DNA Analysis: आपको याद होगा आज से ठीक दो दिन पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था. इस पोस्ट में ईरान के प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने लिखा था, आप आगे बढ़ो मदद जल्द पहुंचने वाली है. इस पोस्ट के बाद ट्रंप ने ये बयान भी दिया था कि अगर ईरान ने किसी प्रदर्शनकारी की हत्या की या उसे फांसी दी तो अमेरिका हमला करेगा. ट्रंप के इस बयान का ईरान पर कितना असर हुआ था. ये भी आपको बेहद गौर से समझना चाहिए.

ट्रंप का बयान आते ही खामेनेई सरकार ने प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी की फांसी की सजा टाल दी थी. इरफान सुल्तानी के बाद ईरान में 800 प्रदर्शनकारियों को भी सुप्रीम लीडर से माफी मिल गई है. यानी इन प्रदर्शनकारियों को भी फांसी नहीं दी जाएगी. इतना ही नहीं खामेनेई सरकार के प्रतिनिधियों ने ट्रंप को ये आश्वासन भी दिया है कि  प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त बलप्रयोग नहीं किया जाएगा.

हमला टाल दिया
ऊपरी तौर पर देखें तो यही समझ में आता है कि ईरान ने ट्रंप की ईगो को ठेस नहीं पहुंचाई, जिसकी वजह से अमेरिका ने ईरान पर हमले का फैसला टाल दिया. अगर आप गौर से देखेंगे तो आपको समझ आ जाएगा कि ईरान पर ट्रंप की नरमी की वजह सिर्फ प्रदर्शनकारियों को अभयदान देना नहीं है. अब हम आपको पर्दे के पीछे की वो कहानी बताने जा रहे हैं जो खुद बयां करेगी आखिर ट्रंप ने रहम किया या फिर नया जाल बुना. ट्रंप के इस प्लान को डीकोड करने के लिए आपको थोड़ा फ्लैशबैक में जाना होगा.

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इजरायल की दलील
13 जनवरी को मिडिल ईस्ट में अमेरिका के मित्र देशों यानी सऊदी अरब, UAE और कतर ने ट्रंप से हमला ना करने की अपील की थी. अरब देशों की दलील थी कि हमले के प्रतिशोध में ईरान इन देशों को निशाना बना सकता है . 14 जनवरी को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ट्रंप के बीच बातचीत हुई थी. नेतन्याहू ने भी यही कहा था कि ईरान पर हमले को कुछ वक्त के लिए टाल देना चाहिए. इजरायल की दलील थी कि उसकी हवाई रक्षा प्रणाली अभी उस स्तर तक नहीं पहुंच पाई है जहां वो ईरानी हमलों को पूरी तरह रोक सके.

ईरान की मिसाइल
एक कहावत है, जो डरता है वो बहाना बनाता है और जो निडर है वो रास्ता बनाता है. ट्रंप ने फांसी टालने वाले आश्वासन पर हमला रोककर सिर्फ बहाना बनाया है. असल वजह ट्रंप के अंदर ईरान की मिसाइल पावर का डर है जो अमेरिका के मित्र देशों को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है. इसी वजह से ट्रंप ने युद्ध का रास्ता नहीं चुना है. आगे बढ़ने से पहले आपको ईरान की उस मिसाइल पावर के बारे में जानना चाहिए जिसने ट्रंप को युद्ध के रास्ते पर कदम नहीं बढ़ाने दिए.

इसलिए टाला हमला
अंतरराष्ट्रीय सामरिक आंकलनों के अनुसार ईरान हर महीने तकरीबन 50 मिसाइलों का निर्माण कर रहा है. फिलहाल ईरान के तरकश में 3 हजार से ज्यादा बैलेस्टिक मिसाइल हैं. इन मिसाइलों में कुछ हाइपरसोनिक भी हैं. ईरान की अधिकतर मिसाइलों की रेंज 1500 से लेकर 2 हजार किलोमीटर तक है. 2 हजार किलोमीटर की रेंज वाली ये मिसाइलें अमेरिका तक तो नहीं पहंच सकती. इसका एक ही मतलब है कि बदला लेने के लिए ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाता. इजरायल जैसे देश के पास भी हजारों बैलेस्टिक मिसाइलों को रोकने की क्षमता नहीं है. यही वो फैक्टर्स हैं जिनकी वजह से ट्रंप ने ईरान पर हमले का फैसला फिलहाल टाल दिया है.

मोसाद चीफ अमेरिका पहुंचे 
ट्रंप ने हमले का फैसला टाल दिया है लेकिन बड़ा सवाल ये है क्या ट्रंप ने ईरान पर हमले का इरादा भी टाल दिया है. ट्रंप की शख्सियत देखकर तो यही लगता है कि ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों के लिए कुछ और समय खरीदा है लेकिन खामेनेई के शासन को जड़ से उखाड़ना अब भी ट्रंप का एकमात्र मकसद है. हम ऐसा क्यों कह रहे हैं ये समझने के लिए आपको अब से 3 घंटे पहले आया एक अपडेट ध्यान से देखना चाहिए. ईरान पर हमले का फैसला टालने के ठीक बाद इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के चीफ डेविड बार्निया वॉशिंगटन पहुंच गए हैं. व्हाइट हाउस के दफ्तर में डेविड की मुलाकात ट्रंप के विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ से हुई है. अमेरिकी मीडिया के मुताबिक मोसाद चीफ पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मिलेंगे.

मोसाद का प्लान
जब-जब मोसाद के चीफ व्हाइट हाउस आते हैं तो उसके बाद बड़ी घटनाएं देखने को मिलती हैं. वर्ष 1967 में मोसाद चीफ व्हाइट हाउस आए थे तो इजरायल ने अरब देशों पर हमला कर दिया था और 6 दिनों का युद्ध शुरु हो गया था. वर्ष 2025 में जब वर्तमान मोसाद चीफ डेविड बार्निया व्हाइट हाउस आए थे तो ईरान के परमाणु संयंत्रों पर अमेरिका ने बमबारी कर दी थी. इसी वजह से माना जा रहा है कि डेविड बार्निया की इस यात्रा के बाद भी कुछ बड़ा हो सकता है. मोसाद और पेंटागन आगे ईरान के खिलाफ क्या कर सकते हैं. अब हम इन्हीं संभावनाओं के बारे में बताएंगे. 

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ट्रंप जिद्दी इंसान

सबसे पहली संभावना ये नजर आती है कि अपने खुफिया नेटवर्क के जरिए मोसाद ईरान में जारी बगावत को ज्यादा भड़काए. जो प्रदर्शनकारी अब तक सिर्फ हाथों में पोस्टर लेकर निकल रहे हैं उनके हाथों में हथियार थमा दिए जाएं. दूसरी संभावना ये है कि 2025 में जिस तरह मोसाद ने ईरान के टॉप सैन्य अधिकारियों को मार दिया था. उसी तरह ईरान के बड़े राजनीतिक किरदारों की हत्या कर दी जाए ताकि खामेनेई का इस्लामिक शासन कमजोर पड़ जाए. तीसरी और सबसे बड़ी संभावना ये है कि ईरान पर हमले को टालने के बाद जो वक्त मिला है उसमें इजरायल और अमेरिका के सहयोगी देश अपने सुरक्षा ढांचे को मजबूत करें. एक बार जब एयर डिफेंस मजबूत हो जाएगा तो ट्रंप सीधे ईरान पर हमला कर पाएंगे. ट्रंप एक जिद्दी शख्स हैं, ऐसे व्यक्तियों के लिए कहा जाता है कि वो जो ठान लेते हैं उसे पूरा करने के लिए किसी भी हद को पार कर जाते हैं. इसी वजह से कहा जा रहा है कि आज नहीं तो कल ईरान पर ट्रंप हमला जरूर करेंगे.