Trump Board Of Peace Meeting: कल रात अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में यूएस प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप का दरबार लगा था. इस दरबार को आप गाजा दरबार भी कह सकते हैं. क्योंकि ये दरबार गाजा के नाम पर ही लगा था. वहां ट्रंप की ओर से बनाए गए बोर्ड ऑफ पीस की बैठक हो रही थी. बैठक में 27 सदस्य देश समेत कुल 40 देश शामिल थे. इनमें कुछ ऐसे भी देश थे, जो सिर्फ दरबारी की भूमिका निभा रहे थे. इनमें पाकिस्तान शीर्ष पर था. इस दरबार में क्या-क्या हुआ? ट्रंप ने कैसे अपने दरबारियों की बेइज्जती की? कैसे बेइज्जती के बाद भी दरबारी ट्रंप को राजा की तरह सम्मान दे रहे थे. उनकी जी हुजूरी कर रहे थे? चलिए ये सब जानते हैं. 

ट्रंप के चमचे बने शहबाज 

डॉनल्ड ट्रंप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को स्कूल के बच्चे की तरह ट्रीट करते दिख रहे हैं, जो हेडमास्टर के कहने पर खड़ा हो जाता है और उसके कहे बगैर बैठने की हिम्मत भी नहीं करता. इसने शहबाज शरीफ को दुनिया भर में हंसी का पात्र बना दिया. वैसे शहबाज पहले से हंसी के पात्र हैं, लेकिन इस बार ट्रंप ने उनकी बेइज्जती का नया रिकॉर्ड बना दिया. ट्रंप ने शहबाज से उठने के लिए कहा बिना वक्त गंवाए शहबाज क्लास के किसी शरीफ बच्चे की तरह खड़े हो गए. ट्रंप ने एक सेकेंड के लिए खड़ा होने के लिए कहा और 74 वर्ष के शहबाज शरीफ ने खड़ा होने में आधा सेकेंड नहीं लगाया. उनकी पीठ पहले से झुकी हुई थी. खड़े होकर दो बार उन्होंने ट्रंप के सामने अपना सर झुकाया. जैसे क्लास में यस सर कह रहे हों. अपनी कुर्सी पर दोबारा बैठते वक्त शहबाज शरीफ थोड़ा परेशान दिखे क्योंकि ट्रंप ने उनको खड़े होने के लिए कहा था बैठने के लिए नहीं कहा था और ट्रंप के दरबार में जब तक बैठने के लिए नहीं कहा जाए तब तक शहबाज जैसे रीढ़ विहीन पाकिस्तानी खड़े ही रहते हैं. कुछ देर तक शहबाज भी खड़े रहे. वो समझ नहीं पा रहे थे, उनको खड़े रहना है या फिर बैठ जाना है. इस वजह से कुछ देर तक वो खड़े रहने और बैठने की बीच की स्थिति में बने रहे. जब तक ट्रंप भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम पर झूठे दावे कर रहे थे, तब तक शहबाज ने बैठने की हिम्मत नहीं जुटाई. इसके बाद जब ट्रंप ने दूसरे देशों के युद्ध रुकवाने वाले किस्से सुनाने शुरू किए तब जाकर शहबाज शरीफ ने हिम्मत की और नीचे बैठ गए. 

शहबाज का गुलामों जैसे बर्ताव 

अमेरिका को पाकिस्तान से गुलामी करवाने की आदत है और पाकिस्तान के नेताओं की मानसिकता अमेरिका की गुलामी करने वाली ही रही है इसीलिए किसी भी वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के नेता आत्मविश्वास से भरे नहीं दिखाई देते वैसे ही डरे और परेशान नजर आते हैं जैसे बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में शहबाज शरीफ दिख रहे थे. शहबाज शरीफ की गुलामी वाली मानसिकता के कई वीडियो बोर्ड ऑफ पीस की मीटिंग से सामने आए हैं, जिसमें शहबाज शरीफ ट्रंप की नजर में आने की तमाम कोशिशें करते दिखे. एक और वीडियो में ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस में आए नेताओं से कुछ बात करते नजर आए. शहबाज शरीफ इस वीडियो में पीछे वाली लाइन में खड़े हुए हैं. ट्रंप दूसरे नेताओं से बात कर रहे हैं, लेकिन सिर्फ शहबाज शरीफ ने ट्रंप को देखते ही एक गार्ड की तरह सैल्यूट ठोंक दिया. इस वीडियो को देखकर पाकिस्तान में भी शहबाज का मजाक बनाया जा रहा है. ट्रंप शहबाज को देखकर समझ गए थे शायद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को अपने देश में दिखाने के लिए वीडियो बनवाना है, हालांकि वह शहबाज में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे थे, लेकिन जब शहबाज सामने ही खड़े हो गए तो ट्रंप ने उनके कंधे पर हाथ रखकर उनको अपनी तरफ खींचा. फिर दूसरे नेताओं से हाथ मिलाने लगे, लेकिन शहबाज..ट्रंप से हाथ मिलाए बगैर जाने को तैयार नहीं थे. शहबाज ने ट्रंप की तरफ हाथ बढ़ाया, लेकिन ट्रंप अब ना तो शहबाज की बात सुन रहे थे ना ही उनसे हाथ मिलाने को इच्छुक थे. उन्होंने दूसरे नेताओं से बात शुरू कर दी. इसलिए खीजकर शहबाज शरीफ ने अपना बढ़ा हुआ हाथ झटका और वहां से चले गए. इस मीटिंग में ज्यादातर खाड़ी देशों ने अपने प्रतिनिधियों को भेजा था, लेकिन शहबाज शरीफ खुद वहां पहुंच गए थे, हालांकि उनसे ट्रंप तो क्या किसी भी देश के नेता ने बात करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई. कुछ ऐसे वीडियो भी सामने आए जिसमें वो अकेले खड़े दिखाई दिए. मुंह में हाथ रखकर इधर उधर देखते और दूसरे नेताओं की बात सुनते दिखे. सच्चाई यही है. वॉशिंगटन में शहबाज शरीफ सिर्फ ट्रंप के सामने नंबर बनाने के लिए आए थे और इसीलिए मीटिंग में सिर्फ हरकतों से नहीं अपने बयानों से भी गुलामी वाली मानसिकता दिखाई. 

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चंदा इकट्ठा करने के लिए बुलाई बैठक

शहबाज शरीफ, डॉनल्ड ट्रंप को साउथ एशिया का रक्षक बता रहे हैं. साउथ एशिया का मुक्तिदाता बता रहे हैं. वह कह रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान का युद्ध नहीं रुकता तो लाखों करोड़ों लोग मारे जाते. अब दुनिया भर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के बयान को बूट पॉलिस कहकर शेयर किया जा रहा है. बोर्ड आफ पीस की मीटिंग में गाजा पर बात की जगह ऐसे ही लतीफे चलते रहे. ट्रंप के दरबार में आया हर दरबारी महाराज की शान में कसीदे पढ़ता रहा और इसे सुनते सुनते ट्रंप भी सो गए. वाकई में बोर्ड आफ पीस की मीटिंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को नींद आ गई. कतर के उप विदेश मंत्री अपनी बात रख रहे हैं और उनकी बात सुनने के बजाय डॉनल्ड ट्रंप झपकी ले रहे हैं. सोशल मीडिया में इसे झपकी कहा जा रहा है, जबकि ट्रंप के समर्थक इसे गंभीर चिंतन कह रहे हैं. इस बहस के बीच जब कतर के प्रतिनिधि की बात खत्म हुई तो लोगों ने ताली बजाई, जिससे ट्रंप की नींद टूटी और वो भी ताली बजाने लगे. वॉशिंगटन की बॉर्ड आफ पीस की मीटिंग में डॉनल्ड ट्रंप ने सिर्फ कतर और पाकिस्तान की बेइज्जती नहीं की चीन का मजाक भी उड़ाया. ट्रंप एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में एक ही कद वाले चीन के सैनिकों का मजाक उड़ाते दिखे, लेकिन शायद अपने जन्मदिन पर 45 मिलियन डॉलर के खर्च से करवाई गई सैनिकों की परेड भूल गए, जिसे ना तो लोग देखने पहुंचे और अमेरिकी सैनिकों की परेड का दुनिया भर में मजाक उड़ा क्योंकि इससे बेहतर परेड स्कूली बच्चे करते हैं. गाजा में शांति और पुनर्निर्माण की बात करने के बजाय ट्रंप ने इस मंच से ईरान को धमकाना शुरू कर दिया. उन्होंने चीन का अपमान किया और ईरान को धमकी दी. बोर्ड आफ पीस की मीटिंग से ट्रंप ने बहुत ज्यादा रकम इकट्ठी करने की योजना बनाई थी, लेकिन चीन, रूस और यूरोपीय देशों ने इससे दूरी बनाकर रखी है और भारत भी इसका सदस्य नहीं बना. इस मीटिंग में भारत ने आब्जर्वर देश के तौर पर हिस्सा​ लिया, जिस मीटिंग में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ खुद पहुंचे थे. वहां पर भारत ने अमेरिका में भारत की उपराजदूत नामग्या सी खम्पा को भेजा था.