Why did Trump Threaten Protests in Iran: ईरान अब जंग से सिर्फ एक गोली दूर है. एक गोली..ईरान को कभी भी जंग में धकेल सकती है. ईरान के लोग खलीफा के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन कर रहे हैं. इस आंदोलन के समर्थन में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बड़ा ऐलान कर दिया है. इस ऐलान को आप ट्रंप का तेहरान तख्तापलट प्लान भी कह सकते हैं.

ईरान में महंगाई और आर्थिक अस्थिरता को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब इस्लामिक सत्ता को हटाने की मांग से साथ उग्र होता जा रहा है. ये आंदोलन राजधानी तेहरान समेत 21 से ज्यादा राज्यों में फैल चुका है. इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति ने एलान किया है आंदोलनकारियों पर सख्ती हुई तो वो ईरान पर हमला करने के​ लिए भी तैयार हैं. 

ईरान पर क्यों एक्टिव हो गए हैं ट्रंप?

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डॉनल्ड ट्रंप के इस बयान से मिडिल ईस्ट में कितना बड़ा भूकंप आने वाला है. इस बयान का ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर असर पड़ा है. आज आपको ईरान में रिजीम चेंज जैसे ऑपरेशन का समर्थन कर रहे ट्रंप की मंशा को भी समझना चाहिए.

इस विश्लेषण की शुरूआत हम अमेरिकी बुद्धिजीवी और लेखक नोआम चॉम्स्की के मशहूर कथन से करते हैं. चॉम्स्की ने कहा था.रेजीम चेंज का मतलब अक्सर ऐसी सरकारें बनाना रहा है जो अमेरिकी कंपनियों और तेल हितों के अनुकूल हों.

तो क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की निगाहें भी ईरान के तेल पर हैं. इसीलिए आंदोलनकारियों पर गोलियों का जवाब वो ईरान पर हमले से देने की बात कर रहे हैं. इसे समझने के लिए आपको सबसे पहले डॉनल्ड ट्रंप की उस धमकी के बारे में जानना चाहिए. जिसने आज पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है. जिस वक्त ईरान में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सेना को उतारा जा चुका है. 

उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया. जिसमें कहा गया है कि अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है और उन्हें बेरहमी से मारता है. जो कि उनकी आदत रही है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा. हम पूरी तरह तैयार हैं, हथियारों से लैस हैं और कार्रवाई के लिए तत्पर हैं.

प्रदर्शनकारियों पर गोली चला रहे पुलिसकर्मी

अमेरिका इससे पहले भी आंदोलनों को लेकर ईरान को धमकाता रहा है. लेकिन हथियारों के साथ तैयार होने की बात सीधे कार्रवाई की बात पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस तरह खुलकर कही है. अमेरिका की सबसे शक्तिशाली सेना ईरान जैसे देश पर हमला करने को तैयार है. यानी बड़े युद्ध के लिए तैयार है तो ये कोई छोटी मोटी धमकी नहीं है. डॉनल्ड ट्रंप ने ये बयान बहुत सोच समझ कर दिया है.

आज आपको जानना चाहिए आखिरकार ईरान में ऐसा क्या चल रहा है. जिसकी वजह से ट्रंप ने आंदोलनकारियों की मदद और एक्शन लेने की बात कही है.

आज विरोध प्रदर्शन के पांचवे दिन इसे दबाने के लिए कई शहरों में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आदेश दे दिए गए हैं . कुछ वीडियो भी सामने आए हैं. जिसमें उग्र प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बल फायरिंग करते दिख रहे हैं. ईरान में जारी इन विरोध प्रदर्शनों में अब तक 7 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. 

इससे नाराज कुछ लोगों ने पुलिस​कर्मियों पर हमला कर दिया. एक वीडियो में प्रदर्शनकारी एक पुलिस वाले को बुरी तरह से पीटते दिखाई दे रहे हैं. इसका मतलब साफ है कि अब ईरान के लोग आर या पार की लड़ाई का मन बना चुके हैं. ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शनों के दौरान लोग सीधे खामेनेई पर टारगेट करते दिख रहे हैं. इस्लामी शासन के चिन्ह जहां जहां नजर आ रहे हैं. उनमें आग लगा दी जा रही है. 

खामेनेई को हटाना चाहता है यूएस

ईरान में विरोध प्रदर्शन कर रहे लोग तानाशाह की मौत जैसे नारे लगा रहे हैं. यानी सीधे ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता खामेनेई को निशाना बनाया जा रहा है. अमेरिका भी इस बात को जानता है. खामेनेई पिछले 4 दशकों में ऐसे कई प्रदर्शनों की जड़ों को काट चुके हैं. ईरान के सुरक्षा बलों के लिए ताकत से इस प्रदर्शन को दबाना मुश्किल हो सकता है लेकिन नामुमकिन नहीं. 

अब तक ईरान में 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है. प्रदर्शनकारियों को भी पता है कि बगैर बाहरी समर्थन ईरान से खामेनेई को हटाना नामुमकिन है. ऐसे में डॉनल्ड ट्रंप के बयान को तख्तापलट के लिए अमेरिका की सहमति का हिस्सा माना जा रहा है.

जिससे आंदोलनकारियों का जोश बना रहे. हालांकि खामेनेई की तरफ से भी पलटवार शुरू हो गया है. ट्रंप की धमकी पर ईरान ने नाराजगी जाहिर की है. एक तरफ खामेनेई ने अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है..दूसरी तरफ ईरान की सड़कों पर उनके समर्थक भी उतर आए हैं. दोनों तरफ से प्रदर्शन हो रहे हैं. नारेबाजी हो रही है. खामेनेई के समर्थक अमेरिका की मौत के नारे लगा रहे हैं. आज राजधानी तेहरान में हजारों लोगों ने सरकार के समर्थन और अमेरिका के विरोध में रैली निकाली.

इसके अलावा कल हमले में मारे गए प्रदर्शनकारी के अंतिम संस्कार में जुटी भीड़ पर भी पत्थर फेंके गए. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि खामेनेई समर्थक कट्टरपंथियों ने उन पर पत्थर फेके हैं. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि किस तरह कुछ लोग अपनी कार की तरफ भाग रहे हैं. दूसरी तरफ कुछ लोग उन पर पत्थर फेंक रहे हैं. इससे पता चलता है कि ईरान में गृह युद्ध जैसी स्थिति बनती जा रही है. 

एक डॉलर में 15 लाख तक गिरा रियाल

हालांकि अब ट्रंप के सीधे प्रदर्शनकारियों के पक्ष में बयान देने के बाद खामेनेई विरोधियों का हौसला भी बढ़ गया है. जो बढ़ती महंगाई, चौपट होती अर्थव्यवस्था की वजह कट्टरपंथी इस्लामी सरकार को मानते हैं और इसे हटाना चाहते हैं. दबाव में आई ईरान की सरकार भी मौजूदा हालात के लिए खुद को कसूरवार मान रही है. उसका कहना है कि मौजूदा परिस्थिति के लिए सिर्फ अमेरिका नहीं बल्कि ईरान की सरकार जिम्मेदार है.  

ईरान की मुद्रा रियाल के सर्वकालिक निचले स्तर पर जा चुकी है. आखिरकार इसका मुख्य कारण अमेरिका को क्यों कहा जा रहा है. ईरान की सरकार की किन गलतियों से परिस्थितियां इतनी खराब हो गईं कि लोग शक्तिशाली खामेनेई को सत्ता से हटाने के लिए सड़कों पर उतर आए.

2018 में डॉनल्ड ट्रंप ने ही ईरान के साथ परमाणु समझौता तोड़ा और ईरान पर प्रतिबंध लगाए. जिससे ईरान में विदेशी निवेश और डॉलर का प्रवाह बंद हो गया. अमेरिका ने सीधे ईरान के तेल निर्यात पर वार किया. जिससे एक दिन में 25 लाख बैरल तेल बेचने वाले ईरान का तेल निर्यात 5 लाख बैरल तक गिर गया. अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय भुगतान सिस्टम यानी SWIFT से ईरानी बैंकों को हटा दिया. जिससे ईरान का दुनिया के देशों से व्यापार करना मुश्किल हो गया.

अमेरिका ने ईरान पर सेकेंडरी सैंक्शन्स भी लगा दिए. इसका मतलब ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर भी अमेरिकी प्रतिबंध लग जाएंगे. इस वजह से चीन और भारत जैसे देश भी ईरान से खुले तौर पर तेल नहीं खरीद पाए. बाइडेन के शासन में ईरान पर प्रतिबंध सख्ती से लागू नहीं हुए. लेकिन 2025 में ट्रंप की वापसी के बाद ईरान पर प्रतिबंध दोबारा सक्रिय हो गए. इससे ईरान पूरी तरह अलग थलग पड़ गया.

अमेरिकी प्रतिबंधों से स्वाहा हुआ ईरान

इसके बाद डॉलर की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने अत्यधिक रियाल छापे. जिससे व्यापार, कर्मचारियों की सैलरी और सब्सिडी दी जा सके. इसकी वजह से 2018 से लेकर 2026 तक रियाल में 96 प्रतिशत की गिरावट आ गई. इसे आप इस तरह भी समझ सकते हैं की 2018 में एक डॉलर की कीमत 55 हजार रियाल थी.

लेकिन 2026 में 1 डॉलर की कीमत बढ़कर 15 लाख रियाल हो गई है. सोचिए एक डॉलर की कीमत 15 लाख रियाल . क्या स्थिति हो गई है ईरान की मुद्रा की. इसी वजह से लोगों का भरोसा सरकार का आर्थिक नीतियों से उठ गया है.

यानी पहले अमेरिका ने कड़े प्रतिबंध लगाकर बड़े तेल भंडार वाले देश ईरान की इकोनॉमी बर्बाद कर दी. जिसकी वजह से परेशान लोगों ने रिजीम चेंज की मांग शुरू कर दी. अब ये आंदोलन खामेनेई दबा ना दें. इसलिए ट्रंप ईरान पर हमले की धमकी दे रहे हैं. माना जा रहा है कि इस धमकी से सुरक्षा बल भी प्रदर्शनकारियों पर बहुत ज्यादा कड़ी कार्रवाई करने से बचेंगे. 

ट्रंप के खुलकर सपोर्ट में आने से अब ईरान के वो लोग भी सड़कों पर निकल सकते हैं. जो अब तक इस्लामिक शासन के डर से खुलकर नहीं बोल पा रहे थे. वैसे अमेरिका ने ये भी तय कर लिया है. खामेनेई को सत्ता से हटाकर किसे सत्ता में बिठाना है. 

क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सत्ता की पहल

ईरान के साथ साथ किस तरह कनाडा और ब्रिटेन तक में ईरान के लोग शाह जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं. ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी को वापस तेहरान की सत्ता देने की मांग हो रही है. ये वो ही क्राउन प्रिंस हैं,जिनके परिवार के शासन को 1979 में इस्लामिक क्रांति के जरिए खत्म किया गया था. ये काम खामेनेई के गुरू और इस्लामिक क्रांति के नेता अयातुल्लाह खोमैनी ने किया था. अब उसी इस्लामिक शासन को खत्म करके वापस शाह को ईरान बुलाने की मांग हो रही है.

इन प्रदर्शनों में दिख रहे ईरान के झंडे में इस्लामिक चिन्ह की जगह शेर और सूरज की तस्वीर भी ध्यान से देखी होगी. 1979 से पहले ईरान के झंडे का स्वरूप ऐसा ही था. जिसे इस्लामिक क्रांति के बाद बदल दिया गया था. अब एक बार फिर ईरान में सूरज और तलवार वाले झंडे को उठाने वालों की संख्या बढ़ रही है. 

ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी भी एक्टिव हो गए हैं और प्रदर्शनकारियों से डटे रहने की अपील कर रहे हैं. वे दुनिया से मांग कर रहे हैं कि ईरान के प्रदर्शनकारियों को अकेले ना छोड़ा जाए. जिसका असर ट्रंप के बयान के तौर पर सामने आया है. 

रजा पहलवी फिलहाल अमेरिका में रहते हैं और वहीं से ईरान में अपने समर्थकों के अंदर जोश भर रहे हैं. यानी ईरान में विरोध प्रदर्शन को अमेरिका से कंट्रोल किया जा रहा है. ऐसे में अगर एक बार फिर अमेरिका समर्थक शाह ईरान की सत्ता में आ गए तो ईरान के तेल पर भी अमेरिका का कब्जा हो जाएगा.