
Maria Corina Machado presents her Nobel Prize to Trump: अमेरिकन मीडिया में दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमले की अपनी योजना फिलहाल टाल दी है. लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है. आज नहीं तो कल ट्रंप इसलिए भी हमला कर सकते हैं. जिस एक वजह से वो पहले दुनिया भर में सरपंच बनकर सीजफायर कराने का दावा कर रहे थे, वो वजह अब नहीं रही. आप भी जानते हैं कि ट्रंप को सिर्फ नोबेल शांति पुरस्कार चाहिए था. ये नोबेल उन्हें आखिरकार मिल गया है. आप कह सकते हैं कि उन्होंने नोबेल की डील कर ली है.
मचाडो ने गिफ्ट कर दिया नोबेल अवार्ड
वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने 2025 का जीता हुआ अपना नोबेल शांति पुरस्कार उन्हें गिफ्ट कर दिया है. लेकिन सवाल सीधा है- क्या ये नोबेल, वेनेजुएला की सत्ता के बदले की गई डील है? क्या अब देशों की तक़दीर भी “मेडल के बदले” बदली जाएगी?और क्या ट्रंप यह नोबेल लेकर मचाडो को वेनेजुएला की सत्ता रिटर्न गिफ्ट में दे देंगे?अब हम इसका विश्लेषण करेंगे.
इस मेडल के मिलने पर ट्रंप के चेहरे पर वैसी ही खुशी है जैसी किसी बच्चे को पड़ोस वाले का खिलौना छीनकर मिलती है. यही है वो नोबेल पुरस्कार जो उन्हें गिफ्ट में या कहें डील में मिला है. ट्विस्ट ये है कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने यह साफ कर दिया है कि, ये मेडल है, कोई नेटफ्लिक्स का पासवर्ड नहीं जो शेयर कर लिया! प्रतीकात्मक रूप से यह मेडल भले ही ट्रंप के पास रह सकता है लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में यह मेडल ट्रांसफर नहीं किया जा सकता.
अब जरा क्रोनोलॉजी समझिए. वेनेजुएला में मचाडो ने निकोलस मादुरो का दमन झेला. ट्रंप ने मादुरो को सपरिवार गिरफ्तार करवा दिया. मचाडो को लगा- ‘अब तो मेरा नंबर आएगा’. लेकिन ट्रंप ने पासा पलट दिया और डेल्सी रोड्रिगेज को कार्यवाहक राष्ट्रपति बना दिया. मचाडो को समझ आ गया कि ट्रंप को खुश करना है तो उन्हें वो दो, जिसके लिए उनके अंदर छटपटाहट है- ‘नोबेल प्राइज’.
ट्रंप बोले- मचाडो एक अद्भुत महिला
वैसे भी मचाडो के पास बचा ही क्या था? सपोर्ट? नहीं. सेना? नहीं. देश? नहीं. लेकिन नोबेल पुरस्कार, वो चीज थी, जिसे पाने के लिए ट्रंप कुछ भी करने को तैयार थे. मचाडो के पास ये था और उन्होंने ट्रंप को वो दे दिया. यानी डील सिंपल है “सर, मेडल लीजिए…कुर्सी दे दीजिए…”. अब सवाल है कि क्या नोबेल के बदले किसी देश की तकदीर का सौदा हो सकता है?
ट्रंप का ट्रूथ और तेल का खेल समझना अच्छे-अच्छों के बस की बात नहीं है. इस मामले में ट्रंप के संकेत थोड़े अलग रहे हैं. ट्रंप ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से कहा था कि मचाडो के लिए वेनेजुएला का नेतृत्व करना “मुश्किल” होगा क्योंकि उनके पास देश के भीतर पर्याप्त समर्थन नहीं है.
लेकिन ये तब कहा था जब मचाडो ने उन्हें उनकी सबसे पसंदीदा चीज गिफ्ट नहीं की थी. अब तो मेडल मिलने के बाद वे फूले नहीं समा रहे हैं. उन्होंने मचाडो की तारीफ के कसीदे पढ़ते हुए अपने सोशल मीडिया हैंडल ट्रुथ प्लेटफॉर्म पर लिखा- ‘वह एक अद्भुत महिला हैं जिन्होंने बहुत कुछ सहा है. यह आपसी सम्मान की एक अद्भुत मिसाल है.’
क्या मचाडो को मिल पाएगी बड़ी कुर्सी?
असली बात ये है कि ट्रंप की नजर मेडल से ज्यादा वेनेजुएला के तेल के कुओं पर है. ट्रंप को शांति चाहिए, लेकिन तेल की खुशबू के साथ! मचाडो को लगा उन्होंने निवेश किया है, लेकिन ट्रंप के साथ डील करना मतलब- ‘धुआं उनका, आग अपनी’.
आज आपको यह भी जानना चाहिए कि क्या कभी इस तरह से पुरस्कार ट्रांसफर करने का कोई उदाहरण मौजूद है? मचाडो ने खुद इस भेंट की तुलना सालों पहले जॉर्ज वॉशिंगटन और साइमन बोलिवर के बीच हुए मेडल के आदान-प्रदान से की है. इसके अलावा दिमित्री मुरातोव ने अपना मेडल 100 मिलियन डॉलर यानी करीब 800 करोड़ रुपए से ज्यादा में नीलाम कर दिया था ताकि यूक्रेन के युद्ध पीड़ितों की मदद की जा सके.
पिछले साल शांति पुरस्कारों की घोषणा से पहले ट्रंप कई बार सात युद्ध रुकवाने का दावा कर चुके थे. वो कह रहे थे कि एक ‘पीसमेकर’ होने के नाते उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाना चाहिए. लेकिन जब यह पुरस्कार उनके बजाए वेनेजुएला की विपक्षी नेता को मिल गया तो वो बेहद नाराज हुए थे. अब वही पुरस्कार प्रतीकात्मक रूप से ही सही, घुम-फिर कर उनके पास लौट आया है.
ट्रंप ने कहीं मचाडो को गच्चा तो नहीं दे दिया?
लेकिन बदले में मारिया मचाडो को क्या मिला? शून्य बटे सन्नाटा? नहीं…ट्रंप की ‘अनप्रेडिक्टेबिलिटी’ ही उनका असली नोबेल है. वो जो कहते हैं, वो करते नहीं…वो जो नहीं कहते, वो अवश्य करते हैं. उन्होंने भले ही यह कह दिया है कि मचाडो के लिए वेनेजुएला का नेतृत्व करना मुश्किल होगा, लेकिन वो यह नेतृत्व मचाडो को सौंप सकते हैं, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि ट्रंप के दौर में राजनीति भी डील है…और नोबेल भी.
फिलहाल, वेनेजुएला की जनता सोच रही है- मेडल मचाडो ने दिया, खुश ट्रंप हो रहे हैं और सत्ता में डेल्सी बैठी हैं. इसे कहते हैं. इंटरनेशनल कॉमेडी ऑफ एरर्स!
