Iran-Israel War: बुधवार का दिन ईरान के लिए ब्लैक WedNesday भी साबित हो सकता है. मिडिल ईस्ट इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है. नए नए हथियार तैनात किए जा रहे हैं और ऐसे माहौल में बुधवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वॉशिंगटन पहुंचे. डॉनल्ड ट्रंप के दूसरी बार अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद नेतन्याहू का ये सातवां अमेरिकी दौरा है. यानी लगभग हर दो महीने में एक बार नेतन्याहू अमेरिका पहुंच जाते हैं.

 लेकिन नेतन्याहू के इस दौरे पर  सारी दुनिया की निगाहें टिकी हैं क्योंकि व्हाइट हाउस में डॉनल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के बीच एक गुप्त मीटिंग होगी, जिसमें ईरान पर हमले का आखिरी प्लान तैयार होगा. अब समझिए कि इस मीटिंग में नेतन्याहू ट्रंप को कौन कौन सी बड़ी जानकारियां देने वाले हैं, जिस वक्त अमेरिका में ईरान की किस्मत का फैसला हो रहा है. उस वक्त तेहरान में क्या चल रहा है, जिस देश ओमान ने अमेरिका और ईरान के बीच समझौता करवाने का बीड़ा उठाया था, उसकी राजधानी मस्कट में क्या हो रहा है. 

इस मीटिंग के दौरान मिडिल ईस्ट के अमेरिकी सैन्य ठिकानों और तेल के दामों में हो रहा बदलाव दुनिया को किस बड़ी मुसीबत का संकेत दे रहा है, लेकिन सबसे पहले जानिए नेतन्याहू के वॉशिंगटन दौरे पर क्या क्या हुआ.

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इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू जब इजरायल से अमेरिका के लिए निकले थे तो उन्होंने साफ साफ कहा था कि इस दौरे में सबसे प्रमुख ईरान का मुद्दा होगा. और वॉशिंगटन में उतरने के बाद नेतन्याहू ने सबसे पहले डॉनल्ड ट्रंप के उन दूतों से मुलाकात की, जो ओमान में ईरान से समझौते की बातचीत में अमेरिकी वार्ताकार थे. स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से नेतन्याहू की मुलाकात ट्रंप से मुलाकात से पहले हुई.

इस मुलाकात के दौरान नेतन्याहू ने विटकॉफ से पूछा. इजरायल की शर्तों पर ईरान का रुख क्या था ? क्या ईरान अपनी मिसाइलों की रेंज 300 किलोमीटर तक घटाने को तैयार होगा ? विटकॉफ का जवाब वही था जो ईरान के नेता वार्ता के बाद लगातार कहते रहे हैं. यानी ईरान मिसाइल की प्रतिरोधक क्षमता नहीं छोड़ेगा. 

इसके बाद विटकॉफ ने नेतन्याहू को ओमान में हुई इनडायरेक्ट वार्ता की पूरी जानकारी दी. इस मुलाकात के बाद नेतन्याहू पूरी तरह से क्लियर हो गए. उनको ट्रंप से क्या बात करनी है.

वॉशिंगटन यात्रा से पहले नेतन्याहू ने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद को एक काम सौंपा था. मोसाद को जंग की शुरुआत से पहले ईरान की मिलिट्री ताकत की पूरी मैपिंग करनी थी. ईरान के बड़े बड़े दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को पता लगाना था. नेतन्याहू इस पूरी जानकारी की फाइल लेकर ट्रंप के साथ बैठेंगे और ट्रंप को ईरान पर फौरन हमले के लिए राजी करने की कोशिश करेंगे. इजरायल पहले ही कह चुका है कि अगर ईरान ने मिसाइल की रेड लाइन पार की तो वो अमेरिका के सहयोग बगैर भी ईरान पर हमला कर देगा. अब ईरान ने ये रेड लाइन पार कर दी है. एक तरफ नेतन्याहू वॉशिंगटन की तरफ प्लेन से उड़ान भर रहे थे. दूसरी तरफ ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड की रॉकेट फोर्स ने एक नई मिसाइल का टेस्ट किया. 

इजरायल के सूत्रों के मुताबिक अब ईरान ने पूरे मिडिलईस्ट में कहीं भी हमला करने की ताकत हासिल कर ली है. और ये ताकत ईरान और अमेरिका दोनों के लिए खतरनाक है. इसलिए कहा जा रहा है. ईरान के लिए डील की आखिरी रात है. मिडिलईस्ट से अमेरिका तक चल रही कुछ घटनाओं  से इसके संकेत भी मिल रहे हैं.

नेतन्याहू से मुलाकात से कुछ घंटों पहले ट्रंप ने एक इजरायली चैनल को इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने साफ साफ कहा ईरान को परमाणु बम और लॉन्ग रेंज मिसाइल की मंजूरी नहीं मिलेगी.

दूसरी घटना अमेरिका के तेल बाजार में हुई.अमेरिका में क्रूड आयल का दाम लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर 65 डॉलर प्रति बैरल हो गया. तेल बाजार में तनाव या सप्लाई रिस्क की आशंका बढ़ते ही क्रूड आयल के दाम बढ़ते हैं. नई बढ़ोतरी को मिडिल ईस्ट में संभावित सैन्य टकराव से जोड़कर देखा जा रहा है.

आज अमेरिका ने कतर में अपने सबसे बड़े एयरबेस अल उदीद की सुरक्षा में तैनात पैट्रियॉट मिसाइल को जमीन वाले सिस्टम से हटाकर मोबाइल लॉन्चर में शिफ्ट कर दिया. युद्ध की स्थिति में इससे हमला करना या फिर रोकना आसान हो जाता है.

इन सारी घटनाओं के बीच ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी ने ओमान के सुल्तान से मस्कट में मुलाकात की. इस दौरान सुल्तान के हाथ में एक सीक्रेट डॉक्यूमेंट भी दिखा, जिसे अमेरिका के साथ समझौते की आखिरी कोशिश कहा जा रहा है.

ईरान को डॉनल्ड ट्रंप और नेतन्याहू की मीटिंग खत्म होने से पहले तक आखिरी डील देने का टाइम दिया गया है. ईरान अपनी आखिरी डील ओमान के जरिए अमेरिका को बताएगा. अगर ईरान बुधवार को संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजने और मिसाइल कार्यक्रम सीमित करने की डील देता है तो नेतन्याहू के वॉशिंगटन दौरे पर इसकी घोषणा हो जाएगी. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान डील नहीं देता तो नेतन्याहू जैसे ही अमेरिका से वापस इजरायल पहुंचेंगे. ईरान पर हमले शुरू हो जाएंगे. वहीं ईरान की डील पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बयान बताता है कि ईरान परमाणु हथियार की जिद छोड़ने को तैयार है लेकिन मिसाइल क्षमता से समझौते के लिए तैयार नहीं है. 

यानी ईरान के लिए आज का दिन ब्लैक WEDNESDAY साबित हो सकता है. बुधवार को ईरान में इस्लामिक शासन की स्थापना का जश्न मनाया जा रहा है. ईरान में आतिशबाजियां हो रही हैं. लेकिन दुनिया को आशंका है आज अमेरिका और इजरायल आतिशबाजी की जगह धमाके भी शुरू कर सकते हैं.