बांग्लादेश नेशनल हिंदू महाजोत के एक डेलीगेशन ने, सेंट्रल एग्जीक्यूटिव कमेटी के जनरल सेक्रेटरी मृत्युंजय कुमार रॉय के नेतृत्व में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास के घर का दौरा किया, जिसे 18 दिसंबर को बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में भीड़ ने लिंच कर दिया था. डेलीगेशन ने गुरुवार को जिले के मोकामियाकंडा गांव में पीड़ित के परिवार वालों से मुलाकात की और उनका हालचाल पूछा और दुखी परिवार के प्रति गहरी संवेदना और हमदर्दी जताई.
हिंदू महाजोत की टीम पहुंची परिवार से मिलने
महाजोत के सेंट्रल लीडर्स ने कहा कि बिना सबूत के झूठे आरोप लगाकर एक बेकसूर, मजबूर इंसान को इतनी बेरहमी से मारना और शव को जलाना किसी भी तरह कबूल नहीं किया जा सकता. उन्होंने इसे जघन्य अपराध बताया और कहा कि अफवाह या धार्मिक मतभेद हिंसा का बहाना नहीं बन सकते. कोई भी कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता. दीपू के पिता रबीचंद्र दास ने टीम को बताया कि बेटा घर का इकलौता कमाने वाला था, अब परिवार की हालत बहुत खराब है. वे अपने बेटे के लिए न्याय चाहते हैं.
मदद और न्याय का वादा
महाजोत की तरफ से परिवार को 50 हजार बांग्लादेशी टका (लगभग 35 हजार रुपये) नकद मदद दी गई. लीडर्स ने भरोसा दिलाया कि दीपू को न्याय जरूर मिलेगा और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए लड़ाई जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि सरकार को पीड़ित परिवार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और उनकी गुजर-बसर का इंतजाम करना चाहिए. टीम में सेंट्रल सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मिथु रंजन देब, वाइस प्रेसिडेंट तारक चंद्र रॉय, एग्जीक्यूटिव मेंबर मोहन चंद्र सरकार और स्टूडेंट महाजोत के तनय सुत्रधार व प्रांतो सुत्रधार शामिल थे.
क्यों जरूरी है न्याय?
यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठाती है. महाजोत लीडर्स ने जोर दिया कि राज्य को ऐसी हिंसा रोकनी होगी, वरना आम लोग डर में जीने लगेंगे. परिवार अब अकेला पड़ गया है, लेकिन हिंदू संगठन उनके साथ खड़े हैं. उम्मीद है कि जांच पूरी हो और दोषियों को सजा मिले.
