Israel Al Aqsa Take Over: अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल पर कब्जा जमा लिया है तो दूसरी तरफ इजरायल की नई कार्रवाई को देखकर लगता है कि वो इस्लाम में पवित्र माने जाने वाली अल-अक्सा मस्जिद के आस-पास का इलाका पूरी तरह कब्जाने की फिराक में है. इजरायल द्वारा प्रशासित यरुशलम नगर निगम बोर्ड ने अल-अक्सा मस्जिद के नजदीक बसे फिलिस्तीनियों को अपने घर खाली करने का नोटिस भेज दिया है. ये नोटिस मस्जिद के नजदीक स्थित सिलवान और अल-बुस्तान जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में भेजे गए हैं. इन क्षेत्रों में रहने वाले कुछ फिलिस्तीनियों ने अपने घर खाली कर दिए हैं जबकि कुछ को मार्च के महीने तक घर खाली करने की डेडलाइन दी गई है. शुरुआती कार्रवाई में तकरीबन 100 फिलिस्तीनी परिवारों को मस्जिद के नजदीक से हटा दिया गया है और खाली किए गए इलाकों में यहूदी नागरिकों को बसा दिया जाएगा. 

फिलिस्तीनियों को हटाकर यहूदियों को बसा रहा इजरायल

मक्का और मदीना के बाद इस्लाम में अल-अक्सा मस्जिद को ही तीसरा सबसे पवित्र स्थल माना गया है. इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक काबा की दिशा में सजदा होने की परंपरा से पहले अल-अक्सा की दिशा में ही मुसलमान सजदा करते थे. अब इजरायली प्रशासनिक संस्थाएं यहां से फिलिस्तीनी यानी मुसलमानों को हटाकर यहूदियों को बसा रही हैं. अल-अक्सा मस्जिद के नजदीकी इलाकों से फिलिस्तीनियों को हटाकर इजरायल क्या हासिल करना चाहता है.  21वीं सदी में अल-अक्सा मस्जिद को इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीनियों के संघर्ष या यूं कहें कि जंग का प्रतीक बना दिया गया था. वर्ष 2000 में दूसरा इंतिफादा यानी फिलिस्तीन और इजरायल के बीच संघर्ष अल-अक्सा के नाम पर ही शुरु किया गया था. इसी तरह वर्ष 2021 में यूनिटी इंतिफादा यानी बड़े संघर्ष के तीसरे दौर का आगाज भी रमजान के दिनों में अल-अक्सा मस्जिद से ही किया गया था. अल-अक्सा मस्जिद को कथित फिलिस्तीनी संघर्ष का दिल यानी केंद्रबिंदु भी कहा जाता है. पूरे यरुशलम में अल-अक्सा मस्जिद ही एक ऐसी जगह है जहां फिलिस्तीनी झंडे लहरा दिए जाते हैं. आज से चार साल पहले यही अल-अक्सा मस्जिद हमास के लड़ाकों और इजरायली पुलिस के बीच संघर्ष का गवाह भी बनी थी. मई 2021 में फिलिस्तीनियों ने आरोप लगाया था कि मस्जिद के नजदीक बसी आबादी को हटाने की कोशिश की जा रही है जबकि इजरायल का दावा था कि मस्जिद में दंगाइयों को छिपाया गया है. इसी तनाव की वजह से मस्जिद के अंदर इजरायली पुलिस घुसी थी और दोनों तरफ से सीमित बल-प्रयोग किया गया था. फिलिस्तीनी नागरिकों की भीड़ ने पत्थर और पेट्रोल बम फेंके थे जबकि इजरायली पुलिस ने बड़े पैमाने पर लाठीचार्ज किया था. तभी से स्थानीय प्रशासन ने अल-अक्सा मस्जिद और उसके नजदीकी इलाकों को संवेदनशील घोषित कर दिया गया था. अब हम आपको बताने जा रहे हैं कि अल-अक्सा के नजदीक क्षेत्रों ने फिलिस्तीनियों को हटाकर इजरायल क्या हासिल करना चाहता है. 

नेतन्याहू के फोन पर टेप 

इस कार्रवाई के पीछे यरूशलम नगर निगम की पहली दलील है कि 19वीं सदी में इन इलाकों में यमनी मूल के यहूदी रहा करते थे. इसी वजह से इन क्षेत्रों पर यहूदियों का नैतिक अधिकार है. इजरायल की सरकार अधिकारिक तौर पर ये भी घोषित कर चुकी है कि अल-अक्सा मस्जिद के नजदीकी इलाकों को वो पूरे विश्व के यहूदियों के लिए धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र के तौर पर विकसित करना चाहती है. ये घोषणा ही इजरायल के इरादों पर से पर्दा हटा देती है. अगर अल-अक्सा के नजदीक फिलिस्तीनी यानी मुस्लिमों का प्रभाव क्षेत्र कम हो जाएगा तो इजरायल अल-अक्सा के नजदीक स्थित वॉल ऑफ डेविड का क्षेत्र बढ़ा पाएगा. यहूदियों के लिए वॉल ऑफ डेविड एक पवित्र स्थल है. एक हजार साल से ये अल-अक्सा मस्जिद संघर्षों और युद्धों की गवाह रही है. वर्ष 1099 में पहली बार अल-अक्सा पर कब्जे के लिए धर्मयुद्ध किया गया था. इस मस्जिद के लिए हुए तीन धर्मयुद्धों में लाखों लोग मारे गए थे. आज एक बार फिर अल-अक्सा मस्जिद ऐसा तराजू बन गई है जिसपर इजरायली और फिलिस्तीनी अपनी ताकत और कब्जे के दावों को तोल रहे हैं. मस्जिद से जुड़े विवाद के साथ ही साथ इजरायल से आज एक तस्वीर भी वायरल हुई. ये तस्वीर है इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की. नेतन्याहू एक मीटिंग के लिए जा रहे थे तभी एक मीडियाकर्मी ने उनकी एक फोटो ले ली. इस तस्वीर में नेतन्याहू ने अपना फोन कान पर लगा रखा है और उनके फोन का जो कैमरा लेंस है उसके ऊपर लाल टेप लगी हुई है. ऐसी ही एक और तस्वीर भी वायरल की गई. इस तस्वीर में नेतन्याहू सदन के अंदर बैठे हैं. यहां भी उनके फोन के कैमरा लेंस पर टेप लगी हुई है. 

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क्यों लगा कैमरे पर टेप? 

आमतौर पर अपने कैमरा का लेंस बचाने के लिए लोग कैमरा पर स्क्रीन गार्ड लगाते हैं लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री ने कैमरे पर टेप ही लगा दी. सोशल मीडिया पर लोगों ने दावा किया कि कैमरा के जरिए फोन को हैक किया जा सकता है । इसी वजह से नेतन्याहू ने अपने फोन के कैमरे पर टेप लगा रखी है. मीडिया पर टेप वाली तस्वीर वायरल हुई । फिर टेप के जरिए हैकिंग से बचाने का दावा भी वायरल हुआ. एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि फोन का कैमरा ऐसा संवेदनशील उपकरण होता है जिसके जरिए फोन को हैक किया जा सकता है या फिर फोन के अंदर मौजूद जानकारी को हासिल किया जा सकता है.नेतन्याहू की ही तरह मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग और कई हॉलीवुड सेलेब्रिटी भी अपने लैपटॉप और फोन के कैमरे पर टेप लगाते हैं. अगर आपको भी अपने फोन में हैकिंग का डर है तो ये सस्ता लेकिन टिकाउ जुगाड़ आप भी अपना सकते हैं.