DNA Analysis: पाकिस्तान में बलोच महिलाएं अब पीड़ित से आजादी की लड़ाई लड़ने वाली योद्धा बन गई हैं, एक दौर था जब बलोच महिलाएं जबरन गुमशुदगी, सैन्य छापों, धमकी और अपमान की पीड़ित थीं. उनके पिता, भाई और पति को पाकिस्तानी सैनिक उठा ले जाते थे. बाद में ना उनकी लाश मिलती थी ना केस दर्ज होता था और ना कोई इन महिलाओं के सवाल का जवाब देता था. बाद में ये महिलाएं अपने परिजनों की फोटो लेकर सड़कों पर उतरने लगीं. उनको लौटाने की अपील करने लगीं, लेकिन अत्याचार कम नहीं हुआ. बाद में आवाज उठाने वाली महिलाएं भी अगवा होने लगीं.

बलोचिस्तान में 43 हजार से ज्यादा लोग लापता हैं. जिनको पाकिस्तान की सेना ले गई और उनका कुछ पता नहीं चला इसमें हजारों की संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं. हारकर ये बलोच महिलाएं अब अपनों की मौत का बदला ले रही हैं. बलोचिस्तान में ऐसा दर्द किसी एक महिला का नहीं और ना ही हवा बलोच ओर आसिफा मेंगल पहली आत्मघाती हैं. इससे पहले 2022 में शारी बलोच ने कराची यूनिवर्सिटी के पास फिदायीन अटैक किया था. इसके बाद 2024 में सुमैया बलोच ने पाकिस्तान के सैनिकों पर फिदायीन हमला बोला था. लेकिन अब बड़ी संख्या में पढ़ी लिखी बलोच महिलांए आत्मघाती यूनिट में शामिल हो गई हैं.

हमले से हिली पाकिस्तानी सेना 

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पाकिस्तान की सरकार और सेना इस हमले से बुरी तरह हिल गई है. लेकिन पाकिस्तान की सेना के सबसे बड़े सहयोगियों की आंखों में इस हमले के बाद खौफ नजर आ रहा है. पाकिस्तान के ये सहयोगी वो आतंकी हैं, जिनके जरिए वो भारत में खून खराबा करवाता है. आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा के कमांडर राणा मोहम्मद अशफाक  ने पाकिस्तान की सरकार और सेना को इस हमले के बाद आगाह किया और बीएलए को कुचलने की सलाह दी. आज आपको पाकिस्तान की सेना के हमदर्द एक आतंकी के बयान को बहुत ध्यान से सुनना चाहिए. जिसमें उसका डर और दर्द दोनों छिपा है.

बलोचिस्तान का कंट्रोल अब पाक सरकार की हाथ से निकल गया? 

जो आतंकी पूरी जिंदगी सिर्फ लोगों का खून बहाने का प्लान बनाते रहते हैं. वो किस तरह बीएलए पर हमले के बाद दुखी हैं. ये आतंकी पाकिस्तान की सेना को चेतावनी दे रहा है. जब बीएलए के लड़ाके हमला करते हैं, तो बलोचिस्तान के लोग उनके साथ खड़े नजर आते हैं. यानी बलोचिस्तान का कंट्रोल अब पाकिस्तान की सरकार और सेना के हाथ से निकल गया है. ये आतंकी पाकिस्तान की सेना को सलाह दे रहा है कि बलोचों को कुचलना जरूरी है. इस आतंकी को अब डर सता रहा है. कहीं पब्लिक के सपोर्ट से बीएलए बलोचिस्तान को आजाद ना करवा दे. पाकिस्तान कई टुकड़ों में ना बिखर जाए ये आजादी के लिए लड़ रहे बलोच लड़ाकों को आतंकी कह रहा है. लेकिन सच्चाई ये है जिस आतंकी संगठन यानी लश्कर ए तैयबा के लिए वो काम करता है. उसने मुंबई आतंकी हमलों समेत पर भारत पर कई हमले किए हैं, जिसमें 2 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और उसके संगठन को यूएन ने भी आतंकी संगठन घोषित कर रखा है. वैसे इस हमले से सिर्फ पाकिस्तानी आतंकियों को दर्द नहीं हो रहा. पाकिस्तान के कुछ नए शुभचिंतक भी इस हमले से चिंतित हैं क्योंकि उनके हित भी खतरे में आ गए हैं.

 

BLA को अमेरिका मानता है आतंकवादी संगठन

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कुछ दिनों पहले शहबाज और मुनीर से काफी करीबी मित्रता दिखाई थी. पाकिस्तान से गाजा पीस डील पर साइन भी करवा लिया. अब बलोचों के बड़े हमले के बाद पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास ने इसे आतंकी हमला कहा है और ये भी बताया है. जिस संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली है. यानी BLA को अमेरिका ने आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है. चीन की तरफ से भी ऐसा ही बयान आया है. आज आपको समझना चाहिए चीन के लिए बलोच हमले क्यों बड़ी परेशानी हैं?

  • इस हमले के बाद पहले से फंसा चीन का CPEC और खतरे में आ गया है. चीन ने पाकिस्तान में 62 अरब डॉलर का निवेश किया है.

  • अगर ग्वादर और सड़कें असुरक्षित रहीं, तो ये निवेश भी फंसेगा और पाकिस्तान चीन इकोनॉमिक कॉरिडोर पर आधारित BRI की साख को बड़ा झटका लगेगा.

  • इसके अलावा ग्वादर के असुरक्षित होने से चीन का एनर्जी प्लान भी फेल हो जाएगा . चीन, बलोचिस्तान के ग्वादर पोर्ट के ज़रिये मलक्का स्ट्रेट के रूट से बचना चाहता है. चीन का 60 फीसदी तेल इसी रूट से आता है और ग्वादर इसका विकल्प बन सकता है, लेकिन बलोचों के हमले से ग्वादर अस्थिर हुआ तो चीन की ऊर्जा सुरक्षा कमजोर पड़ेगी.

  • BLA सीधे चीनी इंजीनियरों और वर्कर्स पर हमले कर रहा है. इससे चीन को अपने लोगों की सुरक्षा की चिंता भी सता रही है.

  • बलोच हमले दिखाते हैं कि चीन के प्रोजेक्ट में स्थानीय लोगों को नज़रअंदाज़ किया गया. इससे दूसरे देशों में भी BRI पर भरोसा कम हो सकता है.

  • ऐसे हमलों की वजह से चीन पाकिस्तान में बनाए गए संस्थानों में अपनी  सुरक्षा कंपनियाँ लाना चाहता है. यह पाकिस्तान की संप्रभुता पर दबाव और रिश्तों में तनाव पैदा करता है.

हालांकि बलोच विद्रोहियों का चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर पर हमला अमेरिकी रणनीति को सूट करता है. इसलिए पाकिस्तान में कई लोग बलोच विद्रोहियों के हमले को अमेरिका प्रायोजित भी मानते हैं . अमेरिका नहीं चाहता कि चीन अरब सागर में मजबूत हो. लेकिन ग्वादर को लेकर अस्थिरता से पूरा क्षेत्र और असंतुलित होता है. और अब अमेरिका ने भी बलोचिस्तान में निवेश कर दिया है.

  • पूरे बलोचिस्तान में हो रहे हमले से अमेरिकी निवेश खतरे में आ गया है.

  • बलोचिस्तान में स्थित दुनिया के सबसे बड़े तांबा–सोना खनन क्षेत्र Reko Diq में अमेरिका ने 7 बिलियन डॉलर का निवेश किया है.

  • बलोचिस्तान में सुरक्षा बिगड़ी तो अमेरिकी कंपनियों का निवेश डूब जाएगा

  • अमेरिका की नजर बलोचिस्तान के रेयर मिनरल्स पर है. अगर हिंसा बढ़ी तो अमेरिका की संभावित सप्लाई चेन प्रभावित होगी.

  • बलोचिस्तान… ईरान, अफगानिस्तान और अरब सागर से जुड़ा है. यहाँ हिंसा बढ़ी तो मिडिल ईस्ट और इंडो-पैसिफिक दोनों हिलेंगे. जो ईरान से वॉर के खतरे के बीच अमेरिका को सूट नहीं करता.

OIC ने भी बलोचिस्तान में हुए आतंकी हमलों की निंदा की

चीन और अमेरिका के अलावा इस्लामिक देशों के संगठन OIC ने भी बलोचिस्तान में हुए आतंकी हमलों की निंदा की. OIC ने कहा कि पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत में जिन इलाकों को निशाना बनाया गया, वे आतंकवादी हमले हैं. और वह पाकिस्तान की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने के प्रयासों के साथ खड़ा है. हालांकि यही OIC पहलगाम के हमले पर चुप्पी साध लेता है. धर्म पूछकर हत्या करने वाले आतंकियों और उनके प्रायोजकों के खिलाफ उसकी कोई टिप्पणी सामने नहीं आती.  बलोच नेताओं ने भी ओआईसी को इस बेशर्मी के लिए बेइज्जत किया है. बलोच नेताओं ने सवाल किया है. पाकिस्तान ने 50,000 बलोच लोगों को जबरन गायब कर दिया. इस पर ओआईसी का कोई बयान नहीं आया, लेकिन अब वो पाकिस्तान से बलोचों की आजादी की लड़ाई को आतंक बता रहा है. ये सवाल बड़ा है. जो 50 हजार बलोच गायब हुए वो भी मुसलमान थे. उन पर खामोशी OIC की सुविधा की राजनीति की पोल खोलती है.