्क-मुक्त इनपुट भी प्राप्त करता है, इससे उत्पादन लागत कम होती है और भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है।
बाजार पहुंच को संतुलित किया गया और संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षित किया गया।
- भारत ने द्विपक्षीय व्यापार मूल्य के 95 प्रतिशत हिस्से को कवर करने वाली 70.03 प्रतिशत शुल्कलाइनों पर शुल्कउदारीकरण की पेशकश की है, इसके साथ ही भारत के संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा के लिए 29.97 प्रतिशत शुल्क लाइनों को इससे बाहर रखा है।
- जिन उत्पादों को प्रतिबंधित रखा गया है, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं – दुग्ध उत्पाद (दूध, क्रीम, मट्ठा, दही, पनीर आदि), पशु उत्पाद (भेड़ के मांस के अलावा), कृषि उत्पाद (प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम आदि), चीनी, कृत्रिम शहद, पशु, वनस्पति या सूक्ष्मजीवों से प्राप्त वसा और तेल, हथियार और गोला-बारूद, रत्न और आभूषण, तांबा और उससे बनी वस्तुएं (कैथोड, कारतूस, छड़ें, कॉइल आदि), एल्युमीनियम और उससे बनी वस्तुएं (पिंड, बिलेट, तार की छड़ें) आदि।
- 30.00 प्रतिशत शुल्कमदों पर तत्काल शुल्क समाप्त कर दिया जाएगा, इसमें लकड़ी, ऊन, भेड़ का मांस, चमड़ा-कच्ची खाल आदि शामिल हैं।
- 35.60 प्रतिशत शुल्कको 3, 5, 7 और 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाना है, इसमें पेट्रोलियम तेल, माल्ट का अर्क, वनस्पति तेल और चुनिंदा विद्युत और यांत्रिक मशीनरी, पेप्टोन आदि शामिल हैं।
- शराब, फार्मास्युटिकल दवाएं, पॉलिमर, एल्युमीनियम, लोहा और इस्पात से बने सामान आदि जैसे 4.37 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क में कटौती की गई है ।
- 0.06 प्रतिशत शुल्कदर कोटा के अंतर्गत आते हैं, इनमें मनुका शहद, सेब, कीवी फल और दूध एल्ब्यूमिन सहित एल्ब्यूमिन शामिल हैं।
कृषि उत्पादकता साझेदारी, किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देना
- इस साझेदारी में उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना, बेहतर रोपण सामग्री, उत्पादकों के लिए क्षमता निर्माण, सहयोगात्मक अनुसंधान और बाग प्रबंधन, फसल कटाई के बाद की प्रक्रियाओं, आपूर्ति श्रृंखला प्रदर्शन और खाद्य सुरक्षा के लिए तकनीकी सहायता शामिल है। सेब उत्पादकों और टिकाऊ मधुमक्खी पालन तौर-तरीकों से सम्बंधित परियोजनाएं उत्पादन और गुणवत्ता मानकों को बढ़ाएंगी।
- न्यूजीलैंड से चयनित कृषि उत्पादों (सेब, कीवी फल और मनुका शहद) और एल्ब्यूमिन के लिए बाजार पहुंच को न्यूनतम आयात मूल्य और अन्य सुरक्षा उपायों के साथ शुल्कदर कोटा प्रणाली के माध्यम से प्रबंधित किया जाएगा, इससे घरेलू किसानों की सुरक्षा के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण आयात और उपभोक्ता विकल्प सुनिश्चित होंगे।
- सेब, कीवी और मनुका के लिए सभी शुल्कदर कोटा कृषि उत्पादकता कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन के साथ जुड़े हुए हैं और एक संयुक्त कृषि उत्पादकता परिषद (जेएपीसी) द्वारा निगरानी की जाती है। यह संवेदनशील घरेलू कृषि क्षेत्रों के संरक्षण के साथ बाजार पहुंच को संतुलित करती है।
- मनुका शहद: वर्तमान में लागू शुल्क: 66 प्रतिशत; न्यूजीलैंड से वर्तमान आयात: 14.2 मीट्रिक टन (0.3 मिलियन अमरीकी डॉलर) और विश्व से: 356.8 मीट्रिक टन (1.9 मिलियन अमरीकी डॉलर); कोटा के अंतर्गत आयात मात्रा: 200 मीट्रिक टन प्रति वर्ष, जिसमें 20 अमरीकी डॉलर प्रति किलोग्राम का न्यूनतम आयात मूल्य और 5 वर्षों में 75 प्रतिशत शुल्क कटौती शामिल है; कोटा से बाहर: 30 अमरीकी डॉलर प्रति किलोग्राम का न्यूनतम आयात मूल्य और 5 वर्षों में 75 प्रतिशत शुल्क कटौती शामिल है। शुल्क पहले वर्ष में 56.1 प्रतिशत, दूसरे वर्ष में 46.2 प्रतिशत, तीसरे वर्ष में 36.3 प्रतिशत, चौथे वर्ष में 26.4 प्रतिशत और पांचवें वर्ष से आगे 16.5 प्रतिशत होगा।
- सेब: वर्तमान में लागू शुल्क: 50 प्रतिशत; न्यूजीलैंड से वर्तमान आयात: 31,392.6 मीट्रिक टन (32.4 मिलियन अमरीकी डॉलर) और विश्व से: 519,651.8 मीट्रिक टन (424.6 मिलियन अमरीकी डॉलर); कोटा के भीतर आयात मात्रा: 32,500 मीट्रिक टन (वर्ष 1) जो बढ़कर 45,000 मीट्रिक टन (वर्ष 6) हो जाएगी, 25 प्रतिशत शुल्क और 1.25 अमरीकी डॉलर/किलोग्राम के न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) के साथ (मौसमी अवधि: 1 अप्रैल-31 अगस्त); कोटा से बाहर: लागू प्रचलित शुल्क।
- कीवी फल: वर्तमान में लागू शुल्क: 33 प्रतिशत; न्यूजीलैंड से वर्तमान आयात: 5,840 मीट्रिक टन (16.9 मिलियन अमरीकी डॉलर) और विश्व से: 49,167 मीट्रिक टन (61.4 मिलियन अमरीकी डॉलर); कोटा के भीतर आयात मात्रा: 6,250 मीट्रिक टन (वर्ष 1) जो बढ़कर 15,000 मीट्रिक टन (वर्ष 6) हो जाएगी, 0 प्रतिशत शुल्क और 1.80 अमरीकी डॉलर/किलोग्राम के न्यूनतम आयात मूल्य के साथ (मौसमी अवधि: 1 अप्रैल-15 अक्टूबर); कोटा से बाहर: 50 प्रतिशत और 2.50 अमरीकी डॉलर/किलोग्राम के न्यूनतम आयात मूल्य के साथ।
- दूध एल्ब्यूमिन सहित एल्ब्यूमिन: वर्तमान में लागू शुल्क: 22 प्रतिशत; न्यूजीलैंड से वर्तमान आयात: 3,429.7 मीट्रिक टन (28.9 मिलियन अमरीकी डॉलर) और विश्व से: 18,801.4 मीट्रिक टन (175.3 मिलियन अमरीकी डॉलर); कोटा के भीतर आयात मात्रा: 1,000 मीट्रिक टन (वर्ष 1) जो बढ़कर 3,000 मीट्रिक टन (वर्ष 5) हो जाती है, इस पर कोटा से बाहर: लागू प्रचलित शुल्क 11 प्रतिशत शुल्क लागू होता है।
सेवाएं: न्यूजीलैंड का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव हमारे युवाओं, महिलाओं और पेशेवरों को सशक्त बनाता है।
- न्यूजीलैंड में भारत के लिए लगभग 118 सेवा क्षेत्रों में बाजार पहुंच सम्बंधी प्रतिबद्धताएं हैं, इनमें भारत के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं जैसे कि कंप्यूटर सम्बंधी सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, दृश्य-श्रव्य सेवाएं, अन्य व्यावसायिक सेवाएं, दूरसंचार सेवाएं, निर्माण सेवाएं, वितरण सेवाएं, शिक्षा सेवाएं, पर्यावरण सेवाएं, वित्तीय सेवाएं, पर्यटन और यात्रा संबंधी सेवाएं आदि।
- भारत के प्रमुख हित क्षेत्रों सहित लगभग 139 उप-क्षेत्रों में सबसे पसंदीदा राष्ट्र प्रतिबद्धता लागू है।
कुशल रोजगार के अवसर और वैश्विक अनुभव प्रदान करना:
- एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) कुशल व्यवसायों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों के लिए एक नया अस्थायी रोजगार प्रवेश (टीईई) वीजा मार्ग स्थापित करता है, इसमें किसी भी समय 5,000 वीजा का कोटा होता है और अधिकतम तीन साल तक का प्रवास संभव होता है।
- यह मार्ग आयुष चिकित्सकों, योग प्रशिक्षकों, भारतीय रसोइयों और संगीत शिक्षकों जैसे भारतीय व्यवसायों के साथ-साथ आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और निर्माण जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्रों को भी शामिल करता है, इससे कुशल कार्यबल की गतिशीलता और सेवा व्यापार को मजबूती मिलती है।
भारतीय पेशेवरों, छात्रों और युवाओं के लिए सुगम आवागमन के बेहतर रास्ते
- किसी भी देश के साथ पहली बार , न्यूजीलैंड ने भारत के साथ छात्र गतिशीलता और अध्ययन के बाद कार्य वीजा के लिए एक समर्पित मार्ग बनाया है। यह समझौता भारतीय छात्रों पर संख्यात्मक सीमा को हटाता है, अध्ययन के दौरान प्रति सप्ताह कम से कम 20 घंटे काम की गारंटी देता है, और अध्ययन के बाद विस्तारित कार्य अवसर प्रदान करता है – विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित में स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए तीन वर्ष तक और डॉक्टरेट धारकों के लिए चार वर्ष तक – इससे कौशल विकास और वैश्विक करियर के लिए स्पष्ट मार्ग प्रशस्त होते हैं।
- यह समझौता प्रतिवर्ष 1,000 युवा भारतीयों के लिए 12 महीने की वैधता वाले बहु-प्रवेश कार्य अवकाश वीजा के माध्यम से युवा गतिशीलता को और बढ़ाता है। इससे वैश्विक अनुभव, कौशल अधिग्रहण और लोगों के बीच आपसी संबंध को बढ़ावा मिलता है।
निवेश: हमारे नवप्रवर्तकों, उद्योग और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए 20 बिलियन अमरीकी डॉलर की प्रतिबद्धता
- इस मुक्त व्यापार समझौते में भारत में 20 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश को सुगम बनाने , दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और ‘मेक इन इंडिया’ की परिकल्पना के तहत भारत के विकास और प्रगति के उद्देश्यों का समर्थन करने की प्रतिबद्धता शामिल है ।
- निवेश, अनुसंधान और नवाचार , प्रौद्योगिकी प्रवाह और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त रणनीतियों , विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल सेवाओं और आधुनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में, को पूरी तरह से शामिल किया गया है।
- निवेश वितरण में किसी भी कमी को दूर करने के लिए एक ढांचा प्रदान करने के लिए समझौते में एक पुनर्संतुलन खंड शामिल किया गया है। इसका उद्देशय मजबूत और ठोस आर्थिक परिणाम सुनिश्चित करना है।
विकसित फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस मार्केट में तेजी से प्रवेश: एक बड़ी सफलता
- एफटीए ( मुक्त व्यापार समझौता) यूएस एफडीए, ईएमए, यूके एमएचआरए, हेल्थ कनाडा और अन्य तुलनीय नियामकों द्वारा अनुमोदित जीएमपी और जीसीपी निरीक्षण रिपोर्टों की स्वीकृति को सक्षम बनाकर फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों के लिए पहुंच को सुव्यवस्थित करता है।
- इससे दोहराव वाले निरीक्षण कम होंगे , अनुपालन लागत कम होगी और उत्पाद अनुमोदन में तेजी आएगी। इससे बाजार तक सुगम पहुंच सुनिश्चित होगी और न्यूजीलैंड को भारत के फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण निर्यात में वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
बौद्धिक संपदा अधिकार
- न्यूजीलैंड का मौजूदा जीआई कानून केवल भारत की वाइन और स्पिरिट के पंजीकरण की अनुमति देता है।
- बौद्धिक संपदा के सम्बंध में, न्यूजीलैंड ने समझौते के लागू होने के 18 महीनों के भीतर अपने घरेलू भौगोलिक संकेत कानून में संशोधन करने की प्रतिबद्धता जताई है इसका उद्देश्य भारत की शराब, स्पिरिट और ‘अन्य वस्तुओं‘ का पंजीकरण सक्षम करना है, इसके साथ ही भारत को वही प्राथमिकता प्रदान करवाना है जो पहले यूरोपीय संघ को दी जाता थी।
- इससे न्यूजीलैंड के बाजार में प्रतिष्ठित भारतीय सैनिकों को औपचारिक संरक्षण प्रदान करने का रास्ता खुल जाता है ।
लघु एवं मध्यम उद्यमों, महिला उद्यमियों, इनक्यूबेटरों और वैश्विक मूल्य श्रृंखला एकीकरण को बढ़ावा देना
- यह समझौता समावेशी और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण से तैयार किया गया है, श्रम-प्रधान क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और रोजगार को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने की उम्मीद है।
- व्यापार बाधाओं में कमी और नियामकीय निश्चितता से वस्त्र, परिधान, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, खाद्य प्रसंस्करण और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए भारतीय विनिर्माण और वैश्विक मूल्य श्रृंखला एकीकरण को मजबूती मिलेगी।
- लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए संरचित सहयोग में व्यापार से सम्बंधित जानकारी तक बेहतर पहुंच, निर्यात तत्परता कार्यक्रम और न्यूजीलैंड के एसएमई इकोसिस्टम के साथ सम्बंध शामिल हैं। इसमें विशेष रूप से स्टार्टअप और महिलाओं और युवाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- किसानों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप्स, छात्रों और पेशेवरों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं तक बेहतर पहुंच, व्यापार बाधाओं में कमी और विकास और नवाचार के लिए बेहतर अवसरों से लाभ होने की उम्मीद है।
उत्पत्ति के नियम: एक संतुलित और सुदृढ़ ढांचा
- यह समझौता उत्पाद विशिष्ट उत्पत्ति नियमों (पीएसआर) के लिए एक संतुलित और मजबूत ढांचा प्रदान करता है। यह दोनों पक्षों के क्षेत्रों के भीतर पर्याप्त परिवर्तन सुनिश्चित करता है और प्रमुख क्षेत्रों की मौजूदा आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ संरेखित रहता है।
- इन नियमों के पूरक के रूप में गैर-पात्रतापूर्ण और न्यूनतम संचालन सम्बंधी प्रावधान हैं, साथ ही एक व्यापक, समयबद्ध और मजबूत सत्यापन तंत्र भी है। इसमें तरजीही शुल्कव्यवहार से इनकार करने और अस्थायी रूप से निलंबित करने के प्रावधान शामिल हैं।
- ये सभी उपाय मिलकर मूल नियमों के मानदंडों के उल्लंघन, दुरुपयोग या जालसाजी को प्रभावी ढंग से रोकते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि समझौते का लाभ केवल वास्तविक भारतीय निर्यातकों को ही मिले।
व्यापारिक उपाय: भारत के घरेलू उद्योग की सुरक्षा
- यह समझौता डंपिंग-विरोधी, सब्सिडी और प्रतिपूरक उपायों तथा वैश्विक सुरक्षा उपायों पर डब्ल्यूटीओ समझौतों के तहत दोनों पक्षों की प्रतिबद्धताओं की पुष्टि करता है।
- यदि एफटीए से किसी घरेलू उद्योग को गंभीर क्षति पहुंचती है या पहुंचने का खतरा होता है तो एक द्विपक्षीय सुरक्षा तंत्र का प्रावधान है जो इस समझौते के तहत शुल्क कटौती के परिणामस्वरूप आयात में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में लागू किया जा सकता है।
- उपलब्ध उपायों में शुल्क में और कटौती को निलंबित करना या शुल्क दरों में वृद्धि करना शामिल है। ये प्रचलित एमएफएन लागू दर या समझौते के लागू होने के समय लागू एमएफएन दर में से जो भी कम हो, उससे अधिक नहीं होगी।
निर्यात विनिर्माण, सीमा शुल्क प्रक्रिया और व्यापार सुविधा के लिए उपयोग की जाने वाली आयात सम्बंधी त्वरित प्रक्रिया व्यवस्था:
- मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) में लेन-देन की लागत को कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने और सीमा प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने के लिए व्यापार सुविधा उपायों का एक व्यापक समूह शामिल है।
- मानक कार्गो निकासी 48 घंटों के भीतर करने का वादा किया गया है, जबकि एक्सप्रेस शिपमेंट और नाशवान वस्तुओं की निकासी 24 घंटों के भीतर की जाती है।
- इस समझौते में अधिकृत आर्थिक संचालकों, स्वचालन और कागज रहित एकल-खिड़की मंजूरी प्रणालियों का प्रावधान है।
- निर्यात विनिर्माण के लिए इनपुट के रूप में काम करने वाले आयात के लिए तेज गति से काम करने वाले तंत्र यह सुनिश्चित करते हैं कि शुल्क रियायतें विशेष रूप से एमएसएमई और कृषि निर्यातकों के लिए प्रभावी बाजार पहुंच में बदलें।
- इससे सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण होता है, इससे व्यापार भागीदारों के बीच व्यापार में पूर्वानुमान, पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित होती है।
सुरक्षित और सुगम व्यापार के लिए स्मार्ट विनियमन: स्वच्छता और पौध-स्वच्छता उपाय
- इस समझौते में स्वच्छता और पादप स्वच्छता (एसपीएस ) और व्यापार में तकनीकी बाधाओं (टीबीटी) के लिए समर्पित अध्याय शामिल हैं जो पारस्परिक आधार पर बाजार पहुंच आवेदनों की त्वरित प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं, प्रमाणीकरण और आयात परमिट प्रक्रियाओं को सरल बनाते हैं, और इलेक्ट्रॉनिक एसपीएस प्रमाणीकरण का प्रावधान करते हैं।
- टीबीटी अध्याय के तहत बढ़ी हुई नियामक सहयोग और पारदर्शिता, शुल्क से परे प्रक्रियात्मक बाधाओं को कम करती है। इससे भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से खाद्य, कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों में, न्यूजीलैंड के बाजार में पूर्वानुमानित और लागत प्रभावी पहुंच सुनिश्चित होती है।
- ये नियम मानव, पशु और वनस्पति जीवन या स्वास्थ्य की सुरक्षा और वस्तुओं के व्यापार को सुगम बनाने के बीच सबसे बढ़िया संतुलन सुनिश्चित करते हैं।
- न्यूजीलैंड के उच्च नियामक मानकों को देखते हुए, यह मान्यता वैश्विक बाजार तक पहुंच को काफी हद तक बढ़ाएगी, लेनदेन लागत को कम करेगी और आवश्यक स्वास्थ्य और सुरक्षा सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करते हुए सुगम बाजार पहुंच को सुविधाजनक बनाएगी।
अग्रणी आर्थिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी
- एफटीए दोनों पक्षों को कृषि और गैर-कृषि से संबंधित विभिन्न विषयगत क्षेत्रों में सहयोगात्मक गतिविधियों में संलग्न होने के अवसर प्रदान करता है।
- सहकारी गतिविधियों में क्षमता निर्माण, तकनीकी सहायता और उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय बढ़ाने में सहायता करने, कौशल विकास और व्यापार से परे अनुसंधान और विकास, प्रशिक्षण और नवाचार में सहयोग के विविधीकरण के लिए अन्य पहलें शामिल हैं।
- कृषि के अंतर्गत सहयोग के क्षेत्रों में बागवानी, शहद उत्पादन, वानिकी, पशुधन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और शराब क्षेत्र शामिल हैं।
- गैर-कृषि क्षेत्रों में, सहयोग पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों (आयुष), पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, दृश्य-श्रव्य और रचनात्मक उद्योगों, खेल और पर्यटन तक फैला हुआ है। इसका उद्देश्य सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय नवाचार को मजबूत करना है।
सांस्कृतिक व्यापार, पारंपरिक ज्ञान और जन-सहयोग: मुक्त व्यापार समझौतों में एक अभूतपूर्व पहल
- संस्कृति, व्यापार, पारंपरिक ज्ञान और आर्थिक सहयोग पर समर्पित एक अध्याय दोनों पक्षों के लोगों की आर्थिक और सांस्कृतिक आकांक्षाओं को सक्षम बनाने और आगे बढ़ाने के लिए पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देता है।
- न्यूजीलैंड ने अपने व्यापार समझौतों में पहली बार स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के लिए एक विशेष प्रावधान शामिल किया है। यह ऐतिहासिक प्रावधान भारत की आयुष प्रणालियों की वैश्विक मान्यता को बढ़ावा देता है , चिकित्सा सम्बंधी यात्रा को प्रोत्साहित करता है, स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग को बढ़ावा देता है और स्वास्थ्य, कल्याण और पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करता है।
- यह भारत के आयुष विषयों (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सोवा-रिग्पा, सिद्धा और होम्योपैथी) के साथ-साथ माओरी स्वास्थ्य पद्धतियों को भी प्रमुखता देता है ।
- यह दृश्य-श्रव्य और रचनात्मक उद्योगों में सहयोग को बढ़ावा देता है, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, खेल और पर्यटन के संरक्षण को प्रोत्साहित करता है, और भारत-न्यूजीलैंड सम्बंधों के सांस्कृतिक और मानवीय आयामों को मजबूत करता है।
- इससे रचनात्मक उद्योगों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जन-केंद्रित विकास के लिए नए रास्ते खुलते हैं ।
पारस्परिक मान्यता समझौते के माध्यम से जैविक उत्पादों का व्यापार: हिंद-प्रशांत क्षेत्र का प्रवेश द्वार
- इस समझौते के तहत एक प्रारंभिक कदम के रूप में, पारस्परिक मान्यता व्यवस्था (एमआरए ) को लागू किया जाएगा, यह किसी तीसरे देश (ऑस्ट्रेलिया) के पारस्परिक रूप से स्वीकृत मानक की स्वीकृति पर आधारित है।
- भारत वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 80 से अधिक जैविक उत्पादों का निर्यात कर रहा है। इसी अवधि में, भारत से न्यूजीलैंड को कुल जैविक निर्यात 2,401.53 मीट्रिक टन रहा, इसका मूल्य 3.18 मिलियन अमरीकी डॉलर था। पारस्परिक मान्यता समझौते (एमआरए) के बाद बासमती चावल, अलसी, अरेबिका चेरी, इसबगोल, सोयाबीन तेल खली, जैविक काली चाय आदि जैविक उत्पादों की मांग में और वृद्धि होने की आशा है।
द्विपक्षीय व्यापार: प्रबल गति, अपार संभावनाएं
- वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 2024 में 2.4 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया। भारत-न्यूजीलैंड द्विपक्षीय व्यापार ने हाल के वर्षों में मजबूत वृद्धि दर्ज की है, वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 1.3 अरब अमरीकी डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष के व्यापार की तुलना में 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
- एफटीए पर हस्ताक्षर होने के बाद, शुल्कसमाप्त होने, सेवाओं तक पहुंच बढ़ने, 20 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश को सुरक्षित करने और मजबूत संस्थागत ढांचे की स्थापना के साथ, भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होने, रोजगार के अवसर पैदा होने, निर्यात बढ़ने और दोनों देशों के बीच एक गहरी और अधिक लचीली आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की आशा है।
खेती-बाड़ी, मत्स्य पालन से लेकर कारखानों तक: सौदे की शक्ति प्रमुख क्षेत्रों और राज्यों को प्रभावित करती है
शून्य शुल्क वाले बाज़ार पहुंच से भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा। निर्यात का एक मुख्य आधार माने जाने वाले वस्त्र और परिधान क्षेत्र में, परिधान, घरेलू साज-सज्जा, रेशे और हथकरघा उत्पादों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उच्च वृद्धि और रोजगार सृजन देखने को मिलेगा। फलों, मसालों, अनाज, कॉफी और कोको जैसे उत्पादों पर शुल्क समाप्त होने से कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। चमड़ा और जूते-चप्पल क्षेत्र को भी अधिकतम शुल्क हटाने से लाभ होगा, इससे भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत होगी। साथ ही, मशीनरी, ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, प्लास्टिक और रबर सहित इंजीनियरिंग, विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों को भी शुल्क कटौती से लाभ होगा, इससे भारत का विविध निर्यात आधार मजबूत होगा और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में इसका गहरा एकीकरण होगा।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता व्यापक लाभ प्रदान करने के लिए तैयार है। यह भारत के निर्यात परिदृश्य की विविधतापूर्ण और विशिष्ट प्रकृति को दर्शाता है। गुजरात के रसायन और रत्न, महाराष्ट्र के फार्मास्यूटिकल्स और ऑटो कंपोनेंट्स, तमिलनाडु के वस्त्र, चमड़ा और ऑटो कल-पुर्जे, उत्तर प्रदेश के चमड़ा, कालीन और हस्तशिल्प, पंजाब के कृषि उत्पाद, कर्नाटक के फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स, और पश्चिम बंगाल के चाय और इंजीनियरिंग सामान जैसे प्रमुख निर्यातक राज्यों को बेहतर मूल्य प्रतिस्पर्धा से लाभ मिलने की संभावना है। आंध्र प्रदेश और केरल जैसे तटीय राज्यों को समुद्री निर्यात से अधिक मूल्य प्राप्त होने की संभावना है। इसके साथ ही उत्तर-पूर्वी राज्यों को चाय, मसाले, बांस और जैविक उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच मिल सकती है। कुल मिलाकर, इस समझौते से भारत के निर्यात प्रोफाइल में और अधिक विविधता और मजबूती आने की आशा है।
In a message, PM @narendramodi said that the India-New Zealand FTA marks a major milestone towards deeper global engagement and shared prosperity.
It strengthens economic ties between two vibrant democracies, unlocking opportunities for farmers, artisans, youth, entrepreneurs,… pic.twitter.com/zglAERVVcj
— PMO India (@PMOIndia) April 27, 2026
Today marks a landmark moment in the India-New Zealand partnership!
I am delighted that the India-New Zealand FTA signed today will add unprecedented momentum to our developmental partnership. It reflects the deep trust, shared values and ambition that bind our two nations.… https://t.co/WBHn4gb1yB
— Narendra Modi (@narendramodi) April 27, 2026
India and New Zealand, under the leadership of PM @NarendraModi ji and PM of New Zealand Mr. @ChrisLuxonMP, have signed the #IndiaNZFTA, India’s first women-led Free Trade Agreement and a defining milestone in our bilateral economic journey.
Successfully concluded in a record… pic.twitter.com/N6hSGKg4fL
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) April 27, 2026
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